Rohtas News : सोन नदी के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में हो रही अत्यधिक बारिश के कारण इंद्रपुरी बराज में पानी की भारी आवक बनी हुई है. बुधवार को बराज के सभी 69 गेट खुले रहे और बराज से 5,10,276 क्यूसेक पानी छोड़ा गया. इससे सोन नदी के किनारे बसे गांवों और शहरों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है. हालांकि, पिछले दिनों की तुलना में सोन नदी का जलस्तर फिलहाल बढ़ने के बजाय घटने की स्थिति में है. बावजूद इसके ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में दोबारा अत्यधिक बारिश होने या बाणसागर और रिहंद जलाशयों से अधिक पानी छोड़े जाने पर स्थिति गंभीर हो सकती है.
प्रशासन अलर्ट, डीएम ने इंद्रपुरी बराज का किया निरीक्षण
बाढ़ की आशंका को देखते हुए प्रशासन अलर्ट मोड में है. मंगलवार को जिलाधिकारी ने अधिकारियों के साथ इंद्रपुरी बराज का निरीक्षण किया और सोन नदी में पानी की स्थिति की जानकारी ली. उन्होंने संबंधित अधिकारियों को जलस्तर, पानी के बहाव और तटवर्ती इलाकों की स्थिति पर लगातार नजर रखने का निर्देश दिया. संभावित बाढ़ की स्थिति से निबटने के लिए प्रशासनिक स्तर पर आवश्यक तैयारियां भी की जा रही हैं.
एनिकट में निर्माणाधीन पेयजलापूर्ति का बियर पानी में डूबा
सोन नदी के एनिकट में डेहरी, सासाराम और औरंगाबाद शहरों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए निर्माणाधीन बियर पूरी तरह पानी में डूब गया है. सोन नदी के निचले हिस्से में अधिक मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण निर्माण स्थल पर जलस्तर बढ़ गया है. स्थिति को देखते हुए निर्माण कंपनी ने अपनी मशीनों को सोन नदी के तट पर एसपी कोठी के समीप सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया है.
कंपनी के कर्मियों के अनुसार, सोन नदी का जलस्तर कम होने के बाद ही निर्माण कार्य दोबारा शुरू किया जायेगा. उल्लेखनीय है कि इस महत्वाकांक्षी पेयजलापूर्ति योजना का शिलान्यास दो सितंबर 2024 को एनिकट में बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया था. कार्यक्रम में तत्कालीन उपमुख्यमंत्री और वर्तमान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी मौजूद थे.
मां लखपति पार्क में घुसा सोन का पानी, नौका विहार पर रोक
सोन नदी के निचले हिस्से में भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने का असर एनिकट स्थित मां लखपति पार्क पर भी पड़ा है. सोन का पानी पार्क में प्रवेश कर गया है. नदी का जलस्तर बढ़ने से सोन किनारे बने सीढ़ी घाट पूरी तरह पानी में डूब गये हैं. घाट पर लगी हाईमास्ट लाइट का निचला हिस्सा भी पानी में समा गया है.
जलस्तर बढ़ने के बाद सुरक्षा के मद्देनजर घाट से नौका विहार पर पूरी तरह रोक लगा दी गयी है. इससे पार्क में आने वाले लोगों और नौका विहार करने वाले लोगों को परेशानी हो रही है. प्रतिदिन मॉर्निंग वॉक के लिए पार्क आने वाले सुनील कुमार, राजू कश्यप, विनय सिंह, सत्येंद्र कश्यप, मुन्नालाल कसेरा, विजय कश्यप, रमेश कश्यप समेत अन्य लोगों ने बताया कि यदि सोन नदी में पानी की आवक और बढ़ती है तथा जलस्तर में इसी तरह वृद्धि जारी रहती है, तो मां लखपति पार्क का बड़ा हिस्सा पानी में डूब सकता है. ऐसी स्थिति में पूरा पार्क जलमग्न होने का खतरा है.
सोन नदी के बढ़े जलस्तर को देखते हुए पार्क प्रबंधन और प्रशासन ने लोगों से नदी के किनारे नहीं जाने तथा नौका विहार से दूर रहने की अपील की है.
