Artificial Insemination: पशुपालकों को घर-द्वार पर कृत्रिम गर्भाधान (एआइ) की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए पशुपालन विभाग ने पहल तेज कर दी है. बुधवार को जिला पशुपालन कार्यालय में प्रशिक्षण प्राप्त 16 मैत्री कर्मियों के बीच प्रमाणपत्र और कृत्रिम गर्भाधान (एआइ) किट का वितरण किया गया. जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ. राजेश कुमार राजू ने सभी कर्मियों को प्रमाणपत्र और किट प्रदान किये.
हर पंचायत में एक मैत्री कर्मी का चयन
जिला पशुपालन पदाधिकारी ने बताया कि सरकार की योजना के तहत प्रत्येक पंचायत में एक मैत्री कर्मी का चयन किया गया है. प्रशिक्षण प्राप्त ये कर्मी अपने-अपने पंचायत क्षेत्र में किसानों और पशुपालकों के घर तक कृत्रिम गर्भाधान की सुविधा पहुंचाएंगे. इसके साथ ही पशुओं के बंध्याकरण की सुविधा भी उपलब्ध करायी जायेगी.
प्रजनन सेवाओं के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा
स्थानीय स्तर पर सेवा उपलब्ध होने से ग्रामीण क्षेत्र के पशुपालकों को पशुओं के प्रजनन संबंधी सेवाओं के लिए दूर स्थित केंद्रों तक जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. इससे पशुपालकों के समय और श्रम की बचत होगी. घर के समीप सुविधा मिलने से आने-जाने में होने वाले खर्च को भी कम करने में मदद मिलेगी.
नस्ल सुधार से बढ़ सकता है दूध उत्पादन
विभाग के अनुसार, स्थानीय स्तर पर कृत्रिम गर्भाधान की सुविधा उपलब्ध होने से पशुओं की नस्ल सुधारने में मदद मिलेगी. बेहतर नस्ल के पशुओं से दूध उत्पादन बढ़ने की भी संभावना है. इससे पशुपालकों की आय में वृद्धि में मदद मिल सकती है.
पशुपालकों को देखभाल की जानकारी भी देंगे
मैत्री कर्मी कृत्रिम गर्भाधान के साथ पशुपालकों को पशु प्रजनन और देखभाल से जुड़ी आवश्यक जानकारी भी उपलब्ध कराएंगे. विभाग का उद्देश्य गांव स्तर पर पशुपालकों को जरूरी सेवाएं और तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराना है.
ये चिकित्सक और कर्मी रहे मौजूद
कार्यक्रम में पशु शल्य चिकित्सक डॉ. ओमप्रकाश प्रसाद, डॉ. हीरा रजक, डॉ. विवेक कुमार वर्मा, डॉ. राहुल आनंद, डॉ. विजय चौधरी सहित अन्य कर्मी मौजूद रहे.
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