Saran mein badh: सारण जिला हर साल या एक-दो साल के अंतराल पर बाढ़ की विभीषिका झेलता रहा है. वर्ष 2021 से 2026 तक जिले के अलग-अलग प्रखंडों और गांवों में करीब 13 बार बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हुई. उपलब्ध आंकड़ों पर नजर डालें तो बाढ़ का प्रमुख कारण सारण तटबंध का टूटना और गंगा, गंडक, घाघरा, सरयू व सोन समेत अन्य नदियों के जलस्तर में वृद्धि रहा है.
इन वर्षों में वर्ष 2021 में बाढ़ ने सबसे ज्यादा तबाही मचायी, जबकि 2025 में बाढ़ से सबसे कम क्षेत्र प्रभावित हुआ. हालांकि, बार-बार आने वाली बाढ़ से एक ओर खेतों की उर्वरा शक्ति बढ़ती है, वहीं दूसरी ओर फसल, पशुधन और करोड़ों रुपये की संपत्ति का नुकसान भी होता है. राहत की बात यह है कि सारण में बाढ़ के दौरान जान-माल की क्षति अपेक्षाकृत कम रही है.
2001 में तटबंध टूटने से 157 पंचायतों के 671 गांव हुए थे प्रभावित
वर्ष 2001 में अत्यधिक पानी के दबाव के कारण सारण तटबंध टूट गया था. इसके चलते मसरख, पानापुर, तरैया, इसुआपुर, परसा, मकेर, दरियापुर, बनियापुर, लहलादपुर और रिविलगंज प्रखंड प्रभावित हुए थे. बाढ़ से 157 पंचायतों के 671 गांव और 10,33,221 आबादी प्रभावित हुई थी. इस दौरान 1,07,621 हेक्टेयर में खड़ी फसल को भी नुकसान हुआ था.
2002 में भी तटबंध टूटा, 4.93 लाख आबादी प्रभावित
वर्ष 2002 में भी अत्यधिक पानी के दबाव के कारण सारण तटबंध टूट गया था. इससे मढ़ौरा, मसरख, पानापुर, तरैया, इसुआपुर और अमनौर प्रखंड प्रभावित हुए. कुल 73 पंचायतों के 305 गांवों की 4,93,608 आबादी और 63,870 हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई थी.
2003 में गंगा का जलस्तर बढ़ा, 6.49 लाख लोग प्रभावित
वर्ष 2003 में गंगा नदी के जलस्तर में वृद्धि के कारण बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हुई. सदर छपरा, रिविलगंज, मांझी, दिघवारा, दरियापुर, सोनपुर, जलालपुर और गड़खा प्रखंड प्रभावित हुए. इस दौरान 100 पंचायतों के 428 गांव, 6,49,528 आबादी और 61,990 हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई थी.
2008 में बारिश और नदियों के बढ़े जलस्तर से बाढ़
वर्ष 2008 में अत्यधिक बारिश और नदियों के जलस्तर में वृद्धि के कारण बाढ़ आयी. सोनपुर, दरियापुर, दिघवारा, सदर छपरा, रिविलगंज, मांझी और गड़खा प्रखंड प्रभावित हुए. कुल 45 पंचायतों के 113 गांव, 49,320 आबादी और 17,445 हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई थी.
2011 में सोन, गंगा और सरयू का बढ़ा जलस्तर
वर्ष 2011 में सोन, गंगा और सरयू नदियों के जलस्तर में अत्यधिक वृद्धि हुई. इससे सदर छपरा, रिविलगंज, गड़खा, दिघवारा, दरियापुर और सोनपुर प्रखंड प्रभावित हुए. कुल 51 पंचायतों के 151 गांवों की 1,39,000 आबादी और 18,000 हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई थी.
2013 में 4.69 लाख आबादी पर पड़ा बाढ़ का असर
वर्ष 2013 में भी सोन, गंगा और सरयू नदियों के जलस्तर में अत्यधिक वृद्धि हुई. सदर छपरा, मांझी, जलालपुर, रिविलगंज, गड़खा, दिघवारा, दरियापुर और सोनपुर प्रखंड प्रभावित हुए. इस दौरान 65 पंचायतों के 238 गांव, 4,69,405 आबादी और 90,500 हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई थी.
2016 में सोन नदी में छोड़ा गया 12 लाख क्यूसेक पानी
वर्ष 2016 में इंद्रपुरी बराज से सोन नदी में 12 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद गंगा और उसकी सहायक नदियों के जलस्तर में अत्यधिक वृद्धि हुई. इसके कारण सदर, गड़खा, रिविलगंज, दिघवारा, दरियापुर और सोनपुर प्रखंड प्रभावित हुए. कुल 85 पंचायतों के 405 गांवों की 8,36,000 आबादी और 51,000 हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई थी.
2017 में गोपालगंज में सारण तटबंध टूटने से बढ़ी परेशानी
वर्ष 2017 में गोपालगंज में सारण तटबंध टूट गया था. इसके बाद गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने से पानापुर, मसरख, तरैया, अमनौर, मढ़ौरा और मकेर प्रखंड प्रभावित हुए. कुल 43 पंचायतों के 197 गांव, 3,27,000 आबादी और 20,051 हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई थी.
