कोरमा थाने में सौंपा हत्या की आशंका का आवेदन

शेखपुरा : कोरमा थाना क्षेत्र के डीह कोसुम्भा गांव में लगभग बीस लाख की जमीन लिखवा कर एक भूस्वामी को अगवा कर हत्या करने का मामला सामने आया है. इस मामले में पीड़ित परिजनों ने बाढ़ स्थित अपने वर्तमान आवास पर श्राद्ध कर्म शुरू कर दिया है. इसके साथ ही पीडि़त पुत्र ब्रजेश गिरी ने […]

शेखपुरा : कोरमा थाना क्षेत्र के डीह कोसुम्भा गांव में लगभग बीस लाख की जमीन लिखवा कर एक भूस्वामी को अगवा कर हत्या करने का मामला सामने आया है. इस मामले में पीड़ित परिजनों ने बाढ़ स्थित अपने वर्तमान आवास पर श्राद्ध कर्म शुरू कर दिया है. इसके साथ ही पीडि़त पुत्र ब्रजेश गिरी ने बताया कि कोरमा थाना के डीह कोसुम्भा गांव में पुस्तैनी जमीन है. उनका परिवार पिछले 40 सालों से पटना जिले के बाढ़ में निवास कर रहे हैं.

उनके पिता बच्चन गिरी की पिछले कुछ सालों से दिमागी हालत ठीक नहीं थी. इसी का लाभ लेकर गांव के कुछ दबंगों ने लगभग बीस लाख की लागत वाले बेशकीमती जमीन की रजिस्ट्री करवा ली. इसके बाद से आज तक पिता का कोई सुराग नहीं मिल सका. काफी खोजबीन के दौरान डीह कोसुक्भा गांव के लोगों ने उनकी हत्या होने की बात बतायी. यह घटना करीब एक सप्ताह पूर्व की है. जब जमीन लिखवाने के बाद उन्हें गायब कर दिया गया था. यह घटना करीब एक सप्ताह पूर्व की है

जब जमीन लिखवाने के बाद उन्हें गायब कर दिया गया था. इस घटना की सूचना के बाद पीडि़त परिजनों ने एक तरफ जहां कठपुतली रख कर श्राद्ध कर्म शुरू कर दिया है वहीं दूसरी ओर पीडि़त पुत्र जब दबंगों से जमीन लिखवाने के संबंध में पूछने गये तब पहले तो दिन भर बरगला कर रखा, इसके बाद गांव से वापस भाग जाने की चेतावनी दी. इस घटना के बाद पीडि़त पुत्र ने कोरमा थाना में लिखित आवेदन सौंप कर आरोपियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने को कहा. इधर थाने में तैनात सअनि सियाराम प्रसाद ने बताया कि माले की जांच की जायेगी.

एफआइआर के लिए स्थानीय होने का मांगा प्रमाण :
कानून व्यवस्था के लिए सरकार भले ही पुलिस की सजगता के दावे कर रही हो, लेकिन कोरमा पुलिस हत्या जैसे मामलों में संवेदनहीनता के सारे हदों को पार कर रही है. 40 सालों से बाढ़ में निकवास कर रहे ब्रजेश गिरि अपने पिता के हत्या होने की संभावना को लेकर जब थाना पहुंचे तब वहां पीड़ित का स्थानीय नहीं होने का पुलिस ने सवाल खड़े किये. थाने में तैनात सअनि सियाराम प्रसाद ने पीडि़त से स्थानीय होने का प्रमाण दिखाने को कहा. इस मौके पर उक्त अधिकारी ने बताया कि आवेदक स्थानीय निवासी है अथवा नहीं. इसकी जानकारी नहीं मिल सकी है. इस घटना में स्थिति संदेहास्पद बताया जा रहा है. इधर पीड़ित ने स्थानीय पुलिस की भूमिका से हताश होकर जिलाधिकारी एवं अन्य अधिकारियों को लिखित आवेदन सौंप कर न्याय की गुहार लगायी है.

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