Sasaram News(राकेश कुमार): रोहतास जिले में जहां पारा 44 डिग्री सेल्सियस को पार कर आसमान से आग उगल रहा है, वहीं तिलौथू प्रखंड मुख्यालय और शहरी क्षेत्र के लोग पिछले एक सप्ताह से बूंद-बूंद पानी के लिए त्राहिमाम कर रहे हैं. स्थानीय नल-जल योजना के पूरी तरह ठप होने से शहरवासी बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं. एक तरफ सरकार और जिला प्रशासन इस भीषण गर्मी में चापाकालों और नल-जल के सहारे हर घर तक पानी पहुंचाने का दम भर रही है, वहीं दूसरी तरफ तिलौथू में जमीनी हकीकत सरकारी दावों की पोल खोल रही है.
हर महीने ‘दगा’ देती है जलमीनार, गृहिणियों का जीना हुआ मुहाल
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, तिलौथू की जलमीनार का बंद होना अब आम बात हो गई है. हर एक या डेढ़ महीने के भीतर यह पूरी तरह ठप हो जाती है. पानी की सप्लाई बंद होने से सबसे ज्यादा परेशानी घर की महिलाओं और गृहिणियों को उठानी पड़ रही है. खाना पकाने से लेकर साफ-सफाई तक के सारे काम ठप हो गए हैं. इस तपती दुपहरी में पानी का दगा दे जाना शहर वासियों के लिए किसी बड़ी आफत से कम नहीं है. जब भी यह सेवा बंद होती है, पीएचईडी (PHED) विभाग कभी मोटर जल जाने का रोना रोता है, तो कभी केबल शॉर्ट होने या तार जलने का बहाना बनाकर पल्ला झाड़ लेता है.
अफसरशाही का चरम: आम जनता तो दूर, वरीष्ठ अधिकारियों का भी नहीं उठता फोन
इस पूरे मामले में सबसे शर्मनाक रवैया संबंधित विभाग के अभियंताओं (Engineers) का है. स्थिति यह हो गई है कि इस विभाग के जिम्मेदार अधिकारी किसी उपभोक्ता या आम नागरिक का फोन उठाना भी मुनासिब नहीं समझते.
एक स्थानीय पीड़ित ग्रामीण ने कहा कि हैरानी की बात तो यह है कि अंचल या प्रखंड के वरीय प्रशासनिक अधिकारियों और पत्रकारों तक का फोन इस विभाग के इंजीनियरों द्वारा रिसीव नहीं किया जाता है. प्रखंड के स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी भी दबी जुबान में मानते हैं कि इसके लिए पीएचईडी के जूनियर इंजीनियर (JE) ही मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं.
जर्जर मोटर और जले हुए तार; ऑपरेटर के भरोसे चल रही व्यवस्था
जब इस खराबी के कारणों को जानने के लिए जलमीनार के ऑपरेटर से बात की गई, तो तकनीकी जर्जरता का सच सामने आया. ऑपरेटर के मुताबिक जलमीनार की मोटर पूरी तरह जर्जर हो चुकी है और इसके सारे मुख्य तार पूरी तरह जल चुके हैं. ग्रामीणों को पता चला कि क्षेत्र में नए जूनियर इंजीनियर (JE) ने योगदान दिया है. लेकिन जब उम्मीद के साथ ग्रामीणों ने उन्हें फोन लगाया, तो उन्होंने भी फोन उठाना उचित नहीं समझा.
हर 15 दिन में बंद होती है सेवा, विभाग सोया कुंभकर्णी नींद
तिलौथू के प्रबुद्ध नागरिक दिलीप कुमार गुप्ता, सत्यानंद कुमार, अजीत कुमार और आशा सिंह ने विभाग के खिलाफ तीखा आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि जब 44 डिग्री के टॉर्चर के बीच भी नल-जल सेवा एक सप्ताह से ज्यादा समय तक बंद रहे, तो साफ पता चलता है कि यह विभाग जनता की प्यास बुझाने के प्रति कितना असंवेदनशील है. ग्रामीणों का कहना है कि हर 15 दिन या एक महीने के भीतर इस सेवा का ठप होना यह साबित करता है कि इसके रख-रखाव में भारी वित्तीय अनियमितता और लापरवाही बरती जा रही है.
अब देखना यह है कि 44 डिग्री की इस जानलेवा तपन के बीच रोहतास जिला प्रशासन की नींद कब टूटती है और तिलौथू शहर के प्यासे कंठों को नल-जल का पानी कब नसीब होता है.
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