टीबी की पहचान अब और तेज, सीवान में शुरू हुई ओपन RT-PCR जांच; बिना लक्षण वाले मरीज भी होंगे स्क्रीनिंग के दायरे में

Open RT-PCR TB Testing Siwan : देश से टीबी उन्मूलन अभियान को नई गति देने के लिए सीवान सदर अस्पताल में ओपन RT-PCR टीबी जांच परियोजना की शुरुआत की गई है. इस तकनीक के जरिए अब बिना लक्षण वाले जोखिमग्रस्त लोगों में भी शुरुआती स्तर पर टीबी की पहचान की जा सकेगी.

Open RT-PCR TB Testing Siwan : देश से टीबी उन्मूलन अभियान को नई गति देने के लिए सीवान सदर अस्पताल में ओपन RT-PCR टीबी जांच परियोजना की शुरुआत की गई है. इस तकनीक के जरिए अब बिना लक्षण वाले जोखिमग्रस्त लोगों में भी शुरुआती स्तर पर टीबी की पहचान की जा सकेगी. बिहार में इस पायलट प्रोजेक्ट के लिए केवल पटना और सीवान की लैब का चयन किया गया है.

सीवान में शुरू हुई ओपन RT-PCR टीबी जांच परियोजना

प्रतिनिधि, सीवान. केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के केंद्रीय टीबी प्रभाग के निर्देश पर गुरुवार को सदर अस्पताल के आरटी-पीसीआर लैब में ओपन RT-PCR टीबी जांच परियोजना का शुभारंभ किया गया. पांच सदस्यीय विशेषज्ञ टीम ने लैब कर्मियों को क्वांटिप्लस MTB फास्ट डिटेक्शन किट के माध्यम से टीबी जांच का प्रशिक्षण दिया. प्रशिक्षण के बाद बलगम के नमूनों की ट्रायल जांच कर परियोजना की औपचारिक शुरुआत की गई.

अब बिना लक्षण वाले लोगों की भी होगी टीबी जांच

इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य टीबी की शुरुआती अवस्था में ही पहचान कर मरीजों का समय पर इलाज सुनिश्चित करना है. अब ऐसे लोगों के स्पुटम (बलगम) की भी मॉलिक्यूलर जांच होगी, जिनमें बीमारी के स्पष्ट लक्षण नहीं हैं. इससे संक्रमण का समय रहते पता लगाकर उसके फैलाव को रोका जा सकेगा.

किन लोगों की होगी प्राथमिकता से स्क्रीनिंग

केंद्रीय टीबी प्रभाग के प्रोग्राम मैनेजर वरुण श्रीवास्तव ने बताया कि परियोजना के तहत असिम्प्टोमैटिक (बिना लक्षण वाले) लेकिन टीबी के उच्च जोखिम वाले लोगों की जांच की जाएगी. इनमें डायबिटीज, किडनी रोग, एचआईवी, उच्च रक्तचाप तथा अन्य गंभीर सह-रोगों से पीड़ित मरीज शामिल हैं. प्रशिक्षण के तुरंत बाद परियोजना के तहत नमूनों की जांच शुरू कर दी गई.

बिहार में सिर्फ पटना और सीवान का हुआ चयन

विलियम जे. क्लिंटन फाउंडेशन (WJCF) के सहयोग से संचालित इस पायलट परियोजना के लिए बिहार में केवल पटना और सीवान की प्रयोगशालाओं का चयन किया गया है. केंद्रीय टीबी प्रभाग की निगरानी में चल रहे इस अध्ययन के तहत आईसीएमआर और सीडीएससीओ से स्वीकृत स्वदेशी क्वांटिप्लस MTB फास्ट डिटेक्शन किट से थूक के नमूनों में माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस कॉम्प्लेक्स की पहचान की जाएगी.

गेट्स फाउंडेशन उठाएगा पूरा खर्च

डब्ल्यूजेसीएफ ने बताया कि परियोजना में उपयोग होने वाली RT-PCR किट और अन्य सभी उपभोग्य सामग्रियों का खर्च गेट्स फाउंडेशन के वित्तीय सहयोग से वहन किया जाएगा. इससे सदर अस्पताल या राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम पर किसी प्रकार का अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं पड़ेगा.

चार विशेषज्ञों की टीम संभालेगी जांच

परियोजना के संचालन के लिए माइक्रोबायोलॉजिस्ट तौसीफ रजा, सीनियर लैब टेक्नीशियन प्रदीप कुमार के साथ लैब टेक्नीशियन मो. मोदस्सर हुसैन और शंभूनाथ सिंह को जिम्मेदारी सौंपी गई है. वहीं गौतम कुमार को राज्य स्तरीय समन्वयक एवं प्रमुख संपर्क अधिकारी बनाया गया है.

Siwan News : विशेषज्ञों ने दिया प्रशिक्षण

प्रशिक्षण कार्यक्रम में डब्ल्यूजेसीएफ के डॉ. आनंद, फैजुल हसन और नदीम हसन सहित विशेषज्ञों ने नई जांच तकनीक, प्रक्रिया और कार्यप्रवाह की विस्तृत जानकारी दी. जिला टीबी कार्यक्रम के डिस्ट्रिक्ट सुपरवाइजर पंकज कुमार सिंह भी परियोजना के सफल क्रियान्वयन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं.

सीडीओ बोले- टीबी उन्मूलन अभियान को मिलेगी नई ताकत

सीडीओ डॉ. अशोक कुमार ने कहा कि ओपन RT-PCR परियोजना से टीबी की जल्द और सटीक पहचान संभव होगी. बिना लक्षण वाले जोखिमग्रस्त लोगों की समय पर जांच और उपचार शुरू होने से संक्रमण की श्रृंखला टूटेगी और देश के टीबी उन्मूलन अभियान को नई मजबूती मिलेगी.

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Published by: Amarnath sharma

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