शेखपुरा जिला न्यायालय में दलित उत्पीड़न निषेध अधिनियम के विशेष न्यायाधीश नीरज किशोर ने दलित व्यक्तियों पर जानलेवा हमला करने के मामले में 9 लोगों को दोषी करार देते हुए 5-5 साल की कैद और 5-5 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई, जबकि एक दोषी विनोद बिंद को 7 साल की सजा सुनाई गई.
मामले की पृष्ठभूमि और 14 जुलाई 2017 की घटना
इस संबंध में जानकारी देते हुए दलित उत्पीड़न निषेध अधिनियम के विशेष लोक अभियोजक चंद्रमौली यादव ने बताया कि 14 जुलाई 2017 को गांव के शिवकुमार चौधरी के सरकारी चापाकल पर स्नान करने पर विनोद बिंद ने उसे दलित कहते हुए गाली-गलौज और मारपीट शुरू कर दी, और बचाने आए परिजनों पर भी घातक हथियारों से हमला कर दिया गया.
घायलों का अस्पताल में इलाज और पुलिस कार्रवाई
हमले में गंभीर रूप से घायल लोगों को अन्य ग्रामीणों के पहुंचने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां पुलिस ने घायलों के बयान के आधार पर थाने में प्राथमिकी दर्ज करते हुए अनुसंधान कार्य प्रारंभ किया था.
न्यायालय द्वारा दोषियों को सजा और धाराओं का विवरण
न्यायालय ने विनोद बिंद को भारतीय दंड विधान की धारा 307 के साथ-साथ दलित उत्पीड़न अधिनियम के विभिन्न धाराओं के तहत दोषी पाते हुए सजा सुनाई, जबकि अन्य आठ को भारतीय दंड विधान की धारा 147, 148, 323, 504 आदि के साथ दलित उत्पीड़न के आरोप में दोषी पाया.
मंडल कारा भेजे गए दोषी और आगे की कानूनी प्रक्रिया
सजा सुनाए जाने के बाद इन सभी को कड़ी सुरक्षा में मंडल कारा भेज दिया गया, जहां सजा प्राप्त व्यक्तियों के अधिवक्ताओं ने उन्हें ढांढस बंधाते हुए इस निर्णय को पटना उच्च न्यायालय में चुनौती देने की जानकारी दी.
