Saran News: प्रस्तावित बिहार विश्वविद्यालय अधिनियम 2026 के विरोध में गुरुवार को राजेंद्र कॉलेज परिसर में शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मियों ने प्रदर्शन किया. प्रदर्शन में फुसटाब के प्रदेश उपाध्यक्ष सह एमएलसी प्रो. वीरेंद्र नारायण यादव भी शामिल हुए. उन्होंने शिक्षकों और कर्मियों से प्रस्तावित कानून के प्रावधानों को लेकर सजग रहने का आह्वान किया.
शिक्षकों की स्वायत्तता के खिलाफ बताया प्रस्तावित कानून
एमएलसी प्रो. वीरेंद्र नारायण यादव ने कहा कि प्रस्तावित कानून शिक्षकों और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता के खिलाफ है. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक एवं प्रशासनिक स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए शिक्षकों और कर्मियों को एकजुट होकर अपनी बात रखनी चाहिए.
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित विधेयक के प्रावधानों को लेकर विश्वविद्यालय समुदाय में चिंता है. ऐसे में सभी शिक्षकों और कर्मचारियों को इसके प्रावधानों का अध्ययन कर सजग रहने की जरूरत है.
50 साल पुराने विश्वविद्यालय कानून में बदलाव की तैयारी
प्रदर्शन के दौरान बताया गया कि बिहार में विश्वविद्यालयों के संचालन के लिए लागू करीब 50 साल पुराने कानून में बदलाव की तैयारी चल रही है. सरकार की ओर से आगामी मानसून सत्र में नया विधेयक लाये जाने की तैयारी थी, लेकिन शिक्षकों और प्रतिनिधियों के दबाव के बाद फिलहाल इसे स्थगित किया गया है.
प्रस्तावित विधेयक के लागू होने पर बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 और पटना विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 की जगह बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 2026 प्रभावी होने का प्रस्ताव है.
शिक्षकों की सेवा शर्तों को लेकर भी जतायी गयी चिंता
प्रस्तावित ड्राफ्ट को लेकर प्रदर्शन में शामिल शिक्षकों ने कहा कि इसमें कॉलेज शिक्षकों की सेवा शर्तों को सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के अनुरूप किये जाने की बात सामने आ रही है. ड्राफ्ट में बदलाव नहीं होने पर कॉलेज शिक्षकों के चुनाव लड़ने और किसी राजनीतिक दल की सदस्यता लेने पर भी रोक लगने की आशंका जतायी गयी.
इसके अलावा कॉलेजों के विश्वविद्यालय से अलग होने की स्थिति में कॉलेज शिक्षकों के विश्वविद्यालय स्तर पर प्रोफेसर बनने की संभावनाओं पर भी असर पड़ने की बात कही गयी.
एक ही एक्ट के तहत आ सकते हैं राज्य के विश्वविद्यालय
प्रस्तावित कानून के अनुसार, बदलाव होने पर राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के लिए एक समान अधिनियम लागू हो सकता है. वर्तमान में अलग-अलग विश्वविद्यालयों के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं लागू हैं. हालांकि, विशेष उद्देश्य से स्थापित विशेष विश्वविद्यालयों के अपने पुराने नियमों के तहत संचालित होने की बात भी प्रस्तावित व्यवस्था में कही गयी है.
बताया गया कि राजभवन की ओर से विधेयक का प्रारंभिक ड्राफ्ट तैयार कर उच्च शिक्षा विभाग को भेजा गया है.
शिक्षक और कर्मी रहे मौजूद
मौके पर राजेंद्र कॉलेज के प्राचार्य प्रो. संजय कुमार मौजूद रहे. प्रदर्शन में एमएलसी प्रो. वीरेंद्र नारायण यादव के साथ कॉलेज शिक्षक संघ के सचिव डॉ. प्रशांत कुमार सिंह, शिक्षकेत्तर कर्मचारी संघ के हरिहर मोहन सहित कॉलेज के सभी शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मी शामिल हुए.
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