2020 में 10 लाख से ज्यादा आबादी पर बाढ़ का असर
वर्ष 2020 में भी गोपालगंज में सारण तटबंध टूटने के कारण गंडक नदी का जलस्तर बढ़ गया. पानापुर, मसरख, तरैया, अमनौर, इसुआपुर, मढ़ौरा, परसा, गड़खा, दरियापुर और मकेर प्रखंड प्रभावित हुए. कुल 119 पंचायतों के 615 गांवों की 10,24,000 आबादी और 33,512 हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई थी.
2021 में सबसे ज्यादा प्रखंड और पंचायत प्रभावित
वर्ष 2021 में गंडक और गंगा नदी के जलस्तर में वृद्धि के कारण सारण में व्यापक बाढ़ की स्थिति बनी. पानापुर, तरैया, मकेर, परसा, अमनौर, गड़खा, रिविलगंज, सदर, दिघवारा, दरियापुर और सोनपुर प्रखंड प्रभावित हुए. कुल 176 पंचायतों के 180 गांव और 2,23,957 आबादी प्रभावित हुई थी. इस दौरान 25,242 हेक्टेयर फसल को नुकसान पहुंचा था.
2024 में 52 पंचायतों के 122 गांव प्रभावित
वर्ष 2024 में गंडक और गंगा नदी के जलस्तर में वृद्धि के कारण सदर छपरा, रिविलगंज, मांझी, गड़खा, दिघवारा, सोनपुर, अमनौर, दरियापुर, मकेर, पानापुर, परसा और तरैया प्रखंड प्रभावित हुए. कुल 52 पंचायतों के 122 गांवों की 1,94,035 आबादी और 4,310 हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई थी.
2025 में सबसे कम 28 पंचायतों के 66 गांव प्रभावित
वर्ष 2025 में गंगा नदी के जलस्तर में अत्यधिक वृद्धि के कारण बाढ़ की स्थिति बनी. सोनपुर, सदर छपरा, दिघवारा, गड़खा और रिविलगंज प्रखंड प्रभावित हुए. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष 28 पंचायतों के 66 गांवों की 1,84,774 आबादी प्रभावित हुई थी. फसल प्रभावित होने का आंकड़ा 0.03285 हेक्टेयर दर्ज किया गया.
2026 में गंगा और घाघरा के बढ़े जलस्तर से बाढ़
वर्ष 2026 में भी गंगा और घाघरा नदियों के जलस्तर में वृद्धि के कारण सारण में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हुई है. अभी तक सोनपुर, छपरा सदर, दिघवारा और रिविलगंज समेत अन्य प्रखंड प्रभावित हुए हैं. इस वर्ष बाढ़ से हुए नुकसान का विस्तृत आकलन प्रशासन की ओर से किया जा रहा है.
बाढ़ का बड़ा कारण तीन बड़ी नदियों का जलस्तर बढ़ना
सारण जिला तीन तरफ से गंडक, गंगा और घाघरा जैसी बड़ी नदियों से घिरा हुआ है. बारिश के मौसम में इन नदियों के जलस्तर में वृद्धि के साथ ही छोटी नदियों सोंधी, माही, गंडकी, डाबरा और गोहरा में जलप्लावन होने से जिले में अक्सर बाढ़ की स्थिति बनती है. इसके अलावा सारण तटबंध का टूटना भी कई वर्षों में बाढ़ का प्रमुख कारण रहा है.
बार-बार आने वाली बाढ़ से खेतों में नई मिट्टी और गाद जमा होने से जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ती है, लेकिन लंबे समय तक पानी जमा रहने से फसल, मवेशियों और जनजीवन को नुकसान पहुंचता है.
सारण जिला एक नजर में
वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार सारण जिले की कुल आबादी 39,43,098 है. इसमें 20,23,476 पुरुष और 19,19,622 महिलाएं हैं. जिले में तीन अनुमंडल और 20 अंचल-सह-प्रखंड हैं. जिले के 20 प्रखंड-सह-अंचल क्षेत्रों के अधीन कुल 318 ग्राम पंचायतें हैं, जो 329 हल्कों में विभक्त हैं. यहां कुल राजस्व गांवों की संख्या 1,796 है.
जिले में छपरा नगर निगम है, जिसमें 45 वार्ड हैं. इसके अलावा नौ नगर पंचायतें हैं. जिले में कुल कृषि योग्य भूमि करीब 1,99,300 हेक्टेयर है. यहां मुख्य रूप से धान, मक्का, गेहूं, दलहन, तेलहन और सब्जियों की खेती होती है.
क्या बोले एसडीएम
बाढ़ एक प्राकृतिक आपदा है. यह कहकर नहीं आती है. बावजूद इसके प्रशासन अपनी तरफ से मुकम्मल तैयारी रखता है, ताकि जान-माल की क्षति नहीं हो. प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगातार स्थिति पर नजर रखी जाती है और जरूरत के अनुसार राहत एवं बचाव की तैयारी की जाती है. — नितेश कुमार, एसडीएम, सदर छपरा.
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