इंद्रपुरी बराज में 5.10 लाख क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज
इंद्रपुरी सोन बराज में बुधवार सुबह 10 बजे तक सभी 69 गेट खुले रहे. बराज के ऊपरी और निचले हिस्से में पानी का डिस्चार्ज 5,10,276 क्यूसेक दर्ज किया गया. बराज का डिजाइन पॉन्ड लेवल 355.00 फीट है, जबकि ऊपरी जलस्तर 352.50 फीट और निचला जलस्तर 347.70 फीट दर्ज किया गया. पानी के बहाव का ट्रेंड गिरावट की ओर रहा. डब्ल्यूएलसी, डब्ल्यूपीएलसी और ईएलसी में डिस्चार्ज शून्य क्यूसेक दर्ज किया गया. विभाग की ओर से बराज और सोन नदी के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है.
भीम बराज में भी बनी बाढ़ की स्थिति
मोहम्मदगंज स्थित भीम बराज में बुधवार को बाढ़ की स्थिति बनी रही. हालांकि, बराज प्रबंधन के अनुसार स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है. सुबह 10 बजे बराज के ऊपरी और निचले हिस्से में नदी का बहाव 1,45,775 क्यूसेक दर्ज किया गया. आरएमसी में डिस्चार्ज शून्य क्यूसेक रहा.
आरडी 64.197 यानी 19.580 किलोमीटर, आरडी 95.410 यानी 29.100 किलोमीटर और आरडी 103 यानी 31.402 किलोमीटर बिहार सीमा तक पानी का प्रवाह फ्री फ्लो में रहा. झारखंड की कुल जल मांग 500 क्यूसेक दर्ज की गयी. नदी के बहाव का ट्रेंड स्थिर रहा.
रिहंद जलाशय में क्षमता से अधिक पानी, पांच गेट खोले गये
रिहंद जलाशय में बुधवार सुबह 8 बजे जलस्तर 872.10 फीट दर्ज किया गया, जबकि पूर्ण जलाशय स्तर 870 फीट है. जलाशय में 106.3271 प्रतिशत भराव दर्ज किया गया. लाइव स्टोरेज 4625.23 एमसीएम रहा. पानी के दबाव को नियंत्रित करने के लिए पांच गेट खोले गये हैं. पांचों गेटों से कुल 55,000 क्यूसेक पानी छोड़े जाने की सूचना है. जलाशय के जलस्तर और पानी की निकासी पर संबंधित विभाग लगातार नजर रख रहा है.
बाणसागर में एफआरएल से महज सात सेंटीमीटर नीचे जलस्तर
बाणसागर जलाशय में भी पानी का स्तर पूर्ण जलाशय स्तर के करीब पहुंच गया है. बुधवार सुबह 8 बजे जलस्तर 341.57 मीटर दर्ज किया गया, जबकि एफआरएल 341.64 मीटर है. यानी जलस्तर एफआरएल से महज सात सेंटीमीटर नीचे है. जलाशय में लाइव स्टोरेज 5329.60 एमसीएम और भराव 98.15 प्रतिशत दर्ज किया गया.
पिछले वर्ष दो सितंबर 2025 को बाणसागर का जलस्तर 341.55 मीटर था. इस वर्ष इसी तारीख को जलस्तर 0.02 मीटर अधिक है. बाणसागर से पीएच-III के माध्यम से 173.87 क्यूमेक तथा स्पिलवे से 1860 क्यूमेक पानी छोड़े जाने की सूचना है. जलाशय के जलस्तर और पानी की निकासी की स्थिति पर विभाग लगातार निगरानी रख रहा है.
निचले इलाकों पर प्रशासन की नजर
इंद्रपुरी बराज से भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के साथ बाणसागर और रिहंद जलाशय में भी पानी का स्तर काफी अधिक है. ऐसे में सोन नदी के तटवर्ती निचले इलाकों में प्रशासन की विशेष नजर है. फिलहाल नदी के बहाव में गिरावट का ट्रेंड राहत देने वाला है, लेकिन ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में फिर भारी बारिश या जलाशयों से अतिरिक्त पानी छोड़े जाने पर तटवर्ती गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है.
