शेखपुरा जिले में पहाड़ों से पत्थर खनन और उससे जुड़े कारोबार के लंबे समय से बंद रहने का असर अब केवल पत्थर उद्योग तक ही सीमित नहीं रह गया है. इसका सीधा और प्रतिकूल प्रभाव परिवहन व्यवसाय, टोल प्लाजा और इस सेक्टर से जुड़े हजारों लोगों की आजीविका पर पड़ रहा है.
बरबीघा-सरमेरा मुख्य सड़क मार्ग पर शेखपुरा जिले की सीमा के समीप स्थित टोल प्लाजा पिछले कई महीनों से भारी आर्थिक नुकसान का सामना कर रहा है.
टोल प्लाजा को प्रतिदिन हो रहा है लाखों का नुकसान
टोल प्लाजा के मैनेजर हंसराज यादव ने बताया कि पहाड़ बंद होने के बाद पत्थर लदे ट्रकों का आवागमन लगभग पूरी तरह ठप हो गया है.
इसके कारण टोल प्लाजा से गुजरने वाले भारी वाहनों की संख्या में भारी गिरावट आई है. स्थिति यह है कि टोल प्लाजा को प्रतिदिन एनएचएआई (NHAI) को दिए जाने वाले निर्धारित शुल्क के बराबर राशि भी टोल टैक्स के रूप में वसूलना मुश्किल हो रहा है.
मैनेजर के अनुसार, कंपनी को अब प्रतिदिन हजारों नहीं बल्कि लाखों रुपये यानी करीब एक लाख रुपये तक का प्रतिदिन नुकसान झेलना पड़ रहा है. ट्रकों की आवाजाही में कमी के कारण लगातार राजस्व प्रभावित हो रहा है, जिससे आने वाले दिनों को लेकर चिंता और बढ़ गई है.
किस्त चुकाना और वाहन चलाना हुआ मुश्किल
पहाड़ बंद रहने का सबसे गंभीर असर उन ट्रक मालिकों पर पड़ रहा है, जिनका कारोबार मुख्य रूप से पत्थर ढुलाई पर निर्भर था.
ट्रक मालिक रंजीत कुमार, गुरु चरण कुमार एवं अन्य ने बताया कि उन्होंने बैंक या फाइनेंस कंपनियों से ऋण (लोन) लेकर किस्त पर ट्रक खरीदे थे. पत्थर कारोबार बंद होने के कारण ट्रकों का परिचालन लगभग रुक गया है, जबकि बैंक की मासिक किस्त, बीमा (इश्योरेंस), टैक्स और वाहन के रखरखाव का खर्च लगातार जारी है.
ट्रक मालिकों का कहना है कि जिले में पत्थर ढुलाई के अलावा भारी वाहनों के लिए पर्याप्त वैकल्पिक कारोबार उपलब्ध नहीं है. ऐसे में अधिकांश ट्रक घरों या निर्धारित स्थानों पर खड़े हैं. लंबे समय से वाहन नहीं चलने के कारण आमदनी पूरी तरह शून्य हो गई है और किस्त की राशि जुटाना असंभव सा हो गया है.
उन्होंने चिंता जताई है कि यदि जल्द ही पहाड़ों की लीज प्रक्रिया पूरी नहीं की गई और पत्थर उद्योग दोबारा शुरू नहीं हुआ, तो बड़ी संख्या में ट्रक मालिक गंभीर वित्तीय संकट में फंस जाएंगे.
हजारों मजदूरों और श्रमिकों के समक्ष रोजी-रोटी का संकट
पत्थर उद्योग के ठप होने का दायरा केवल टोल प्लाजा और ट्रक मालिकों तक ही सीमित नहीं है. पहाड़ों में काम करने वाले मजदूरों, क्रशर इकाइयों से जुड़े श्रमिकों, चालकों, खलासियों, मैकेनिकों, छोटे दुकानदारों और अन्य सहायक कारोबारियों पर भी इसका व्यापक असर पड़ा है. प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हजारों लोगों के सामने आज रोजगार का बड़ा संकट खड़ा हो गया है.
पहाड़ों पर काम करने वाले मजदूरों का कहना है कि काम बंद होने के कारण उनकी नियमित आय का जरिया पूरी तरह समाप्त हो गया है. कई परिवारों के सामने घर का राशन जुटाना और बच्चों की पढ़ाई समेत रोजमर्रा के खर्च चलाना बेहद कठिन हो गया है. जानकारों के अनुसार, शेखपुरा में पत्थर उद्योग एक वृहद आर्थिक तंत्र के रूप में कार्य करता है, जिसमें खनन, ढुलाई, क्रशर, परिवहन और मजदूरी आपस में जुड़े हैं.
अगस्त-सितंबर में पहाड़ों के खुलने की जगी उम्मीद
उधर, विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आने वाले दिनों में शेखपुरा के पहाड़ों से जुड़ी प्रशासनिक प्रक्रिया में तेजी आने की संभावना है. सूत्रों का दावा है कि अगस्त या सितंबर माह तक पहाड़ों के लीज होने की उम्मीद जताई जा रही है. हालांकि, इस संबंध में अंतिम निर्णय और आधिकारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी.
स्थानीय ट्रक मालिकों, मजदूरों और व्यापारियों को पूरी उम्मीद है कि जल्द ही पत्थर कारोबार फिर से पटरी पर लौटेगा, जिससे खनन और परिवहन व्यवसाय को राहत मिलने के साथ-साथ टोल प्लाजा का राजस्व सुधरेगा और हजारों बेरोजगारों को उनका रोजगार वापस मिल सकेगा.
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