पुलिस के पास नहीं है किरायेदारों की जानकारी

शहर में मकान मालिकों द्वारा अपने किरायेदारों की जानकारी पुलिस को नहीं दी जाती है. जबकि शहरी क्षेत्र में तकरीबन एक लाख से ज्यादा लोग किराए के मकान में निवास कर रहे हैं, लेकिन पुलिस रिकॉर्ड में एक भी नाम दर्ज नही है. पुलिस सत्यापन नहीं होने का फायदा उठाकर किराये के मकान में कई बार असामाजिक तत्व भी शहर में निवास कर लेते हैं व अपराध कर आसानी से फरार हो जाते हैं.

प्रतिनिधि, सीवान. शहर में मकान मालिकों द्वारा अपने किरायेदारों की जानकारी पुलिस को नहीं दी जाती है. जबकि शहरी क्षेत्र में तकरीबन एक लाख से ज्यादा लोग किराए के मकान में निवास कर रहे हैं, लेकिन पुलिस रिकॉर्ड में एक भी नाम दर्ज नही है. पुलिस सत्यापन नहीं होने का फायदा उठाकर किराये के मकान में कई बार असामाजिक तत्व भी शहर में निवास कर लेते हैं व अपराध कर आसानी से फरार हो जाते हैं. लेकिन इनके खिलाफ पुलिस भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर पाती है. पुलिस ने लंबे समय से शहर के सभी वार्डों में किराएदारों की सूची तैयार नहीं की है. शहर में हजारों की संख्या में लोग किराये के मकानों में रहते हैं. लेकिन शहर में शत-प्रतिशत सर्वे नहीं होने से पुलिस का सत्यापन भी नहीं हो सका है. साथ ही किरायेदार और भवन मालिक के बीच अनुबंध भी नहीं होता है. सिर्फ आपसी बातचीत में ही किराया तय कर निवास शुरू कर दिया जाता है. जबकि किरायेदार और भवन मालिक के बीच अनुबंध होकर उसकी प्रतिलिपि थाना में देना भी जरूरी होता है. इस नियम का भी भवन मालिक और किरायेदार दोनों ही पालन नहीं कर रहे हैं. यही कारण हैं कि कुछ शरारती तत्व भी पढ़ाई, व्यवसाय और अन्य पेशा बताकर किरायेदार के रूप में रहने लगते हैं. अपराधियों तक आसानी से पहुंच सके पुलिस नियमानुसार शहर में किराये से कमरा देने वाले भवन मालिक को अपने किरायेदार का नाम, पता, मोबाइल नंबर के साथ आधार कार्ड, दो फोटो सहित अन्य दस्तावेज की एक-एक प्रति पुलिस थाना में जमाकर एक प्रति स्वयं के पास रखना चाहिए. इससे किराएदार अपराधी एवं असामाजिक तत्व होने पर उसका पता पुलिस आसानी से कर सकती है. साथ ही अपराध घटित होने पर अपराधी किराएदार पुलिस की पकड़ में आ सके. घटना के बाद आरोपी को ढूंढते रह जाती हैं पुलिस अक्सर देखा जाता हैं कि शहर में बेतिया, मोतिहारी, चंपारण, देवरिया, गोरखपुर, बलिया सहित अन्य जिलों से काफी मात्रा में लोग शहर में रहकर नौकरी, व्यवसाय,इ रिक्सा, रिक्शा सहित अन्य कारोबार करते हैं. जो किराए के मकान में रहते हैं. इन्ही लोगों द्वारा कभी कभी आपराधिक घटनाओं को अंजाम दिया जाता हैं. जिसके बाद वे फरार हो जाते हैं. जहां पुलिस उन्हें ढूंढते रह जाती हैं और अंत में मामला रफा दफा हो जाता है. बोले एसपी- भवन किराया में देने के साथ ही मालिक को किरायेदार की जानकारी तत्काल पुलिस को दस्तावेजों के साथ देनी होगी. इसके लिए अभियान भी चलाया जायेगा. मनोज कुमार तिवारी, एसपी, सीवान

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Author: DEEPAK MISHRA

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