फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर 20 अगस्त से होगा नाइट ब्लड सर्वे

SASARAM NEWS.फाइलेरिया उन्मूलन अभियान के तहत जिले में 20 अगस्त से नाइट ब्लड सर्वे की शुरुआत की जायेगी. इस सर्वे के माध्यम से फाइलेरिया के सूक्ष्म जीवाणुओं की पहचान की जायेगी, जो सामान्यतः रात में ही शरीर में सक्रिय होते हैं.

रोहतास के हर प्रखंड में चलेगा जागरूकता अभियान

जीविका, स्वयं सहायता समूह, आशा, आंगनबाड़ी और पंचायत प्रतिनिधि होंगे सहभागी

प्रतिनिधि, सासाराम ऑफिस.

फाइलेरिया उन्मूलन अभियान के तहत जिले में 20 अगस्त से नाइट ब्लड सर्वे की शुरुआत की जायेगी. इस सर्वे के माध्यम से फाइलेरिया के सूक्ष्म जीवाणुओं की पहचान की जायेगी, जो सामान्यतः रात में ही शरीर में सक्रिय होते हैं. यह जानकारी जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण अधिकारी डॉ आसीत रंजन ने बुधवार को अपने कार्यालय में आयोजित बैठक में दी. उन्होंने बताया कि राज्य स्वास्थ्य समिति बिहार के दिशा-निर्देश के अनुसार यह सर्वे प्रत्येक वर्ष किया जाता है और इस वर्ष भी होगा. इस अभियान में तकनीकी सहयोग पिरामल फाउंडेशन की ओर से दिया जायेगा. संस्था के गांधी फेलो सायान विश्वास के प्रोग्राम लीडर हेमंत व कृष्णकांत चौबे के साथ अन्य प्रतिनिधि सर्वे को सफल बनाने में जुटे रहेंगे. इस अभियान को सफल बनाने के लिए पिरामल फाउंडेशन व जीविका के सहयोग से जिले के सभी संकुल संघ, ग्राम संगठन व स्वयं सहायता समूहों में फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर विशेष जागरूकता अभियान चलाया जायेगा. इसमें आशा, आंगनबाड़ी, फैथ लीडर, युवा, जीविका की सीएम दीदी और पंचायत प्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित की जायेगी.

फाइलेरिया से बचाव के लिए जागरूकता जरूरी

फाइलेरिया शरीर के कई अंगों जैसे हाथ, पैर, स्तन और अंडकोष को प्रभावित कर विकलांगता व कुरूपता का कारण बनता है. राज्य स्वास्थ्य समिति के अनुसार यह बीमारी बिहार में रहने वाले सभी 13 करोड़ लोगों के लिए एक संभावित खतरा है. अधिकतर इसका संक्रमण बचपन में होता है,. लेकिन, इसके लक्षण सामने आने में पांच से 15 साल तक का समय लग सकता है. सभी लोगों को साल में एक बार फाइलेरिया की दवा का सेवन करना चाहिए. यह दवा स्वस्थ दिखने वाले लोगों को भी लेनी चाहिए. हालांकि, दो साल से कम उम्र के बच्चों और गर्भवती महिलाओं को इससे अलग रखा गया है. दवा का सेवन स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं या चिकित्सकों की निगरानी में ही करने की सलाह दी गयी है. जागरूकता अभियान की जिम्मेदारी जीविका की सामुदायिक पोषण साधनसेवी व स्वास्थ्य पोषण के मास्टर रिसोर्स पर्सन को सौंपी गयी है. वे गांवों में लोगों को जागरूक करेंगे, ताकि वे नाइट ब्लड सर्वे में भाग लेकर फाइलेरिया मुक्त समाज के निर्माण में सहयोग दें.

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Published by: Anurag sharan

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