बिहार में बनेगी 188 KM लंबी रेल लाइन, 4 महीने में पूरा होगा फाइनल सर्वे, जानिए पूरा रूट प्लान

Bihar New Rail Line: सीतामढ़ी से सुरसंड, जयनगर होते हुए निर्मली तक प्रस्तावित 188 किमी रेललाइन परियोजना ने फिर रफ्तार पकड़ ली है. रेलवे ने फाइनल सर्वे की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिससे सीमावर्ती इलाकों को पहली बार रेल कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद जगी है.

Bihar New Rail Line: सीतामढ़ी से सुरसंड, जयनगर होते हुए निर्मली तक प्रस्तावित 188 किलोमीटर लंबी रेललाइन परियोजना एक बार फिर पटरी पर लौट आई है. रेलवे ने फाइनल एलाइनमेंट सर्वे के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिससे सीमावर्ती इलाकों के विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद है.

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत फाइनल सर्वे में करीब चार महीने का समय लगेगा. सर्वे के बाद आगे की प्रक्रिया को गति दी जाएगी, जिससे निर्माण कार्य का रास्ता साफ होगा.

इन इलाकों को पहली बार मिलेगी रेल सुविधा

इस रेललाइन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके पूरा होने पर सीतामढ़ी जिले के बथनाहा, सोनबरसा, परिहार, सुरसंड, भिट्ठामोड़ और चोरौत जैसे प्रखंड पहली बार सीधे रेल नेटवर्क से जुड़ जाएंगे. अभी तक इन इलाकों के लोगों को ट्रेन पकड़ने के लिए सीतामढ़ी, बाजपट्टी या पुपरी जाना पड़ता है.

लंबा और विस्तृत होगा रेल रूट

प्रस्तावित रेलखंड सीतामढ़ी जंक्शन से शुरू होकर अमघट्टा, भगवतीपुर, भैरोकोठी, बथनाहा, माधोपुर, दिग्घी, बेला, परसाकला, सोनबरसा, परिहार, सुरसंड, भिट्ठामोड़, चोरौत, जयनगर होते हुए निर्मली तक जाएगा. इस रूट में कई नए स्टेशनों का निर्माण भी प्रस्तावित है.

सरकार और रेलवे के बीच बढ़ी हलचल

पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य अभियंता (निर्माण) महबूब आलम ने राज्य के ऊर्जा, योजना एवं विकास मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव को पत्र लिखकर परियोजना की वर्तमान स्थिति की जानकारी दी है. पत्र में बताया गया है कि सर्वे से जुड़ी निविदा प्रक्रिया शुरू हो चुकी है.

2008 में मिली थी मंजूरी, 2019 में रुकी थी परियोजना

इस रेल परियोजना को वर्ष 2008-09 में मंजूरी मिली थी, लेकिन विभिन्न कारणों से 2019 में इसे रोक दिया गया था. लंबे इंतजार के बाद 29 सितंबर 2025 को रेलवे बोर्ड ने इसे फिर से शुरू करने की अनुमति दी, जिसके बाद अब सर्वे का काम आगे बढ़ाया जा रहा है.

सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास को मिलेगा बढ़ावा

इस रेललाइन के शुरू होने से न सिर्फ स्थानीय लोगों को बेहतर यातायात सुविधा मिलेगी, बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों के आर्थिक और सामाजिक विकास को भी गति मिलेगी. किसानों को अपनी उपज बड़े बाजारों तक पहुंचाने में आसानी होगी, वहीं व्यापारियों और छोटे उद्योगों को भी मजबूती मिलेगी.

नेपाल बॉर्डर के लोगों को भी होगा फायदा

यह रेललाइन नेपाल सीमा से सटे इलाकों को जोड़ने वाली है, जिससे दोनों देशों के लोगों को भी आवाजाही में सुविधा होगी. साथ ही धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को भी नया बढ़ावा मिलने की संभावना है.

यात्रियों के लिए सस्ती और तेज यात्रा

नई रेललाइन के बनने से छात्रों, नौकरीपेशा लोगों और आम यात्रियों को कम समय में सुरक्षित और सस्ती यात्रा का विकल्प मिलेगा. कुल मिलाकर यह परियोजना मिथिला और सीमांचल क्षेत्र के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है.

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Published by: Abhinandan Pandey

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