बोलेरो से कुचलकर वृद्ध की गयी जान

थाना क्षेत्र के पचनेरुआ गांव में गुरुवार की देर रात अनियंत्रित बोलेरो ने वृद्ध को कुचल दिया. उसकी पहचान पचनेरुआ गांव निवासी जिंदा राम (60) वर्ष के रूप में हुई. ग्रामीणों का कहना था कि गुरुवार की रात करीब दस बजे वह अपने दुकान के बगल में बनी झोपड़ी में सो रहा था. तभी बोलेरो अचानक झोपड़ी में जा घुसी.

प्रतिनिधि. गुठनी. थाना क्षेत्र के पचनेरुआ गांव में गुरुवार की देर रात अनियंत्रित बोलेरो ने वृद्ध को कुचल दिया. उसकी पहचान पचनेरुआ गांव निवासी जिंदा राम (60) वर्ष के रूप में हुई. ग्रामीणों का कहना था कि गुरुवार की रात करीब दस बजे वह अपने दुकान के बगल में बनी झोपड़ी में सो रहा था. तभी बोलेरो अचानक झोपड़ी में जा घुसी. उसके चीखने चिल्लाने की आवाज सुनकर आसपास के लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी. ग्रामीणों द्वारा इसकी जानकारी उसके परिजनों को दिया गया. मौके पर पहुंचे परिजनों ने उसे गंभीर हालत में लेकर पीएचसी पहुंचे. जहां ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों ने उसे मेडिकल चेकअप के बाद गंभीर हालत में सदर अस्पताल रेफर कर दिया. परिजन उसे गंभीर हालत में लेकर गोरखपुर मेडिकल कॉलेज जा रहे थे. जहां उसने सलेमपुर के नजदीक रास्ते में दम तोड़ दिया. घटना के बाद परिजनों में हड़कंप मच गया. वहीं परिजनों द्वारा बिना पुलिस को सूचना दिए. और पोस्टमार्टम कराए ही शव का अंतिम संस्कार शुक्रवार की सुबह कर दिया गया. पुलिस निरीक्षक सह थानाध्यक्ष विकास कुमार सिंह ने बताया कि मौत की सूचना चौकीदार के द्वारा मिला है. लेकिन परिजनों द्वारा लिखित सूचना पुलिस को नहीं दी गई है. उनके आवेदन का पुलिस इन्तजार कर रही है. ग्रामीणों द्वारा इस घटना को लेकर पुलिस, स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी इसकी जानकारी दी गई. ग्रामीणों का कहना था कि परिजन पोस्टमार्टम और प्राथमिकी दर्ज कराने के पक्ष में नहीं थे. परिजनों की करुण विलाप से माहौल हुआ गमगीन वृद्ध के मौत के बाद परिजनो में हाहाकार मच गया. परिजनों के करुण विलाप से जहां पूरा माहौल गमगीन हो गया. वहीं मृतक की पत्नी गिरजा देवी और तीन पुत्र गुलाब चंद्र, हीरामन और नंद किशोर राम उसे याद करके बार-बार बेसुध हो जा रहे थे. जिन्हें संभालने के लिए आसपास के लोग लगे हुए थे. उसकी मौत की सूचना के बाद दर्जनों जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मौके पर पहुंचकर पीड़ित परिवार का ढांढस बढ़ाया. घटना के बाद पूरे गांव में मातमी सन्नाटा छाया हुआ था.

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Author: DEEPAK MISHRA

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