सीवान: चार दिन की नवजात बच्ची की मौत से मचा हड़कंप, पुलिस जांच में बेटी के जन्म से जुड़े पहलू भी शामिल

गोरेयाकोठी थाना क्षेत्र में चार दिन की नवजात बच्ची की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है. मां ने पट्टीदारों पर धक्का देने का आरोप लगाया है, वहीं पुलिस इलाज में लापरवाही और बेटी के जन्म से जुड़े सामाजिक पहलुओं की भी जांच कर रही है.

सीवान: जिस घर में चार दिन पहले एक नन्हीं किलकारी गूंजी थी, वहां अब मातम पसरा हुआ है. गोरेयाकोठी थाना क्षेत्र के लधी सरारी गांव में महज चार दिन की नवजात बच्ची की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है.

मां की गोद सूनी हो गई है और पिता के आंगन की रौनक हमेशा के लिए चली गई. घटना के बाद पुलिस कई बिंदुओं पर जांच कर रही है.

मां ने पट्टीदारों पर लगाया धक्का देने का आरोप

मृत बच्ची सुभाष कुमार मांझी की पुत्री थी. बच्ची की मां ने गोरेयाकोठी थाने में दर्ज प्राथमिकी में आरोप लगाया है कि बुधवार की रात करीब 10 बजे पट्टीदारों के साथ हुए विवाद और धक्का-मुक्की के दौरान चार दिन की नवजात उसके हाथ से गिर गई.

मां ने इस घटना के लिए पट्टीदारों को जिम्मेदार ठहराते हुए कार्रवाई की मांग की है.

बेटी के जन्म से जुड़े पहलू की भी जांच

हालांकि पुलिस की जांच केवल लगाए गए आरोपों तक सीमित नहीं है. प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि परिवार में पहले से तीन बेटियां थीं और चौथी बेटी के जन्म के बाद परिवार के कुछ सदस्यों की प्रतिक्रिया को लेकर भी सवाल उठे हैं.

पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि कहीं बच्ची के जन्म को लेकर उपेक्षा या भेदभाव का कोई संबंध इस घटना से तो नहीं है.

इलाज में लापरवाही के एंगल पर भी जांच

जांच के दौरान यह जानकारी भी सामने आई है कि जन्म के बाद नवजात की तबीयत बिगड़ने पर स्थानीय चिकित्सक ने उसे तत्काल बाल रोग विशेषज्ञ को दिखाने की सलाह दी थी.

लेकिन परिजन बच्ची को अस्पताल ले जाने के बजाय वापस घर ले आए. पुलिस इस बिंदु की भी जांच कर रही है कि इलाज में किसी प्रकार की लापरवाही तो नहीं हुई.

तीन डॉक्टरों के मेडिकल बोर्ड ने किया पोस्टमार्टम

मामले की गंभीरता को देखते हुए सदर अस्पताल में तीन डॉक्टरों के मेडिकल बोर्ड ने नवजात का पोस्टमार्टम किया.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट को जांच का महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है. रिपोर्ट आने के बाद बच्ची की मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा.

सभी पहलुओं पर हो रही जांच

गोरेयाकोठी थानाध्यक्ष मनीष कुमार ने बताया कि पीड़ित मां के बयान पर पट्टीदारों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है.

उन्होंने कहा कि पारिवारिक विवाद, इलाज में कथित लापरवाही, बेटी के जन्म से जुड़े सामाजिक पहलुओं सहित सभी बिंदुओं की गंभीरता से जांच की जा रही है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

घटना ने समाज के सामने खड़े किए सवाल

यह घटना केवल एक आपराधिक मामले की जांच नहीं है, बल्कि समाज के सामने कई गंभीर सवाल भी खड़े करती है.

क्या आज भी बेटियों के जन्म को सहजता से स्वीकार नहीं किया जा रहा? क्या समय पर इलाज मिलने से मासूम की जान बच सकती थी? इन सवालों के जवाब पुलिस जांच पूरी होने के बाद सामने आएंगे.

चार दिन की उस बच्ची की खामोश विदाई ने पूरे समाज को आत्ममंथन करने के लिए जरूर मजबूर कर दिया है.

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By अमरनाथ शर्मा

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