रोहतास: बिक्रमगंज के अंजवित सिंह महाविद्यालय में एनईपी 2020 पर संगोष्ठी, हर सेमेस्टर 20 से 30% ड्रॉपआउट पर जतायी चिंता

बिक्रमगंज के अंजवित सिंह महाविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया. वक्ताओं ने नीति के क्रियान्वयन में आ रही चुनौतियों और हर सेमेस्टर 20-30% छात्र-छात्राओं के ड्रॉपआउट होने की गंभीर चिंता पर प्रकाश डाला.

Sasaram NEP 2020 Seminar: नगर के अंजवित सिंह महाविद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के अनुपालन, चुनौतियों एवं प्रभाव विषय पर एकदिवसीय संगोष्ठी का आयोजन बीते सप्ताह किया गया. संगोष्ठी में वक्ताओं ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों, इसके क्रियान्वयन में आ रही चुनौतियों तथा उच्च शिक्षा की वर्तमान स्थिति पर विस्तार से चर्चा की.

इस दौरान प्रत्येक सेमेस्टर में करीब 20 से 30 प्रतिशत छात्र-छात्राओं के ड्रॉपआउट होने को गंभीर चिंता का विषय बताया गया. वक्ताओं ने कहा कि विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा से जोड़े रखने के लिए संसाधनों के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षण व्यवस्था और आवश्यक आधारभूत संरचना विकसित करना जरूरी है.

एनईपी लागू करने के लिए भौतिक संसाधन और मानव संसाधन जरूरी

संगोष्ठी में विषय प्रवेश कराते हुए कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. कन्हैया सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को पूरी तरह लागू करने के लिए भौतिक आधारभूत संरचना और पर्याप्त मानव संसाधन की उपलब्धता अत्यंत आवश्यक है. संसाधनों के अभाव में नीति के प्रावधानों को धरातल पर पूरी तरह लागू करने में कठिनाई आ रही है.

उन्होंने एनईपी 2020 के पांच प्रमुख स्तंभों की विस्तार से चर्चा करते हुए विद्यालयी शिक्षा के लिए निर्धारित 5+3+3+4 संरचना की जानकारी दी. साथ ही उच्च शिक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण प्रावधानों और बदलावों को भी सामने रखा. डॉ. कन्हैया सिंह ने कहा कि उच्च शिक्षा में विद्यार्थियों का लगातार ड्रॉपआउट होना शिक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती है. प्रत्येक सेमेस्टर में 20 से 30 प्रतिशत छात्र-छात्राओं का पढ़ाई छोड़ देना चिंता का विषय है. इसके कारणों की पहचान कर विद्यार्थियों को शिक्षा से जोड़े रखने के लिए प्रभावी प्रयास किए जाने की आवश्यकता है.

कौशल और व्यावसायिक शिक्षा पर विशेष जोर

मुख्य वक्ता डॉ. संतोष सुमन, सच्चिदानंद सिन्हा महाविद्यालय, औरंगाबाद ने सरल भाषा में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुपालन, चुनौतियों और संभावित प्रभावों को समझाया. उन्होंने कहा कि नीति को सफल बनाने में विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका है. नई शिक्षा नीति में कौशल शिक्षा के साथ व्यावसायिक शिक्षा पर भी विशेष बल दिया गया है, ताकि विद्यार्थी केवल डिग्री हासिल करने तक सीमित न रहें, बल्कि रोजगार और स्वरोजगार के लिए आवश्यक कौशल भी विकसित कर सकें.

शिक्षकों, विद्यार्थियों और सरकार को मिलकर करना होगा काम

समारोह की अध्यक्षता डॉ. सरोज राम ने की. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति का सही तरीके से अनुपालन किया जाए तो यह समाज और देश के लिए काफी कारगर साबित हो सकती है. इसके लिए शिक्षकों, विद्यार्थियों और शैक्षणिक संस्थानों के साथ सरकार को भी मिलकर काम करना होगा. इस अवसर पर कार्यक्रम समन्वयक डॉ. कन्हैया सिंह ने मुख्य वक्ता डॉ. संतोष सुमन को अंगवस्त्र एवं पौधा देकर सम्मानित किया.

शिक्षक और अन्य लोग रहे मौजूद

संगोष्ठी का संचालन राजनीति शास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. अखलाक अहमद ने किया. कार्यक्रम में डॉ. शशि भूषण, डॉ. फ़ज़ल अहमद, डॉ. अमरेंद्र मिश्रा, डॉ. रविन्द्र कुमार, डॉ. चंद्रशेखर सहित महाविद्यालय के शिक्षक एवं अन्य लोग उपस्थित रहे. अंत में डॉ. प्रभात कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन किया.

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By संतोष चंद्रकांत

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