आरोप. लोगों को लंबी कतारों से नहीं मिल रही निजात
शेखपुरा : जिले में करेंसी का अभाव इस कदर लोगों को परेशान कर रहा है की जरूरतें पूरी करना भी एक बड़ी चुनौती बन गयी है. बैंकों के साथ-साथ अब ऑल टाइम मनी के नाम से अपनी पहचान रखने वाले एटीएम भी इन दिनों करेंसी के अभाव में ठप रहने लगे है. इस व्यवस्था का खामियाजा भुगत रहे लोग अपनी नगदी की जरूरतों को पूरा करने के लिए या तो शहर के विभिन्न स्थानों पर चालू एटीएम की तालाश में भटक रहे हैं.
वहीं दूसरी ओर अगर राशि की संभावना हो तो वहां रुपए निकालने वाले एटीएम धारकों की लंबी कतार देखने को मिल रहा है. ऐसी स्थिति में अब सवाल यह है कि इस जिले के 35 एटीम से जुड़े लगभग डेढ़ लाख एटीएम कार्ड धारकों को अपने ही खाते में रखे जमा राशि पाने के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.
जिले में बैंक और एटीएम की क्या है स्थिति :
जिले में बैंकिंग सेवाओं को लेकर मौजूद आंकड़ों पर अगर नजर डालें तो यहां 17 विभिन्न प्रकार के बैंक हैं जिनके 56 शाखाएं एवं 13 ग्राहक सेवा केंद्र काम कर रहा है. बैंकिंग सेवाओं के क्षेत्र में ऑल टाइम मनी का नारा देने वाले जिले में 35 एटीम कार्यरत हैं. जिले में बैंक खाता धारियों की संख्या 5 लाख 76हजार है. जबकि लगभग दो लाख एटीएम धारक अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए दौड़ लगा रहे हैं. दि शेखपुरा के उषा पब्लिक स्कूल के डायरेक्टर राहुल कुमार ने कहा कि केंद्र सरकार ने जिस प्रकार डिजिटल इंडिया का नारा देते हुए कैशलेस की व्यवस्था को बढ़ावा दिया है. इससे देश की आर्थिक व्यवस्था मजबूत होगी.
उन्होंने यह भी कहा कि इस कैशलेस व्यवस्था में बड़ी रकम का ट्रांजैक्शन करने वालों को डिजिटल व्यवस्था के दायरे में लाना चाहिए. बैंकों में बड़ी रकम का कैश भुगतान के बजाय छोटे-छोटे जरूरतमंदों को नगदी मुहैया कराने की दिशा में बढ़ावा देनी चाहिए. ताकि निचले स्तर पर टेक्नोलॉजी की कमी के कारण डिजिटल ट्रांजैक्शन में होने वाली परेशानियां झेलने के बजाए लोगों को आसानी से बैंकों के जरिए छोटी रकम की नगदी उपलब्ध हो सके. उन्होंने कहा कि जहां तक ए टीम सुविधा का सवाल है. उसे निर्वाध तरीके से बहाल रखनी चाहिए. ताकि लोगों को अपने ही कमाई के पैसे की निकासी के लिए चिलचिलाती धूप में लंबी कतार का सामना नहीं करना पड़ सके.शहर के सतबिगही मोहल्ले के कोचिंग संचालक ललित विजय कुमार ने बताया कि जिले में एटीएम की सुविधा चरमरा जाने के कारण पैसे की आपात जरूरत को पूरा करने में लोग अक्षम हो रहे हैं. उन्होंने बताया कि एक सप्ताह पूर्व एक रिश्तेदार की अचानक तबियत बिगड़ जाने के बाद वह एटीएम के जरिए खाते से पैसे की निकासी करने में घंटो प्रयत्न करने के बाद भी असफल रहे.
आखिरकार उन्हें कई रिश्तेदार और सहयोगी से मदद लेकर इलाज के लिए जरूरतों को पूरा किया जा सका. कैशलेस की व्यवस्था में जिस प्रकार बैंकों के अंदर बड़े जरूरतमंदों को सरलता के साथ नगदी मुहैया कराया जा रहा है और छोटे जरूरतमंदों को एटीम और ग्राहक सेवा केंद्र का रास्ता दिखाया जा रहा है यह पूरी तरह बैंक प्रबंधनों का तुगलकी फरमान है.उन्होंने कहा कि बैंकों के द्वारा अगर एक बड़े जरूरतमंद को डिजिटल ट्रांजैक्शन के लिए प्रेरित कर दिया गया तब उसके एवज में कम से कम 10 छोटे जरूरतमंद को नगदी का लाभ मिल सकता है.
क्या कहते हैं अधिकारी :
जिले में खाताधारकों को डिजिटल ट्रांजैक्शन के लिए लगातार प्रेरित किया जा रहा है. इसके साथ ही यहां बैंक खाता को लिंक कराने की दिशा में लगातार चल रही पहलकदमी के बावजूद भी अब तक मात्र 53 प्रतिशत ही आधार कार्ड से खातों को लिंक किया जा सका है. ऐसी परिस्थिति में डिजिटल ट्रांजैक्शन की दिशा में की जा रही पहल कदमी में अवरोध उत्पन्न हो रहा है. उन्होंने कहा कि जिले के सभी एटीएम में राशि की उपलब्ध्ता को लेकर पहल कदमी की जा रही है.
केदार नाथ, एलडीएम शेखपुरा.
