सदर अस्पताल में ही शुरू कर दिया झाड़-फूंक, सांप काटने के बाद हाई-वोल्टेज ड्रामा

Sitamarhi News: सीतामढ़ी सदर अस्पताल में सर्पदंश की आशंका में भर्ती महिला के परिजनों ने अस्पताल परिसर में झाड़-फूंक शुरू करा दी. भीड़ बढ़ने पर होमगार्ड जवानों ने भगत को बाहर किया. डॉक्टरों ने अंधविश्वास छोड़ वैज्ञानिक इलाज अपनाने की अपील की है. पढ़ें पूरी खबर…

सीतामढ़ी से अमिताभ कुमार की रिपोर्ट

Sitamarhi News: सीतामढ़ी सदर अस्पताल में मंगलवार को उस समय अजीब स्थिति बन गई, जब इलाज के लिए लाई गई एक महिला के परिजनों ने अस्पताल परिसर में ही झाड़-फूंक शुरू करवा दी. देखते ही देखते लोगों की भीड़ जमा हो गई और अस्पताल में अफरा-तफरी का माहौल बन गया. हालात बिगड़ते देख वहां तैनात होमगार्ड के जवानों को हस्तक्षेप करना पड़ा और भगत को अस्पताल परिसर से बाहर करना पड़ा.

सर्पदंश की आशंका में अस्पताल लाई गई महिला

जानकारी के अनुसार बेलसंड थाना क्षेत्र के चंदौली गांव की रहने वाली वंदना कुमारी घर में थीं, तभी उन्हें किसी जहरीले जीव ने काट लिया. परिजनों ने बताया कि किसी ने सांप को देखा नहीं, लेकिन महिला की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी. इसके बाद परिजन उन्हें इलाज के लिए सीतामढ़ी सदर अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने तुरंत इलाज शुरू कर दिया.

अस्पताल परिसर में शुरू हो गया झाड़-फूंक

इलाज के दौरान परिजनों ने एक स्थानीय भगत को भी बुला लिया. भगत ने अस्पताल परिसर में ही तंत्र-मंत्र और झाड़-फूंक शुरू कर दी. यह नजारा देखने के लिए अस्पताल में मौजूद मरीजों और उनके परिजनों की भीड़ जुटने लगी. कुछ ही देर में परिसर में भारी भीड़ हो गई, जिससे अस्पताल की व्यवस्था प्रभावित होने लगी.

सुरक्षाकर्मियों ने संभाला मोर्चा

भीड़ बढ़ने और इलाज में बाधा की सूचना मिलते ही होमगार्ड के जवान मौके पर पहुंचे. जवानों ने पहले भगत को समझाकर झाड़-फूंक बंद करने को कहा, लेकिन वह नहीं माना. इसके बाद सुरक्षाकर्मियों ने सख्ती दिखाते हुए उसे अस्पताल परिसर से बाहर खदेड़ दिया. इस दौरान कुछ देर तक वहां हलचल बनी रही.

डॉक्टरों ने अंधविश्वास से बचने की अपील की

सदर अस्पताल के चिकित्सक डॉ. अमरनाथ यादव ने लोगों से अपील की कि सर्पदंश या किसी भी गंभीर बीमारी में झाड़-फूंक पर नहीं, बल्कि वैज्ञानिक इलाज पर भरोसा करें. उन्होंने कहा कि अस्पताल में सर्पदंश के इलाज की पूरी व्यवस्था उपलब्ध है और समय पर उपचार से मरीज की जान बचाई जा सकती है.

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लेखक के बारे में

Published by: Aniket Kumar

अनिकेत बीते 4 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. राजस्थान पत्रिका और न्यूजट्रैक जैसे मीडिया संस्थान के साथ काम करने का अनुभव. एंटरटेनमेंट, हाईपरलोकल और राजनीति की खबरों से अधिक जुड़ाव. वर्तमान में प्रभात खबर की डिजिटल टीम के साथ कार्यरत.

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