राकेश नेपाल से अपने संगठित गिरोह का कर रहा संचालन
शाम ढलने के बाद कड़ी सुरक्षा के बीच व्यवसायी कर रहे अपना कारोबार
लंबे समय से शहर के व्यवसायी झेल रहे रंगदारी की पीड़ा
सीतामढ़ी : शहर के व्यवसायियों पर एक बार फिर रंगदारी का संकट गहराने लगा है. रंगदारी नहीं देने पर व्यवसायियों को जान मारने की धमकी दी जा रही है. 1998 में शातिर अपराधी नवाब टाइगर द्वारा दहशत फैला कर रंगदारी मांगने का ट्रेंड दो दशक बाद भी जारी है.
वर्तमान में व्यवसायियों पर संगठित गिरोह का संचालन कर रहे मोस्टवांटेड राकेश यादव व शार्प शूटर सोनू रॉक का आतंक सिर चढ़ कर बोल रहा है. ताबड़तोड़ फायरिंग की घटनाओं को अंजाम देने के बाद राकेश गिरोह के शार्प शूटर सोनू रॉक पर पुलिस के हिट लिस्ट में सबसे ऊपर है. दिलचस्प यह भी है कि चार साल से रंगदारी मांगने को लेकर अपनी सक्रियता का एहसास दिला रहे राकेश यादव की परछाई छूने में भी पुलिस को सफलता नहीं मिली है.
पुलिस का तर्क है कि नेपाल में बैठ कर अपराध का संचालन करने के कारण लाख प्रयास के बाद भी राकेश की गिरफ्तारी नहीं हो पा रही है. पुलिस सूत्रों पर भरोसा करें तो हाल में दवा विक्रेता संघ के अध्यक्ष मनोज कुमार सिंह, मेला रोड निवासी डाॅ संजय कुमार, थाना रोड स्थित बिजली दुकानदार समेत दर्जनों व्यवसायी से रंगदारी की मांग की गयी है.
तीन दर्जन से अधिक व्यवसायियों से मांगी रंगदारी: प्रभात पड़ताल में यह सामने आया है कि 1 मई को नाथ व गुनगुन मेडिकल पर फायरिंग व 25 जून को वाटिका रेडिमेड के संचालक राजेश कुमार सुंदरका उर्फ पप्पू के पुत्र सौरभ कुमार को गोली मारने की घटना के बाद अब तक शहर के चर्चित तकरीबन तीन दर्जन से अधिक व्यवसायियों से राकेश ने रंगदारी मांगी है. वाटिका की घटना का हवाला देते हुए राकेश रंगदारी नहीं देने पर व्यवसायियों को सीधे गोली मारने की धमकी दे रहा है.
अंडरवर्ल्ड से कनेक्शन करनेवाले कर रहे सेटलमेंट: लंबे समय से रंगदारी की घटना की पीड़ा झेल रहे व्यवसायियों के सर पर राकेश का आतंक सर चढ़ कर बोल रहा है. कारण है कि चोरी-छुपे शिकायत कर पुलिस से मदद की गुहार लगा रहे है. सूत्रों पर भरोसा करें तो दवा विक्रेता संघ के अध्यक्ष यतींद्र खेतान की हत्या समेत अन्य घटनाओं को ध्यान में रखते हुए कुछ व्यवसायी अंडरवर्ल्ड से कनेक्शन रखने वालों से कुछ ले-देकर मामला सेटलमेंट भी कर रहे है.
