सीतामढ़ी/पुपरी : मुस्लिम धर्मावलंबियों का पाक रमजान का महीना मंगलवार से शुरू हो गया. सोमवार को चांद दिखने के बाद मुस्लिम समुदाय के लोगों ने मंगलवार की अहले सुबह सेहरी लेने के बाद पाक महीने का पहला रोजा रखा. रमजान का पाक महीना आते ही मुस्लिम धर्मावलंबियों के बीच खुशियों का माहौल बन गया है.
माना जाता है कि रमजान के महीने में अल्लाह के रसूल के फरमान के मुताबिक हर फर्ज इबादतों का शबाब 70 गुना अधिक बढ़ा दिया जाता है. जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं तथा जहन्नुम के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं. जिन्न व शैतानों को बंद कर खैरो बरकत दरवाजा खोल दिये जाते हैं. इसी कारण इस महीने को पाक ए बरकत का महीना भी कहा जाता है. रमजान पाक महीना इस्लामी कैलेंडर के अनुसार नौवां महीना होता है.
उलेमा कहते हैं कि रमजान के पूरे माह में दिन में रोजा रखकर रात-दिन इबादत करने से बहुत शबाब मिलता है. दिल के अंदर बैठी गंदगी साफ होती है. सर्वप्रथम 610 ईस्वी में रमजान का रोजा मुस्लमानों पर फर्ज हुआ था. रमजान का महीना आते ही बानी ए इस्लाम मोहम्मद साहब मक्का की प्रसिद्ध पहाड़ गाड़े हेरा के एक खोह में जाकर दिनभर भूखे-प्यासे रोजा रखकर अल्लाह की इबादत किया करते थे.
इनकी इबादत अल्लाह को इतनी पसंद आई कि तब से सारे मुस्लमानों पर माह रमजान का रोजा फर्ज करा दिया गया. इसी महीने की 27वीं तारीख की रात यानी सबे कद्र की रात को मुस्लिम धर्म की पुस्तक कुरान शरीफ धरती पर उतारी गई. इसी रात में सैयदना हजरते आदम के जन्म संबंधी बुनियाद भी रखी गयी थी. आज सेहरी खाने के बाद सुबह नमाजे फर्ज शुरू होते ही संध्याकालीन सूर्यास्त तक खाने पीने, बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू, धूम्रपान आदि सेवन करने के साथ ही बुरे कामों से परहेज करना शुरू कर दिया है.
