सीवान: गुठनी में सरयू का जलस्तर खतरे के निशान से 43 सेंटीमीटर ऊपर, तटवर्ती इलाकों में बढ़ी चिंता

गुठनी में सरयू नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 43 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया है। निचले इलाकों में पानी घुसने से धान और अन्य फसलों को भारी नुकसान की आशंका है।

Siwan News : सरयू नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर से तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है. नदी का जलस्तर लगातार तीसरे दिन खतरे के निशान से ऊपर बना हुआ है. निचले इलाकों में बाढ़ का पानी प्रवेश करने लगा है, जिससे धान समेत अन्य खरीफ फसलों के प्रभावित होने की आशंका है. जलस्तर बढ़ने से गोगरा तटबंध पर भी दबाव बढ़ गया है.

खतरे के निशान से 43 सेंटीमीटर ऊपर पहुंचा पानी

जल संसाधन विभाग की ओर से शनिवार को जारी बुलेटिन के अनुसार, सरयू नदी का जलस्तर 61.25 मीटर दर्ज किया गया है. यह चेतावनी स्तर से 1.43 मीटर और खतरे के निशान से 0.43 मीटर ऊपर है. जेई शुभम सिंह ने बताया कि नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव होता रहता है. फिलहाल किसी बड़े खतरे की स्थिति नहीं है.

निचले इलाकों में घुसने लगा बाढ़ का पानी

तटवर्ती ग्रामीणों के अनुसार, पिछले तीन दिनों से नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है. निचले इलाकों में पानी प्रवेश करने लगा है. अत्यधिक बारिश और नदी का जलस्तर बढ़ने से कई जगह धान की फसल डूब गई है. वहीं मक्का, मूंगफली, बाजरा, अरहर और मूंग की फसलों को भी नुकसान होने की आशंका जतायी जा रही है.

गोगरा तटबंध पर विभाग ने बढ़ायी निगरानी

सरयू के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए जल संसाधन विभाग ने गोगरा तटबंध और सीमावर्ती इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है. विभागीय कर्मियों की ओर से तटबंध का लगातार दौरा और निरीक्षण किया जा रहा है. हालांकि, ग्रामीणों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि बाढ़ से पहले विभाग की ओर से पर्याप्त तैयारी और जांच नहीं की गयी. ग्रामीणों का कहना है कि जलस्तर बढ़ने के बाद ही निगरानी शुरू की जा रही है.

हर साल करीब 250 घरों पर मंडराता है बाढ़ का खतरा

सरयू नदी में हर साल आने वाली बाढ़ से तटवर्ती क्षेत्रों की खेती योग्य भूमि को काफी नुकसान होता है. सोहगरा, सोनहुला, श्रीकरपुर, गोहरुआ, गुठनी, योगियाडीह, तिरबलुआ, ग्यासपुर, बलुआ, पांडेयपार, मैरिटार, दरौली, नरौली, केवटलिया, डूमरहर, अमरपुर, गंगपुर और सिसवन के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी पहुंच जाता है.

ग्रामीणों के अनुसार, प्रत्येक वर्ष इन इलाकों में करीब 250 घरों पर बाढ़ का खतरा बना रहता है. नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ ही इन गांवों के लोगों की चिंता भी बढ़ने लगी है.

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By चंद्र प्रकाश दूबे

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