siwan news : सीवान. जिले में मत्स्य पालन को संगठित, आधुनिक और लाभकारी स्वरूप देने की दिशा में मत्स्य विभाग द्वारा एक अहम पहल की जा रही है. गोरेयाकोठी, बसंतपुर और भगवानपुर हाट प्रखंडों में फिश फार्म प्रोड्यूसर ग्रुप का गठन किया जायेगा. इसका उद्देश्य अधिक से अधिक किसानों और मत्स्य पालकों को संगठित कर उन्हें सरकारी योजनाओं, तकनीकी सहयोग, वित्तीय सहायता और बाजार से जोड़ना है, ताकि मत्स्य पालन किसानों की आय का सशक्त साधन बन सके. मत्स्य विभाग के निर्देश पर केंद्रीय टीम के माध्यम से कराये गये विस्तृत सर्वे में यह स्पष्ट हुआ है कि सामूहिक व्यवस्था अपनाने से मत्स्य उत्पादन, विपणन और किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है. सर्वे रिपोर्ट में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए आधारभूत संरचना को मजबूत करने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया है. सर्वे के अनुसार तालाबों में जल स्तर बनाये रखने के लिए 50 से 60 ट्यूबवेल पंप सेट की आवश्यकता बतायी गयी है. वहीं मछलियों को पर्याप्त ऑक्सीजन उपलब्ध कराने के लिए 50 रेडियेटर लगाने का प्रस्ताव रखा गया है. इससे मछलियों की बेहतर वृद्धि और मृत्यु दर में कमी आने की संभावना है. मत्स्य पालकों को बाजार तक सीधी पहुंच और विपणन व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए परिवहन संसाधनों की भी आवश्यकता चिह्नित की गयी है. इसके तहत 34 दोपहिया वाहन, 17 से 20 तीन पहिया वाहन तथा 10 चार पहिया वाहन की जरूरत बतायी गयी है, ताकि ताजी और गुणवत्तापूर्ण मछली समय पर बाजार तक पहुंचायी जा सके. मछली बीज उत्पादन को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 10 हेक्टेयर क्षेत्र में नर्सरी तालाब विकसित करने की योजना प्रस्तावित है. साथ ही भंडारण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 20 गोदामों के निर्माण की आवश्यकता दर्शाई गयी है. तालाबों तक निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कृषि फीडर से जुड़े बिजली ट्रांसफॉर्मर की आवश्यकता को भी सर्वे में रेखांकित किया गया है. सर्वे के दौरान यह भी सामने आया है कि जिले में मत्स्य पालन को दीर्घकालीन रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक कॉर्प हैचरी, एक माइनर कॉर्प हैचरी और एक कैट फिश हैचरी की स्थापना की जा सकती है. इसके साथ ही मछली आहार की जरूरतों को पूरा करने के लिए 10 टन क्षमता वाली पांच फीड मिल लगाने का प्रस्ताव है. गुणवत्तापूर्ण उत्पादन, जांच और भंडारण के लिए एक आधुनिक मत्स्य लैब तथा दो आइस प्लांट की आवश्यकता भी चिह्नित की गयी है. जिला मत्स्य पदाधिकारी चंदन कुमार ने बताया कि तीनों प्रखंडों में मत्स्य पालन की व्यापक संभावनाएं हैं. वर्तमान में 100 हेक्टेयर क्षेत्र में तालाब निर्माण के लिए आवेदन प्राप्त हुए हैं. सर्वे में बड़ी मात्रा में अविकसित चंवर भूमि भी चिह्नित की गयी है, जिसे मत्स्य पालन के लिए उपयोग में लाया जा सकता है. उन्होंने कहा कि फिश फार्म प्रोड्यूसर ग्रुप के गठन से किसानों को एकजुट कर तकनीकी, वित्तीय और विपणन सहायता दी जायेगी, जिससे जिले में मत्स्य पालन को नयी दिशा और गति मिलने की उम्मीद है.
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