चेनारी : सरकारी खंभे पर तार फंसाने में दादा ने पोते को मारी थी गोली, खून के रिश्ते का खून निकालने की चौथी घटना

नरैना गांव में बिजली के टोके को लेकर हुए विवाद ने खूनी मोड़ ले लिया, जब एक दादा ने अपने पोते पर गोली चला दी. यह घटना दर्शाती है कि कैसे छोटे विवाद भी खूनी संघर्ष का रूप ले सकते हैं.

चेनारी थाना क्षेत्र के नरैना गांव में गुरुवार की रात करीब 11 बजे एक दादा ने पोता को गोली मार दी. जिसमें पोता जख्मी हो गया. घटना के बाद पुलिस ने एक देशी कट्टा, एक राइफल, दस गोली, एक खोखा व पिलेट बरामद किया है. इसकी जानकारी शुक्रवार को सदर एसडीपीओ-1 विप्लव कुमार ने प्रेसवार्ता आयोजित कर दी.

उन्होंने बताया कि सूचना मिली कि नरैना गांव निवासी स्व. विश्वनाथ सिंह के पुत्र इन्द्रदेव सिंह ने अपने पोता मृत्युंजय सिंह को गोली मारकर जख्मी कर दिया गया है. उक्त सूचना के सत्यापन व आवश्यक कार्रवाई के लिए एसपी के निर्देश पर सदर एसडीपीओ-1 के नेतृत्व में विशेष छापामारी दल का गठन किया गया. गठित छापामारी दल के द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए घटना में शामिल इन्द्रदेव सिंह को व घटना में प्रयुक्त किये गये एक देशी कट्टा, एक राइफल व दस गोली व एक फायर किया गया खोखा व एक पिलेट के साथ गिरफ्तार किया गया.

इस संबंध मे कांड दर्ज कर अग्रेतर कार्रवाई की जा रही है. जख्मी मृत्युंजय सिंह को ईलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्या केन्द्र चेनारी भेजा गया है, जहां चिकित्सक द्वारा प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल, सासाराम रेफर किया गया है. छापेमारी दल में चेनारी थानाध्यक्ष दिनेश मालाकार , उगहनी ओपी प्रभारी विकास कुमार, आनन्द कुमार, त्रिवेणी राम व चेनारी थाना रिजर्व गार्ड शामिल थे.

सरकारी खंभे पर टोका बना खूनी विवाद का कारण

गुरुवार को बिजली के खंभे पर बिजली का टोका (तार) फंसाने को लेकर शुरू हुआ विवाद ही खूनी वारदात में बदल गया. मृत्युंजय सिंह खंभे पर तार फंसा कर अपने घर बिजली ले जा रहा था. इसी दौरान उसके दादा इन्द्रदेव सिंह वहां पहुंचे और तार लगाने का विरोध करते हुए कहा कि इस खंभे पर टोका नहीं लगाया जाएगा. इस पर पोते ने जवाब दिया कि खंभा सरकारी है और वह अपने घर के लिए बिजली का तार लगेगा. इसी बात को लेकर दोनों के बीच पहले तीखी नोकझोंक हुई. देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि गुस्से में इन्द्रदेव सिंह ने अवैध रायफल से पोते पर गोली चला दी. गोली की आवाज सुनते ही आसपास के लोग मौके पर दौड़ पड़े. खून से लथपथ मृत्युंजय सिंह को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, चेनारी ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल, सासाराम रेफर कर दिया.

खून के रिश्ते की नहीं हो रही कदर

जिले में लगातार हो रही घटनाएं पर अब ऐसा प्रतीत हो रहा है कि अब अपने खून के रिश्ते की कदर भी लोग भुलना शुरू कर दिये है. गत दो वर्षों की आंकड़ों पर एक नजर डाले तो गत 21 सितंबर 2024 को बिक्रमगंज थाना क्षेत्र के शिवपुर पंचायत के सरपंच सतीश कुमार सिंह की हत्या उसके भतीजे बादल के द्वारा ही कर दी गयी थी. 24 नवंबर 2025 को बिक्रमगंज अनुमंडल क्षेत्र के भानस थाना अंतर्गत डिहरा गांव निवासी अमित सिंह ने अपनी पत्नी नीतू देवी व पिता शालीग्राम सिंह को लाइसेंसी बंदूक से गोली मार दी थी. उसके बाद अपनी भी अमित ने खुद आत्महत्या कर लिया था. 28 जुलाई 2026 को बड्डी थाना क्षेत्र के विश्रामपुर गांव में जमीन को रेहन रखने की विवाद उत्पन्न हो गयी. विवाद में बेटे ने बाप पर लाइसेंसी बंदूक से गोली चला दी. इसी बीच गोली चलाने वाले भूपू सिंह का बेटा आष्ठानंद सिंह को गोली लग गयी. वहीं 30 जुलाई 2026 को चेनारी थाना क्षेत्र के नरैना गांव में दादा ने पोता पर ही गोली चला दी.


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By Punit Kr Pandey

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