सीवान: हुसैनगंज प्रखंड स्थित सरकारी पशु चिकित्सालय में निशुल्क पशु उपचार की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं. खरसंडा पंचायत निवासी दुधनाथ राम ने आरोप लगाया है कि अस्पताल में बिना पैसे दिए उनके बकरे का इलाज नहीं किया गया. बाद में शुल्क देने के बाद ही बकरे का उपचार किया गया. हालांकि, प्रभारी पशु चिकित्सा पदाधिकारी दिनेश दिनकर ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि सरकारी स्तर पर पशुओं का इलाज निशुल्क किया जाता है.
बिना पैसे दिए इलाज नहीं करने का लगाया आरोप
दुधनाथ राम ने बताया कि उनकी पत्नी बकरे का इलाज कराने के लिए हुसैनगंज स्थित सरकारी पशु अस्पताल पहुंची थीं. आरोप है कि कथित रूप से पैसे नहीं देने के कारण उनके बकरे का इलाज नहीं किया गया. इसके बाद जब वह स्वयं अस्पताल पहुंचे और शुल्क दिया, तब बकरे का उपचार किया गया.
पशुपालक ने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल से डॉक्टर को घर बुलाकर गाय का इलाज कराने पर करीब एक हजार रुपये तक लिए जाते हैं. इस आरोप के बाद सरकारी पशु अस्पताल में पशुओं के निशुल्क उपचार और उपलब्ध सुविधाओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं.
प्रभारी पशु चिकित्सा पदाधिकारी ने आरोपों से किया इनकार
मामले में प्रभारी पशु चिकित्सा पदाधिकारी दिनेश दिनकर ने पशुपालक के आरोपों से इनकार किया. उन्होंने कहा कि अस्पताल में पशुओं के इलाज के लिए कोई निर्धारित शुल्क नहीं लिया जाता है. सरकारी स्तर पर पशुओं का उपचार पूरी तरह निशुल्क है.
उन्होंने बताया कि कई बार अस्पताल में कुछ आवश्यक दवाएं उपलब्ध नहीं रहती हैं. ऐसी स्थिति में पशुपालकों को बाहर से दवा खरीदनी पड़ सकती है. यदि बाहर से दवा उपलब्ध कराई जाती है, तो उसके लिए संबंधित व्यक्ति को भुगतान करना पड़ता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी अस्पताल में इलाज के नाम पर कोई शुल्क निर्धारित नहीं है.
दवाओं की उपलब्धता को लेकर भी उठे सवाल
पशुपालक के आरोप और विभागीय अधिकारी के स्पष्टीकरण के बाद सरकारी पशु अस्पताल में दवाओं की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. यदि अस्पताल में जरूरी दवाएं उपलब्ध नहीं हैं और पशुपालकों को बाहर से दवा खरीदनी पड़ती है, तो इसका अतिरिक्त आर्थिक बोझ उन्हें उठाना पड़ता है.
स्थानीय पशुपालकों के बीच भी यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है. पशुपालकों का कहना है कि सरकारी पशु चिकित्सालय में इलाज और दवाओं की व्यवस्था स्पष्ट एवं पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि किसी तरह की शिकायत या भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो.
जांच के बाद ही स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति
मामले में पशुपालक की ओर से लगाए गए आरोपों की पुष्टि अभी नहीं हुई है. वहीं, प्रभारी पशु चिकित्सा पदाधिकारी ने सरकारी स्तर पर उपचार निशुल्क होने की बात कही है. ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी. यदि शिकायत सही पाई जाती है, तो संबंधित विभाग को मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए.
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