Siwan News : जिले में पंचायतों के परिसीमन को लेकर नई प्रक्रिया शुरू होने जा रही है. राजस्व गांवों एवं वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर पंचायतों का परिसीमन निर्धारित किया जाएगा. इस प्रक्रिया के बाद जिले की पंचायतों की वर्तमान संरचना में बड़ा बदलाव संभव है. फिलहाल जिले में 283 पंचायतें हैं, लेकिन परिसीमन के बाद इनकी संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है.
न्यूनतम 7,000 आबादी पर बनेगी नई पंचायत
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, पंचायत परिसीमन के दौरान न्यूनतम 7,000 की जनसंख्या पर एक पंचायत का गठन किया जाएगा. यदि दो राजस्व गांवों की कुल आबादी 7,000 या उससे अधिक होती है, तो उन्हें मिलाकर एक नई पंचायत बनाई जा सकेगी. साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी राजस्व गांव को दो अलग-अलग पंचायतों में विभाजित न किया जाए.
उत्तर-पश्चिम से शुरू होकर दक्षिण-पूर्व तक होगा परिसीमन
जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, पंचायत परिसीमन की प्रक्रिया संबंधित प्रखंड के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र से शुरू होकर दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र तक पूरी की जाएगी. प्रशासन का प्रयास रहेगा कि किसी भी गांव का विभाजन न हो. हालांकि, यदि किसी गांव की आबादी या प्रशासनिक आवश्यकता के कारण ऐसा करना अनिवार्य होगा, तभी उसका विभाजन किया जाएगा.
प्राकृतिक सीमाओं को दी जाएगी प्राथमिकता
नई पंचायतों की सीमाएं तय करते समय प्राकृतिक और स्थायी सीमाओं को प्राथमिकता दी जाएगी. इसके तहत नदी, रेलवे लाइन, नहर, प्रमुख सड़क और अन्य सार्वजनिक पहचान वाले स्थलों को पंचायत की सीमा निर्धारण का आधार बनाया जाएगा. इससे परिसीमन के बाद सीमा विवाद की संभावनाएं कम होने की उम्मीद है.
सबसे अधिक आबादी वाले गांव में होगा पंचायत मुख्यालय
सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, सामान्य परिस्थितियों में पंचायत मुख्यालय उसी गांव में स्थापित किया जाएगा, जहां सबसे अधिक आबादी निवास करती है. यदि किसी पंचायत क्षेत्र में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं पिछड़े वर्ग की संयुक्त आबादी 50 प्रतिशत से अधिक होगी, तो मुख्यालय उसी वर्ग की सर्वाधिक आबादी वाले गांव में बनाया जाएगा.
गांव के नाम पर होगा पंचायत का नाम
नए दिशा-निर्देशों के तहत पंचायत का नाम और उसका मुख्यालय सामान्यतः उसी गांव के नाम पर होगा, जहां सबसे अधिक जनसंख्या निवास करती है. प्रशासन का मानना है कि नए परिसीमन से पंचायतों के प्रशासनिक संचालन में सुविधा होगी और स्थानीय विकास योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन का मार्ग प्रशस्त होगा.
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