अल्प्राजोलम का इस्तेमाल, ताड़ी के रूप में लोग पी रहे मीठा जहर

सीतामढ़ी : बिहार में शराब बंदी के बाद नशे की लत के शिकार लोगों के बीच ताड़ी के रूप में मीठा जहर बेचा जा रहा है. शराब बंदी के बाद ग्राहकों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि होते देख दुकानदार कम लागत में अधिक मुनाफा कमाने के लिए जुगाड़ टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहे है. हालांकि […]

सीतामढ़ी : बिहार में शराब बंदी के बाद नशे की लत के शिकार लोगों के बीच ताड़ी के रूप में मीठा जहर बेचा जा रहा है. शराब बंदी के बाद ग्राहकों की संख्या में अप्रत्याशित वृद्धि होते देख दुकानदार कम लागत में अधिक मुनाफा कमाने के लिए जुगाड़ टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहे है. हालांकि बाजार में विषैले ताड़ी बिकने की जानकारी से अवगत जिला पुलिस लगातार छापेमारी कर कानूनी शिकंजा कस रही है, लेकिन काला कारोबार को बंद करने में पुलिस को पूरी तरह सफलता नहीं मिल रही है.

10 दिन में 10 हजार लीटर ताड़ी नष्ट
सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि सदर डीएसपी डॉ कुमार वीर धीरेंद्र के नेतृत्व में महज एक से 10 अप्रैल तक नगर सर्कल क्षेत्र के चकमहिला, मेला रोड, मिरचाईपट्टी, भवदेपुर, पासवान चौक, मुरलियाचक, गौशाला चौक, पुनौरा, सीमरा व मुरादपुर समेत विभिन्न स्थानों के ताड़ी दुकान पर छापेमारी कर 10 हजार लीटर केमिकल युक्त ताड़ी को नष्ट किया गया.ध्यान देने वाली बात यह भी है कि उक्त स्थलों में कई शिक्षण संस्थान भी है.
जिम्मेदारी का नहीं कर रहे निर्वाह
जानकार लोग इसके लिए औषधि विभाग को जिम्मेदार मान रहे है. शराब बंदी के बाद नशीली दवा व सूई बिक्री पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिया था, लेकिन समय के साथ सरकार का यह निर्देश ठंडे बस्ते में चला गया.
खानापूर्ति के नाम पर कभी-कभी छापेमारी किया जाता है. जिसका नतीजा है कि दवा दुकानों से नशीली दवाएं खरीद कर जहरीला ताड़ी का निर्माण भी शुरू हो चुका है. पुलिस के साथ दिक्कत यह है कि ताड़ी बिक्री पर प्रतिबंध नहीं रहने के कारण बहुत चीजों को ध्यान में रख कर कार्रवाई करनी होती है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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