शिवहर : सरकार व सरकारी मुलाजिम स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार का दावा भले ही करें. किंतु इसमें सुधार की बात धरातल पर कही से भी नहीं दिखती है. सदर अस्पताल में मरीज आज भी दवा के अभाव से जूझ रहे हैं.
जीवन रक्षक दवा समेत कई अन्य जरूरी दवाओं के लिए मरीजों को बाहरी दुकानों का चक्कर लगाना पड़ रहा है. कारण कि सदर अस्पताल में उनके जरूरत की दवा उपलब्ध नहीं है. दिन में मरीज दवा बाहर नगर स्थित दुकानों से दवा प्राप्त कर लेते हैं.
किंतु 10 बजे रात के बाद अगर दवा की जरूरत हुई तो उन्हें अस्पताल के बाहर खुले दुकान से कुछ दवा भले ही प्राप्त हो जाती है. किंतु कई बार अस्पताल के आस पास के दुकान में दवा नहीं मिलने की स्थिति में उन्हें मात्र ईश्वर का सहारे रहना पड़ता है.
इस बात पूछे जाने पर डीएस डॉ मेंहदी हसन ने स्वीकार किया कि कई जरूरत की दवा सदर अस्पताल में उपलब्ध नहीं है. जबकि सिविल सर्जन बिसंभर ठाकुर ने कहा कि जो दवा विभाग द्वारा उपलब्ध कराया जाता है. उसे सदर अस्पताल में उपलब्ध करा दिया जाता है.
परिजनों के सामने हैं कई समस्याएं: दवा के अभाव को लेकर भले ही जिला स्वास्थ्य समिति के लोग अपना दोनों हाथ खड़े कर दे रहे हो. किंतु दवा के अभाव में आम मरीज को हो रही परेशानी उनके कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता नजर आता है. इसी सदर अस्पताल में करीब दो वर्ष पूर्व तक करीब चार लाख से अधिक की दवा एक्सपायर हो गयी. किंतु आज दवा के अभाव में मरीज जीवन मृत्यु से संघर्ष करने को मजबूर नजर आ रहे हैं. इधर अस्पताल में कार्यरत कर्मी उषा देवी बताती है कि दवा नहीं है तो मरीज को कहां से दवा उपलब्ध कराये. जबकि गीता देवी ने कहा कि स्लाइन के अलावे कोई दवा फिलहाल उपलब्ध नहीं है. जबकि प्रसव वेदना से जूझ रही गीता देवी के पति रत्नेश साह ने कहा कि इस अस्पताल में दवा का अभाव तो है ही. कोई सकारात्मक सहयोग करने को तैयार नहीं दिख रहा है. ऐसे में वे पत्नी को बाहर चिकित्सक को दिखाने के लिए लाचार हैं.
