Sitamarhi Nagar Nigam: सीतामढ़ी शहर का दायरा बढ़ने के बाद इसे नगर परिषद से नगर निगम का दर्जा तो मिल गया, लेकिन प्रशासनिक ढांचे में अब तक कोई बड़ा सुधार नहीं हो सका है. करीब ढाई लाख की आबादी और 46 वार्डों वाले इस नगर निगम में अधिकारियों और कर्मचारियों की भारी कमी है. निगम का पूरा कामकाज सीमित संसाधनों के सहारे जैसे-तैसे संचालित हो रहा है, जिससे शहरी विकास की रफ्तार धीमी पड़ गई है.
सात स्थायी कर्मियों के भरोसे पूरा सिस्टम
प्रभारी प्रधान सहायक अरुण कुमार चौबे के अनुसार, वर्तमान में नगर निगम के पास केवल सात स्थायी कार्यालय कर्मचारी ही उपलब्ध हैं. स्थायी और अस्थायी (अनुबंध वाले) कर्मचारियों को मिला लिया जाए, तो कुल 35 कर्मी ही कार्यरत हैं. नगर परिषद के समय जब शहर में मात्र 28 वार्ड थे, तब स्थायी कर्मचारियों की संख्या 45 थी. आज वार्डों की संख्या बढ़कर 46 हो गई है, लेकिन कर्मचारियों की संख्या बढ़ने के बजाय घट गई है.
अधिकारियों की भी भारी कमी
मानव संसाधन की इस कमी का असर निगम के हर काम पर पड़ रहा है. वर्तमान में नगर निगम में सिर्फ एक नगर आयुक्त, एक उप नगर आयुक्त, एक सिटी मैनेजर, एक टाउन प्लानर और दो स्वच्छता पदाधिकारी ही कार्यरत हैं. शहर की बढ़ती आबादी और क्षेत्रफल को देखते हुए कम से कम दो उप नगर आयुक्त, तीन सिटी मैनेजर और अलग-अलग जोन के लिए अलग टाउन प्लानर व तकनीकी कर्मियों की तत्काल आवश्यकता है.
रिटायर्ड कर्मियों के अनुभव का लिया जा रहा सहारा
कर्मचारियों की इस भारी किल्लत से निपटने के लिए नगर निगम प्रशासन को सेवानिवृत्त हो चुके कर्मियों की शरण में जाना पड़ रहा है. पूर्व प्रधान सहायक और कनीय अभियंता (जेई) समेत कई रिटायर्ड कर्मियों के अनुभव का सहारा लेकर निगम के जरूरी कार्यों को पूरा कराया जा रहा है.
नागरिक सुविधाओं पर पड़ रहा सीधा असर
संसाधनों के अभाव के कारण शहर की सफाई, जलनिकासी, कर वसूली, निर्माण कार्यों की निगरानी और शहरी नियोजन से जुड़े कार्य प्रभावित हो रहे हैं. हालांकि, नगर निगम प्रशासन का दावा है कि उपलब्ध संसाधनों के बीच बेहतर कार्य करने का पूरा प्रयास किया जा रहा है. भविष्य में निगम को व्यवस्थित स्वरूप देने के लिए जोन स्तर पर अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति बेहद जरूरी होगी.
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