Sasaram News : फरक्का जल संधि को लेकर करगहर के जदयू विधायक बशिष्ठ सिंह ने गंभीर सवाल उठाते हुए इसके नवीनीकरण से पहले बिहार पर पड़ने वाले प्रभावों की समीक्षा की मांग की है. रविवार को सासाराम स्थित अपने आवास पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में विधायक ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था बिहार के हित में नहीं है. संधि के नवीनीकरण से पहले बिहार के जल संसाधन, किसानों और सिंचाई पर पड़ने वाले प्रभावों का गंभीरता से आकलन किया जाना चाहिए.
गंगा का जल प्रवाह कम होने का विधायक ने उठाया मुद्दा
विधायक बशिष्ठ सिंह ने कहा कि गंगा के बिहार में प्रवेश करने के बाद नदी का फैलाव और जल प्रवाह कम हो जाता है. इसके बावजूद समझौते के तहत बांग्लादेश को पानी दिया जाना है. उनका कहना है कि इसका असर बिहार की जल व्यवस्था पर पड़ता है. उन्होंने गंगा के साथ सोन, गंडक, बागमती और कोसी जैसी नदियों का भी उल्लेख किया.
‘पानी बिहार का, फिर बाढ़ और सूखे की मार क्यों?’
बशिष्ठ सिंह ने फरक्का बांध के निर्माण के बाद गंगा में गाद जमने की समस्या बढ़ने का दावा किया. उन्होंने कहा कि इसका असर बिहार में बाढ़ की स्थिति पर पड़ रहा है. वहीं दूसरी ओर कई इलाकों में पानी की कमी और सूखे जैसी स्थिति भी सामने आती है. उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, “पानी बिहार का, नदियां बिहार की, फिर बिहार को बाढ़ और सूखे की मार क्यों?”
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बिहार में पर्याप्त जल उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग
विधायक ने कहा कि जिस राज्य से होकर गंगा गुजरती है, उसी राज्य में पर्याप्त जल उपलब्धता सुनिश्चित नहीं होना गंभीर चिंता का विषय है. किसानों और सिंचाई व्यवस्था को पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने के लिए जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की जरूरत है.
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संधि के नवीनीकरण से पहले बिहार के हितों पर हो फैसला
बशिष्ठ सिंह ने कहा कि फरक्का जल संधि 30 वर्षों के लिए थी और इसकी अवधि समाप्त होने के समय बिहार के हितों को केंद्र में रखकर निर्णय लिया जाना चाहिए. उन्होंने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस मुद्दे को लगातार उठाते रहे हैं. जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद संजय झा ने भी राज्यसभा में इस विषय को प्रमुखता से रखा है.
मौजूदा व्यवस्था के पुनर्मूल्यांकन की मांग
विधायक ने कहा कि उनकी पार्टी की मांग है कि मौजूदा व्यवस्था का पुनर्मूल्यांकन किया जाए और संधि का नवीनीकरण नहीं किया जाए. उन्होंने किसानों, सिंचाई और जल संसाधनों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की जरूरत बतायी.
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