Sasaram News : रोहतास जिले में हर महीने 120 से अधिक नाबालिग किशोरियों के घर छोड़कर चले जाने की घटनाएं पुलिस और अभिभावकों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई हैं. दावथ प्रखंड के सेमारी पंचायत सरकार भवन में आयोजित सहयोग शिविर में पुलिस अधीक्षक रौशन कुमार ने लोगों को जागरूक करते हुए कहा कि अधिकांश मामलों में अभिभावकों की पर्याप्त निगरानी नहीं होने के कारण ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं.
दूर-दराज के राज्यों तक पहुंच जाती हैं किशोरियां
एसपी ने बताया कि घर छोड़ने वाली कई किशोरियां नागालैंड, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश, दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे दूर-दराज के शहरों तक पहुंच जाती हैं. ऐसे मामलों में उनकी तलाश करना पुलिस के लिए काफी चुनौतीपूर्ण हो जाता है.
एक साल में दोगुनी हुई घटनाएं
उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष हर महीने ऐसे करीब 60 मामले सामने आते थे, जबकि अब यह संख्या बढ़कर 120 से अधिक हो गई है. यदि समय रहते परिवार सतर्क नहीं हुए तो आने वाले दिनों में यह आंकड़ा और बढ़ सकता है.
मोबाइल और सोशल मीडिया पर रखें नजर
एसपी ने अभिभावकों से अपील की कि मोबाइल और सोशल मीडिया के दौर में बच्चों की गतिविधियों पर नियमित नजर रखें. यह जानना जरूरी है कि वे किससे बात कर रहे हैं, किसके संपर्क में हैं और इंटरनेट का किस उद्देश्य से उपयोग कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि बच्चों से खुलकर संवाद करें, उनकी समस्याएं सुनें और उन्हें भरोसे का माहौल दें, ताकि वे किसी गलत संगत या बहकावे में न आएं.
बिक्रमगंज थाना क्षेत्र में जून में पांच मामले दर्ज
बिक्रमगंज थाना क्षेत्र के आंकड़े भी चिंता बढ़ाने वाले हैं. थानाध्यक्ष रंजन कुमार ने बताया कि जून माह में थाना क्षेत्र से पांच लड़कियां घर छोड़कर चली गई थीं. इनमें से दो को पुलिस ने सकुशल बरामद कर लिया है, जबकि तीन की तलाश अब भी जारी है. पुलिस का कहना है कि परिवार की सतर्कता, बच्चों के साथ निरंतर संवाद और समय पर सूचना देने से ऐसी घटनाओं पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है. ब
