सीवान के सिसवन में बाढ़ के पानी में डूबा बरवा घाट प्राथमिक विद्यालय, नाव से निकाली गयी पंजी और घंटी

सिसवन प्रखंड के बरवा घाट प्राथमिक विद्यालय में बाढ़ का पानी घुस जाने से परिसर जलमग्न हो गया. स्कूल की जरूरी सामग्री, जैसे छात्र उपस्थिति पंजी और घंटी को बचाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ा. फिलहाल, बच्चों की पढ़ाई स्कूल के बगल के एक घर में जारी है, जबकि ग्रामीण प्रशासन से जलनिकासी और सुरक्षित व्यवस्था की मांग कर रहे हैं.

Barwa Ghat Primary School: सिसवन प्रखंड के रामगढ़ गांव स्थित बरवा घाट प्राथमिक विद्यालय में रविवार की रात बाढ़ का पानी घुस गया. देखते ही देखते विद्यालय परिसर और आसपास का इलाका जलमग्न हो गया. विद्यालय भवन तक पानी पहुंचने के बाद जरूरी सामान निकालने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ा. छात्र उपस्थिति पंजी और विद्यालय की घंटी को नाव के जरिए सुरक्षित स्थान पर निकाला गया, जबकि बेंच सहित अन्य सामान विद्यालय में ही रह गया.

विद्यालय पहुंचने के लिए लेना पड़ा नाव का सहारा

विद्यालय की प्रभारी प्रधानाध्यापिका सरोज तिवारी ने बताया कि रविवार की रात बाढ़ का पानी तेजी से विद्यालय परिसर में प्रवेश कर गया. सोमवार की सुबह जब विद्यालय की स्थिति देखने लोग पहुंचे, तो पूरा परिसर पानी में डूबा हुआ था. विद्यालय भवन तक पहुंचने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ा.

इसके बाद विद्यालय में रखी जरूरी सामग्री को सुरक्षित स्थान पर निकालने की कवायद शुरू हुई. इसी क्रम में छात्र उपस्थिति पंजी और विद्यालय की घंटी को नाव के माध्यम से बाहर निकाला गया. हालांकि, बेंच और विद्यालय के अन्य सामान को बाहर नहीं निकाला जा सका.

दूसरे के घर में चल रही बच्चों की पढ़ाई

विद्यालय भवन में पानी घुसने के कारण नियमित पठन-पाठन प्रभावित हो गया है. बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह बंद न हो, इसके लिए फिलहाल दूसरे के घर में वैकल्पिक व्यवस्था की गयी है. वर्तमान में विद्यालय के बगल में स्थित दिनेश साह के घर में बच्चों की पढ़ाई करायी जा रही है.

बाढ़ के बीच बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा दोनों को लेकर अभिभावकों की चिंता बढ़ गयी है. ग्रामीणों का कहना है कि पानी के बीच विद्यालय भवन तक बच्चों और शिक्षकों का पहुंचना सुरक्षित नहीं है.

जलनिकासी और सुरक्षित व्यवस्था की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन और शिक्षा विभाग से विद्यालय की स्थिति का जायजा लेने और जलनिकासी की व्यवस्था कराने की मांग की है. ग्रामीणों का कहना है कि जब तक विद्यालय परिसर पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो जाता, तब तक बच्चों के लिए वैकल्पिक पठन-पाठन की व्यवस्था जारी रहनी चाहिए.

फिलहाल विद्यालय भवन और परिसर में पानी कम होने का इंतजार किया जा रहा है. परिसर सुरक्षित होने के बाद ही नियमित रूप से विद्यालय में पठन-पाठन शुरू होने की उम्मीद है.

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By Abhay Kumar

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