छपरा में जलजमाव बना स्थायी संकट. एक लाख आबादी प्रभावित, कारोबार और शिक्षा पर भी पड़ रहा असर

Saran News : छपरा शहर के आधे इलाकों में जलजमाव एक स्थायी समस्या बन गई है। लचर ड्रेनेज सिस्टम के कारण एक लाख की आबादी प्रभावित है और व्यापार पर भी बुरा असर पड़ रहा है।

Saran News : शहर के करीब 50 प्रतिशत इलाकों में जलजमाव अब स्थायी समस्या बन चुका है. पिछले एक दशक से हजारों लोग इस परेशानी का सामना कर रहे हैं. बारिश के दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जबकि सामान्य दिनों में भी लचर ड्रेनेज सिस्टम के कारण सड़कों पर पानी जमा रहता है. कटहरी बाग, तेलपा, रावल टोला, मोहन नगर, मौना पंचायत भवन रोड, मौना-सांढा रोड, सांढा चौक, साधना पुरी, श्यामचक, मासूमगंज और गुदरी समेत कई इलाकों में वर्षों से जलनिकासी की समस्या बनी हुई है.

सड़क और नालों के निर्माण के बावजूद नहीं मिला समाधान

इन क्षेत्रों में कई बार सड़क निर्माण और नालों का जीर्णोद्धार कराया गया, लेकिन जलनिकासी की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका. शहर की करीब एक लाख आबादी इस समस्या से प्रभावित है और हर वर्ष बरसात के दौरान लोगों की मुश्किलें बढ़ जाती हैं.

लचर ड्रेनेज सिस्टम बना सबसे बड़ी वजह

छपरा में खनुआ नाला को जलनिकासी की लाइफलाइन माना जाता है, लेकिन पिछले करीब 20 वर्षों से इसकी स्थिति खराब बनी हुई है. बीते तीन वर्षों से इसके जीर्णोद्धार का कार्य चल रहा है, जो अब तक पूरा नहीं हो सका है. इसके कारण विभिन्न मोहल्लों के छोटे नालों का पानी शहर में ही जमा हो रहा है. नगर निगम क्षेत्र के 45 वार्डों में अधिकांश छोटे नालों की मुख्य नालों से समुचित कनेक्टिविटी नहीं है, जिससे जलनिकासी बाधित हो रही है.

कारोबार पर भी पड़ रहा नकारात्मक असर

शहर के सरकारी बाजार, मौना, सांढा, गुदरी और सलेमपुर जैसे प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों में सालभर जलजमाव की स्थिति बनी रहती है. सड़क पर पानी जमा रहने के कारण ग्राहक बाजार आने से बचते हैं, जिससे व्यापार प्रभावित हो रहा है. सरकारी बाजार, जो नगर निगम के लिए सबसे अधिक राजस्व देने वाला बाजार माना जाता है, वहां भी कई दुकानों के सामने महीनों से तीन से चार फीट तक पानी जमा रहता है.

निजी स्कूलों में घट रहा नामांकन

मौना, सरकारी बाजार, सांढा, सलेमपुर और मोहन नगर क्षेत्र में संचालित 10 से अधिक निजी विद्यालय भी जलजमाव की समस्या से प्रभावित हैं. एक निजी विद्यालय के संचालक ओमप्रकाश ने बताया कि स्कूल तक पहुंचने वाले रास्ते पर वर्षों से जलभराव रहने के कारण कई अभिभावकों ने अपने बच्चों का नामांकन दूसरे विद्यालयों में करा दिया है. इससे निजी विद्यालयों में नामांकन लगातार घट रहा है.

मेयर ने समाधान के लिए उठाए कदम

छपरा नगर निगम के मेयर लक्ष्मी नारायण गुप्ता ने बताया कि शहर को जलजमाव से राहत दिलाने के लिए कई आवश्यक कदम उठाए गए हैं. उन्होंने कहा कि पिछले तीन-चार वर्षों में बुडको द्वारा बनाए गए कई नालों के निर्माण कार्य में अनियमितताएं सामने आई हैं. कई स्थानों पर अधूरा निर्माण छोड़ दिया गया है और छोटे नालों की मुख्य नालों से कनेक्टिविटी भी नहीं की गई है.

उन्होंने बताया कि इस संबंध में छपरा के सांसद राजीव प्रताप रूडी और नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव को पत्र लिखकर समस्या से अवगत कराया गया है. वहीं नगर निगम द्वारा कई मोहल्लों में नई सड़क और नाला निर्माण का कार्य कराया गया है, जहां अब जलजमाव की समस्या काफी हद तक समाप्त हो गई है.

एक नजर में समस्या

  • छपरा नगर निगम में कुल 45 वार्ड हैं.
  • 40 से अधिक वार्ड जलजमाव की स्थायी समस्या से प्रभावित हैं.
  • शहर के 5 प्रमुख बाजारों में सालभर जलभराव रहता है.
  • 20 से अधिक रिहायशी इलाकों में पिछले एक दशक से जलजमाव की समस्या बनी हुई है.
  • शहर की साफ-सफाई पर प्रतिवर्ष करीब 90 करोड़ रुपये खर्च किए जाते हैं.
  • जलजमाव से लगभग एक लाख लोगों का जनजीवन प्रभावित है.
  • सरकारी बाजार और मौना क्षेत्र में कारोबार पर प्रतिकूल असर पड़ा है.
  • स्थायी जलजमाव वाले क्षेत्रों में निजी विद्यालयों का संचालन और नामांकन भी प्रभावित हो रहा है.

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By प्रभात किरण हिमांशु

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