Saran News: सारण जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने अपने कार्यालय कक्ष में बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम-2015 के तहत पंजीकृत मामलों की द्वितीय अपील में गहन सुनवाई की. इस उच्चस्तरीय सुनवाई के दौरान लोक शिकायतों का ऑन-स्पॉट निवारण किया गया. समीक्षा में कुल 16 गंभीर मामलों की विस्तृत सुनवाई की गई, जिसमें से 07 मामलों में जिला पदाधिकारी द्वारा अंतिम रूप से आदेश पारित कर दिया गया.
अगली तिथि पर हाजिर होने का निर्देश
डीएम ने शेष बचे 09 लंबित मामलों में संबंधित लोक प्राधिकारों को पूरी जांच रिपोर्ट और साक्ष्यों के साथ अगली निर्धारित तिथि पर अनिवार्य रूप से उपस्थित होने का कड़ा निर्देश दिया है. जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि मामलों को लटकाने की प्रवृत्ति को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. लोक प्राधिकारों को जनता की समस्याओं के प्रति अधिक जवाबदेह और संवेदनशील बनना होगा.
बाढ़ राहत राशि में गड़बड़ी
सुनवाई के दौरान सोनपुर से आए परिवादी दिनेश कुमार सिंह एवं मनोज कुमार सिंह से संबंधित एक गंभीर मामला सामने आया. परिवादियों ने शिकायत दर्ज कराई थी कि वर्ष 2025 में आई भीषण बाढ़ के बाद उन्हें देय बाढ़ सहायता राशि के लिए आपदा सम्पूर्ति पोर्टल पर उनका नाम जानबूझकर नहीं जोड़ा गया. जांच में पाया गया कि संबंधित हल्का कर्मचारी ने इस कार्य में घोर लापरवाही बरती थी.
कर्मचारी पर लगा जुर्माना
कर्मचारी की इस घोर प्रशासनिक लापरवाही को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने दोषी राजस्व कर्मी के विरुद्ध तत्काल प्रभाव से 1,000 रुपये का आर्थिक जुर्माना (शास्ति) अधिरोपित कर दिया. इसके साथ ही डीएम ने पर्यवेक्षण में कमी पाए जाने पर सोनपुर के अंचलाधिकारी (सीओ) से भी शो-कॉज पूछते हुए एक सप्ताह के भीतर स्पष्टीकरण सौंपने का कड़ा निर्देश जारी किया है.
सजग रहने की हिदायत
जिला पदाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने कड़े शब्दों में कहा कि आम जनता की शिकायतों का ससमय तथा गुणवत्तापूर्ण निवारण करना प्रशासन का मुख्य दायित्व है. उन्होंने कहा कि बिहार लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम का सफल क्रियान्वयन जिला प्रशासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता सूची में शामिल है. इसके लिए जिले के सभी स्तर के छोटे-बड़े अधिकारी हर समय सजग, संवेदनशील तथा सक्रिय रहें.
Also Read: पीएनबी कादीपुर के समीप पिकअप और बाइक की टक्कर,तीन युवक गंभीर रूप से घायल