व्यवसायियों के खून से रक्तरंजित हो रहा शहर: व्यवसायियों की शिकायत का असर भी शहर में दिख रहा है. शाम ढ़लने के बाद शहर के सभी प्रमुख स्थानों पर पुलिस ही पुलिस नजर आ रहे है. ऐसा लगता है जैसे संगीनों के साये में व्यवसायी अपना व्यापार कर रहे है. सीधे तौर पर कहा जाये तो पूर्व की घटनाओं को छोड़ भी दे तो वर्ष 31 दिसंबर 2015 को दवा विक्रेता संघ के अध्यक्ष यतींद्र खेतान के बाद शहरी क्षेत्र में भवदेपुर चौक पर छात्र नेता किशोरी राम, अस्पताल रोड निवासी प्रो अनिता जायसवाल, डाॅ शत्रुघ्न प्रसाद व उनकी पत्नी मांडवी, डुमरा रोड स्थित साई ऑटोमोबाइल के संचालक धर्मेंद्र कुमार, मोबाइल दुकानदार मुनींद्र पाठक, शांतिनगर में किराना व्यवसायी, मेन रोड में कुमार बुक डिपो के संचालक किशोरी प्रसाद व स्वतंत्रत पत्रकार अजय विद्रोही की सरेशाम गोली मार कर हत्याओं की घटनाओं ने व्यवसायियों को अंदर से पूरी तरह हिला कर रख दिया है. व्यवसायियों पर रंगदारी का संकट मंडराने के बाद उनके परिवार वाले परिजन के घर लौटने तक उनके सलामती की दुआ मांगते हुए बेचैन रहते है.
राकेश की परछाई तक छूने में पुलिस को नहीं मिल रही सफलता
कौन है राकेश राय
2015 में चर्चित चिकित्सक डाॅ पीपी लोहिया के नर्सिंग होम पर राकेश ने फायरिंग कर सुर्खियां बटोरना शुरू किया था. श्री लोहिया के यहां फायरिंग करने के बाद राकेश ने रंगदारी के लिए रिंग बांध स्थित डाॅ आरके प्रकाश व भवदेपुर चौक स्थित एक मार्बल दुकान पर फायरिंग की थी. राकेश के आपराधिक घटनाओं की लंबी फेहरिस्त है.
घटना को अंजाम देकर हो जाता है भूमिगत : आपराधिक घटनाओं को अंजाम देकर भूमिगत हो जाना राकेश राय की खासियत रही है. यही कारण है कि लंबे समय से आपराधिक घटनाओं को अंजाम देकर भी वह पुलिस के चंगुल में नहीं आया है. यह भी नहीं कि राकेश की गिरफ्तारी का प्रयास जिला पुलिस ने नहीं की. सच्चाई यह है कि राकेश की गिरफ्तारी के लिए स्पेशल पुलिस टीम का गठन किया गया. जिसने पड़ोसी देश नेपाल तक में राकेश की गिरफ्तारी का प्रयास किया था, लेकिन वह पुलिस के हाथ नहीं लगा.
दोहरी नागरिकता का शातिर ले रहा लाभ
राकेश की गिरफ्तारी नहीं होने के पीछे उसकी दोहरी नागरिकता है. प्रभात पड़ताल में यह सामने आया है कि राकेश के पास भारत के अलावा पड़ोसी देश नेपाल की नागरिकता भी है. इस कारण घटनाओं को अंजाम देकर वह आराम से नेपाल में समय गुजार लेता है. नेपाल में भी आपराधिक घटनाओं को राकेश अंजाम देता रहा है. जिस कारण मई 2017 में वह नेपाल पुलिस के हत्थे चढ़ गया था. यह जानकारी मिलने के बाद सीतामढ़ी पुलिस ने उसे यहां लाने का प्रयास किया था, लेकिन नेपाल की नागरिकता रहने के कारण राकेश को नेपाल के जेल में भेजा गया. इधर, पांच माह पूर्व वह नेपाल जेल से जमानत पर बाहर निकला है.
टीम का हुआ है गठन
राकेश की गिरफ्तारी के लिए दो टीम का गठन किया गया है. एक टीम का नेतृत्व वे खुद कर रहे है. दूसरे टीम का नेतृत्व सर्कल इंस्पेक्टर मुकेश चंद्र कुंवर कर रहे है. दोनों टीम टेक्निकल सर्विलांस के अलावा विभिन्न बिंदुओं पर जांच-पड़ताल कर राकेश का सुराग तलाश रही है. रंगदारी मांगने के लिए नेपाली व इंडियन दोनों नंबर का इस्तेमाल किया जा रहा है.
विकास वर्मन, एसपी
