Siwan News : रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर बढ़ती निर्भरता को कम कर खेती को टिकाऊ बनाने की दिशा में सीवान जिले में प्राकृतिक खेती अभियान को गति मिली है. कृषि विभाग ने जिले के सभी 14 प्रखंडों के 15 क्लस्टरों में प्राकृतिक खेती कार्यक्रम शुरू किया है. पहले चरण में 125 किसानों को इस योजना से जोड़ा गया है. विभाग का दावा है कि इस पहल से खेती की लागत कम होगी, मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी और किसानों की आय में भी वृद्धि होगी.
किसानों को दिया जा रहा तकनीकी प्रशिक्षण
कृषि समन्वयक मनोरंजन कुमार ने बताया कि प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को प्रशिक्षण के साथ तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया जा रहा है. उन्हें जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत, गोबर की खाद, वर्मी कंपोस्ट तथा अन्य प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग की जानकारी दी जा रही है. किसानों को खरीफ और रबी दोनों मौसम में प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. साथ ही सरकार की ओर से अनुदान का लाभ भी उपलब्ध कराया जा रहा है.
तटीय क्षेत्रों में भी लागू हुई योजना
प्राकृतिक खेती कार्यक्रम जिले के सरयू, दाहा और घाघरा नदी के तटीय क्षेत्रों सहित कई प्रखंडों में लागू किया गया है. इसके तहत किसान शकरकंद, भिंडी, कद्दू, देसी गेहूं, सरसों, मसूर, आलू, फूलगोभी और पत्तागोभी जैसी फसलों की प्राकृतिक तरीके से खेती कर रहे हैं.
किसानों ने बताए प्राकृतिक खेती के फायदे
किसानों का कहना है कि रासायनिक उर्वरकों की जगह गोबर की खाद और वर्मी कंपोस्ट के उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार हुआ है और खेती की लागत भी कम हुई है. भगवानपुर हाट के किसान नंद प्रसाद और बड़हरिया के किसान मुकेश कुमार ने बताया कि प्राकृतिक तरीके से उगाई गई भिंडी और कद्दू की फसल की गुणवत्ता बेहतर रही है. उन्होंने कहा कि अब आसपास के अन्य किसान भी इस मॉडल को अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं.
पर्यावरण संरक्षण के साथ बढ़ेगी किसानों की आय
जिला कृषि पदाधिकारी आलोक कुमार ने बताया कि प्राकृतिक खेती का उद्देश्य किसानों को कम लागत में सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन के लिए प्रेरित करना है. उन्होंने कहा कि लगातार रासायनिक खेती से मिट्टी की उर्वरा शक्ति प्रभावित हो रही है, जबकि प्राकृतिक खेती से भूमि की सेहत बेहतर होती है और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है.
अधिक किसानों को जोड़ने का लक्ष्य
कृषि विभाग का लक्ष्य आने वाले समय में जिले के अधिक से अधिक किसानों को प्राकृतिक खेती अभियान से जोड़ना है. विभाग का मानना है कि इससे सीवान में टिकाऊ, पर्यावरण अनुकूल और लाभकारी कृषि मॉडल विकसित होगा, जिसका सीधा लाभ किसानों की आय और कृषि उत्पादन पर पड़ेगा.
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