शार्टकट पर पीछे से आयी मौत

दुखद. रविवार की देर शाम किऊल-गया रेलखंड पर हुआ हादसा शेखपुरा : बीते रविवार की देर शाम किउल-गया रेलखंड स्थित सिरारी रेलवे स्टेशन पर पुल पार कर रहे यात्रियों की मालगाड़ी की चपेट में आने से आठ लोगों की मौत हो गयी. इस घटना में रेल यात्रियों से बड़ी चूक हुई है. महज 35 कदम […]

दुखद. रविवार की देर शाम किऊल-गया रेलखंड पर हुआ हादसा

शेखपुरा : बीते रविवार की देर शाम किउल-गया रेलखंड स्थित सिरारी रेलवे स्टेशन पर पुल पार कर रहे यात्रियों की मालगाड़ी की चपेट में आने से आठ लोगों की मौत हो गयी. इस घटना में रेल यात्रियों से बड़ी चूक हुई है. महज 35 कदम फासले वाले रेल पुल ने कई जिंदगियों को तबाह दिया. दरअसल हादसे के वक्त जब यात्री सिरारी रेलवे स्टेशन पर उतर कर अपने गांव जाना चाह रहे थे. उस वक्त तेज आंधी और बारिश आ रही थी. ऐसी स्थिति में लोग जल्दी से जल्दी अपने घर जाना चाह रहे थे.
इसी क्रम में लोगों ने मेन रोड को छोड़कर रेलवे पटरी से होते हुए किउल-गया रेलखंड के पुल संख्या 31 के रास्ते गांव जाने का फैसला लिया. तभी शेखपुरा की ओर से जा रही मालगाड़ी के थ्रू परिचालन के कारण लोग अचानक पुल में फंस गये और जान बचाने का कोई विकल्प ही नहीं था. हालांकि कुछ लोगों ने पुल से छलांग लगा दी, जिससे वह बच गये.
इस हादसे में गंभीर रूप से जख्मी 12 वर्षीय झुना कुमारी को पटना रेफर किया जाने के पश्चात पटना ले जाने के क्रम में ही देर रात्रि उसने दम तोड़ दिया. इस घटना में सिरारी के पास ही पड़ने वाले परंतु लखीसराय जिला में आने वाले भंवरिया गांव निवासी मीना देवी, मंगल यादव उनका भतीजा पुरुषोत्तम कुमार एवं भभु आशा देवी, शिशमा गांव निवासी 50 वर्षीय सरोजनी देवी, मसौढा गांव निवासी सुरेश यादव समेत अन्य की मौत हो गयी.
उम्मीद नहीं थी कि तुरंत पहुंच जायेगी कोई दूसरी ट्रेन: सिरारी रेलवे स्टेशन के समीप हुए हादसे के शिकार लोगों को यह कतई उम्मीद नहीं थी कि तुरंत कोई दूसरी ट्रेन वहां आ जायेगी. दरअसल 30 अप्रैल की संध्या लखीसराय से पहुंची पैसेंजर ट्रेन सिरारी के प्लेटफाॅर्म नंबर दो पर लगी थी. इसी ट्रेन से लोग उतरे थे. लोगों ने यह समझा कि एक नंबर पर जब कोई ट्रेन आयेगी तो वह वहां कुछ समय तक तो जरूर रुकेगी. सामान्य दिनों की भांति यह लोग रेलवे पटरी पर से होते हुए अपने गांव की तरफ चल दिये.
इसी क्रम में मालगाड़ी सिरारी पहुंची परंतु मालगाड़ी का वहां स्टॉपेज न होने के कारण वह अपनी रफ्तार से सिरारी स्टेशन पर बढ़ गयी. अभी ग्रामीण उस संकीर्ण पुल पर लगभग आधी दूर ही गये थे कि माल गाड़ी वहां पहुंच गयी और आंधी तूफान के कारण उन्हें यह एहसास नहीं हो सका की कोई ट्रेन उनके पीछे है. साथ ही लोगों की मानें तो इस दौरान ट्रेन ने हॉर्न भी नहीं बजाया था. जैसे ही लोगों को पीछे से नजदीक आ चुकी ट्रेन का पता चला तब तक उन्हें संभलने का वक्त नहीं मिला और पटरी से बाहर निकलने का मतलब था कि पुल के नीचे कूदना. ऐसे में लोगों को यह समझ ही नहीं आया ट्रेन उन्हें रौंदते हुए पार हो गयी.
चार दिनों में ही खुशियां गम में हुई तब्दील: लक्खीसराय जिले के मसौढा गांव निवासी मृतक सुरेश यादव के पुत्र का विवाह 28 अप्रैल को हुआ था. मृतक का अपने पुत्र के साथ शादी में आये कुटुम की विदाई के लिए कपड़ा खरीदने बाजार अाये थे. तभी मृतक ने स्टेशन पर उतर कर पटरी से होकर घर जाना मुनासिब समझा.
लेकिन उसका पुत्र सिरारी चौक घूम कर वापस लौटने की बात कह कर वह अपने पिता के साथ जाने से इनकार कर दिया. घटना में सुरेंद्र यादव हादसे का शिकार हो गये जबकि पुत्र बच गया. चार दिन पूर्व हुई शादी की खुशियां गम में तब्दील हो गयी. इस घटना को लेकर दामाद गुड्डू ने बताया कि 28 अप्रैल को मृतक के पुत्र जितेंद्र की शादी जमुई के पारोमतिया गांव में शादी हुई और तीन दिन बाद यह घटना घटी.
खुद मालगाड़ी के चालक ने दी थी घटना की जानकारी: सिरारी रेल हादसे की घटना खुद मालगाड़ी के चालक ने दी थी. घटना को लेकर सिरारी स्टेशन प्रबंधक अनिल कुमार ने बताया कि घटना की खबर उन्हें दानापुर रेल कंट्रोल रूम से मिली थी. यह सूचना सर्वप्रथम रेल चालक ने कंट्रोल रूम को दिया थी. उन्होंने बताया कि जिस पूल पर घटना घटी है वो आम रास्ता नहीं था. लेकिन शॉर्टकट के चक्कर में यह हादसा हुआ है. इसमें रेल विभाग से मुआवजा का लाभ नहीं दिये जाने की तत्काल जानकारी मिली है.

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