सीवान. सात साल पहले जिस भवन को परित्यक्त घोषित कर दिया गया है उसी परित्यक्त भवन में जिला यक्ष्मा केंद्र चल रहा है. तत्कालीन सिविल सर्जन ने जिला यक्ष्मा केंद्र के भवन को परित्यक्त घोषित होने के बाद उस स्थान पर जी प्लस थ्री भवन निर्माण के लिए स्वस्थ विभाग में प्रस्ताव भेजा था. जिला यक्ष्मा केंद्र के जर्जर भवन पर जब स्वास्थ्य विभाग की नजर नहीं पड़ी तो तत्कालीन जिला संचारी रोग पदाधिकारी डॉ अनिल कुमार सिंह ने लाखों रुपये खर्च कर जर्जर भवन को रहने लायक बनाया. जिला यक्ष्मा केंद्र के आधे से अधिक भवन में एसीएमओ कार्यालय, जिला कुष्ठ निवारण कार्यालय एवं डबल्यूएचओ कार्यालय का कब्जा है. इसके कारण जिला यक्ष्मा केंद्र के संचालन में काफी परेशानी होती है. जगह की कमी होने के कारण ओपीडी में दिखाने आने वाले मरीजों को सही तरीके से वेटिंग एरिया नहीं है.मरीजों के लिए पेयजल एवं पर्याप्त पंखे की भी व्यवस्था नहीं है. सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट निर्माण के लिए टूटेगा जिला यक्ष्मा केंद्र का भवन सिविल सर्जन डॉक्टर श्रीनिवास प्रसाद एवं जिला कार्यक्रम प्रबंधक विशाल कुमार सिंह ने सदर अस्पताल में निर्मित 150 बेड के मॉडल अस्पताल भवन के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट निर्माण के लिए जिला यक्ष्मा केंद्र के लगभग आधे हिस्से को तोड़ने का आदेश बहुत पहले दिया है. जिला यक्ष्मा केंद्र के भवन को तोड़ने के बीएमएसआईसीएल के परियोजना विभाग द्वारा चिह्नित किया जा चुका है. 100 केएलडी क्षमता वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट निर्माण के लिए 300 वर्ग मीटर भूमि की आवश्यकता है. क्या कहते हैं जिम्मेदार मुझे जानकारी नहीं है कि जिला यक्ष्मा केंद्र का भवन परित्यक्त घोषित है एवं सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट निर्माण के लिए भवन का कुछ हिस्सा टूटना है. इस संबंध में वरीय पदाधिकारियों से बात की जायेगी. डॉ अशोक कुमार, सीडीओ, जिला यक्ष्मा केंद्र, सीवान
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