शिवहर : स्थानीय कमलापूरी धर्मशाला के पास गुरु रविदास जी महाराज के 640वां जयंती समारोह का आयोजन किया गया. जिसमें मौजूद लोगों ने संत रविदास के चित्र पर मल्यार्पण किया. कार्यक्रम का शुभारंभ अंबेदकर विचार मंत्र के संयोजक नथुनी चौधरी मूर्तिकार व अन्य गण्य माण्य लोगों द्वारा किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता सीताराम निराला ने की. जबकि संचालन हीरा राम ने किया. मौके पर वक्ताओं ने कहा वे एक समाज सुधारक, भक्ति कवि,विचारक थे. जिन्होंने 15वीं से 16वीं सदी के दौरान समाज पर अपनी अमिट छाप छोड़ी. वे ज्ञान व विद्या को जीवन में सर्वोपरि मानते थे.
उनके दोहा की चर्चा करते हुये वक्ताओं ने कहा विद्या धन कुल अर्जित कीजिए, अर्जित कीजिये सदा ज्ञान. कहे रविदास बिना विद्या के नरको ज्ञान अंजान. उनकी चाहत एक ऐसे राज की थी. जहां कोई छोटा बड़ा भेद नहीं हो, सबको एक सा सम्मान मिले. उसी राज में खुशहाली रहती है. रविदास ने सामाजिक चेतना पैदा करने में अपनी अहम भूमिका निभायी. वे जाति पाति में इसकी चर्चा करते हुये मूर्तिकार ने रविदास के इन पक्तियों को उल्लेख किया.
जिसमें कहा गया है कि ऊंच न कोई जाति ऊंच न कोई काम. नीच ताहि को जानिये निच करे सो काम. इस दौरान वक्ताओं ने उनके जीवन चरित्र, भक्ति आंदोलन के दौरान उनकी भूमिका को रेखांकित करते हुये कहा कि गुरु रविदास के दोहे उनके संदेश व आदर्श आज भी प्रासांगिक है. मौके पर रामलाल राम, जगन्नाथ राम, किशोरी राम, संतोष कुमार, प्रभू राम, रामदेनी राम, रामसेवक राम, सहोदर देवी, जेलस देवी समेत कई मौजूद थे.
