कंपनी को राशि लौटाने के न्यायिक फैसले से खनन विभाग में खलबली
शेखपुरा : करीब 2 साल पूर्व पहाड़ी भूखंडों की नीलामी की नयी व्यवस्था में जब बंदोबस्ती की कार्रवाई शुरू हुई तब नीलामी लेने वाले लोगों का अभाव विभाग के समक्ष एक बड़ी चुनौती बन कर सामने आया. इसी दरम्यान जिले के बाजितपुर स्थित टावर के समीप ब्लॉक संख्या 9 की बंदोबस्ती के लिए निकाले गये विज्ञापन में कोलकाता के सत्यम इंफ्रा नामक कंपनी ने आवेदन डाला. इस ब्लॉक के लिए कोलकाता की यह कंपनी नीलामी के दौरान अकेला विडर के रूप में सामने आयी.
इस ब्लॉक की नीलामी राशि को विभाग के द्वारा लगभग 14.5 करोड़ निर्धारित की गयी थी. इसी दरम्यान विभाग ने इस अकेले डाक वक्ता को पहाड़ी की बंदोबस्ती दे दी. इसके साथ ही इस कंपनी ने खनन विभाग के द्वारा निर्धारित नीलामी राशि का दस फीसदी यानी 1.40 करोड़ रुपये विभाग को सौंप दिया. लेकिन जब कंपनी ने इस नीलामी को एक घाटे का सौदा समझकर बंदोबस्ती वापस लेने के लिए विभाग को आवेदन पत्र सौंपा. इसके वाद विभाग ने आनन-फानन में सुरक्षित कंपनी के सुरक्षित जमा राशि को जप्त करने की कार्यवाही की. खनन विभाग के अधिकारियों पर मनमानी का आरोप लगाते हुए उक्त कंपनी ने उच्च न्यायालय में एक मुकदमा दायर कर सुरक्षित जमा राशि लौटाने की अपील की. करीब 2 साल बाद उच्च न्यायालय ने जब अपना फैसला सुनाया तब विभाग में खलबली मच गयी. उच्च न्यायालय ने कोलकाता के इस कंपनी की जमा 1.4 करोड़ की सुरक्षित जमा राशि लौटाने के लिए विभाग को निर्देशित कर अपना फैसला सुनाया.
न्यायालय के इस फैसले के बाद विभाग में खलबली मच गई है. इसकी पुष्टि करते हुए खनिज विकास पदाधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि कोलकाता के कंपनी के द्वारा विभाग को जमा कराए गए सुरक्षित जमा राशि 1.4करोड़ रुपया लौटाने का फैसला उच्च न्यायालय के द्वारा दिया गया है. उक्त फैसले के आलोक में विभाग अपना एल.पी.ये.दाखिल करेगा जिले में सभी 30 पहाड़ी भूखंडों की नीलामी होनी थी. जिसमें अब तक 13 भूखंडों की नीलामी प्रक्रिया पूरी की जा सकी है. इसके बाद बचे शेष दो भूखंडो की नीलामी के लिए निर्धारित दर में संशोधन की प्रक्रिया जारी है.
