स्कूल छोड़ चुकी बच्चियों का होगा दोबारा नामांकन, शिवहर में शुरू हुआ शिक्षा अभियान

शिवहर में बेटियों की शिक्षा को बढ़ावा देने और स्कूल छोड़ चुकी बच्चियों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए 'शिक्षा चौपाल' का आयोजन हो रहा है. यह अभियान 13 जिलों में 'शिक्षाग्रह अभियान' के तहत चलाया जा रहा है.

Sheohar News: जिले में बेटियों की शिक्षा को बढ़ावा देने और स्कूल छोड़ चुकी बच्चियों को दोबारा मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से सृष्टि महिला समाख्या की ओर से शिक्षा चौपाल का आयोजन किया जा रहा है. इस अभियान में पंचायत प्रतिनिधि, शिक्षा विभाग के अधिकारी, आशा कार्यकर्ता, विकास मित्र, आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका, जीविका दीदी, विद्यालय शिक्षा समिति के सदस्य, अभिभावक और बड़ी संख्या में ग्रामीण भाग ले रहे हैं. कार्यक्रम के माध्यम से लोगों से अपील की जा रही है कि कोई भी बेटी शिक्षा से वंचित न रहे और हर बच्ची की पढ़ाई सुनिश्चित की जाए.

13 जिलों में चल रहा है 'शिक्षाग्रह अभियान'

सृष्टि महिला समाख्या की प्रतिनिधि राज कुमारी देवी ने बताया कि 'शिक्षाग्रह अभियान' के तहत बिहार के 13 जिलों में शिक्षा चौपाल आयोजित की जा रही है. अभियान का उद्देश्य समुदाय को बालिकाओं की शिक्षा के प्रति जागरूक करना, स्कूल छोड़ चुकी बच्चियों का पुनः नामांकन कराना और बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति पर रोक लगाना है.

बाल विवाह रोकने का दिया गया संदेश

शिक्षा चौपाल में उपस्थित लोगों को बताया गया कि बाल विवाह से बच्चियों का भविष्य प्रभावित होता है. इसलिए अभिभावकों से अपील की गई कि वे बेटियों की पढ़ाई को प्राथमिकता दें और कम उम्र में उनकी शादी न करें. वक्ताओं ने कहा कि शिक्षित बेटियां न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे समाज के विकास में अहम भूमिका निभाती हैं.

ग्रामीणों ने लिया जागरूकता फैलाने का संकल्प

कार्यक्रम में शामिल पंचायत प्रतिनिधियों, अभिभावकों और ग्रामीणों ने अपने-अपने गांव में शिक्षा के प्रति जनजागरूकता अभियान चलाने का संकल्प लिया. उन्होंने स्कूल से बाहर रह रही बच्चियों को दोबारा विद्यालय भेजने और प्रत्येक बेटी की शिक्षा सुनिश्चित करने का भरोसा दिलाया.

बेटियों की शिक्षा को मिलेगा नया बल

आयोजकों का कहना है कि शिक्षा चौपाल के माध्यम से समुदाय की सक्रिय भागीदारी बढ़ रही है और बालिकाओं की शिक्षा के प्रति सकारात्मक माहौल तैयार हो रहा है. अभियान का लक्ष्य शिक्षा को जनआंदोलन का रूप देना है, ताकि हर बच्चा, विशेषकर हर बेटी, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जुड़ सके.

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