सीतामढ़ी : कानून का राज स्थापित करने में अहम भूमिका निभाने वाले सुरक्षाकर्मियों में एक होमगार्ड जवान तीन दशक में छह बार भी रेफ्रेसर का कोर्स नही करने के बाद भी घातक हथियार राइफल लेकर घूम रहे है. जिसका दु:ष्परिणाम भी सामने आ रहा है. साल में एक बार रेफ्रेसर का कोर्स नही करने के कारण पिछले साढ़े तीन साल के अंदर होमगार्ड जवान के मिस फायर से दो निर्दोष लोगों की जान जा चुकी है. जानकारों का कहना है कि अगर होमगार्ड जवानों को चुस्त-दुरुस्त व पूर्ण प्रशिक्षित नहीं रहने के कारण किसी बड़ी घटना से इनकार नहीं किया जा सकता.
मिस फायर से साढ़े तीन साल में दो लोगों की मौत
सीतामढ़ी : कानून का राज स्थापित करने में अहम भूमिका निभाने वाले सुरक्षाकर्मियों में एक होमगार्ड जवान तीन दशक में छह बार भी रेफ्रेसर का कोर्स नही करने के बाद भी घातक हथियार राइफल लेकर घूम रहे है. जिसका दु:ष्परिणाम भी सामने आ रहा है. साल में एक बार रेफ्रेसर का कोर्स नही करने के […]

कुपोषण के कारण दुर्बल शरीर: आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण अधिकांश होमगार्ड जवानों का शरीर देखने मात्र से ही दुर्बल नजर आता है. वर्ष 2018 में ऑनलाइन ड्यूटी की सुविधा उपलब्ध होने से पहले जवानों को वर्ष में सौ दिन ड्यूटी मिलना भी सुनिश्चित नहीं था. ऐसे में आर्थिक तंगी के कारण कुपोषण का शिकार होना लाजिमी है. ऐसे में रेफ्रेसर कोर्स व नियमित ड्यूटी के अभाव को लेकर होमगार्ड जवानों को अनट्रेंड तक कहा जाने लगा है. दो-दो निर्दोष लोगों की मौत ने तो उनके ट्रेनिंग को पूरी तरह सवालों के कटघरा में खड़ा कर दिया है.
–चुनाव में राइफल बन जाता है बोझ
बताया गया कि जिले में तकरीबन 1800 होमगार्ड जवान है. जिसमें अधिकांश जवानों की बहाली 1989 में होने के कारण अब तक 48 की उम्र पार कर चुके है. उम्र, कुपोषण व रेफ्रेसर कोर्स के अभाव में जवानों के लिए राइफल एक बोझ सी बन जाती है. लड़खड़ाते कदमों से किसी तरह वह प्रतिनियुक्त स्थल पर तो पहुंच जाते है, लेकिन ड्यूटी के दौरान उनके चेहरे पर उत्साह व शरीर में ताकत की कमी स्पष्ट देखने को मिलती है. लंबे समय तक खेती-गृहस्थी में लगे रहने के बाद माह में पांच-दस दिन की ड्यूटी करने वाले जवान लोकसभा व विधानसभा के चुनाव में राइफल लेकर ड्यूटी करने पहुंचे जाते है.
उदाहरण के तौर पर चालू लोकसभा चुनाव में डुमरा प्रखंड अंतर्गत शिव मोहम्मदपुर निवासी होमगार्ड जवान परमेश्वर सिंह को लोकसभा चुनाव में ड्यूटी मिली थी. दो चरण के चुनाव में भाग लेने के बाद बीमार होकर बेड पकड़ लिये. बताया गया कि वर्ष 2018 में उन्हें 90 दिन से भी कम ड्यूटी मिली थी. इसी प्रकार ड्यूटी नहीं मिलने पर आर्थिक रूप से कमजोर लखन सिंह व रामलखन सिंह समेत कई होमगार्ड जवान कमाने के लिए दिल्ली, मुंबई व पंजाब जा चुके है.