पिछले एक महीने से नदियों के जलस्तर में उतार-चढ़ाव को देखते हुए जिला प्रशासन के साथ-साथ अब नगर प्रशासन भी हरकत में आ गया है. नगर प्रशासन को डर है कि कहीं 2016 और 2025 वाली कहानी छपरा शहर में नहीं दोहरा दी जाये, तब पूरा शहर बाढ़ के पानी में डूब गया था. बहुत सारी परेशानियां उत्पन्न हुई थी. इसी को ध्यान में रखते हुए निगम प्रशासन ने जल निकासी व्यवस्था के लिए 30 मड पंप और 24 छोटे पंप की व्यवस्था कर ली है, ताकि किसी भी स्थिति से निपटा जा सके.
खनुआ और ब्रह्मपुर के स्लुइस गेट बंद किये गये
नगर प्रशासन ने एहतियातन कदम उठाते हुए सबसे पहले शहर के विभिन्न जगह पर बनाये गये स्लुइश गेट को बंद कर दिया गया है. इसकी जानकारी देते हुए दो दिन पहले महापौर ने ही बताया था कि नगर निगम क्षेत्र में पानी प्रवेश नहीं करें इसके लिए कई और सुरक्षात्मक तैयारी किया जा रहे हैं. इसे लेकर निर्णय ले लिया गया है.
नगर निगम की टेंशन का बड़ा कारण यह है -
नगर निगम प्रशासन का टेंशन का सबसे बड़ा कारण यह है कि हर दो-तीन साल पर शहर में भी बाढ़ का पानी प्रवेश कर जाता है. उदाहरण के तौर पर
- 2005 के बाद 2008 में शहर में बाढ़ का पानी घुस गया था, काफी परेशानी हुई थी. उस समय जिले के सोनपुर, दरियापुर, दिघवारा ,सदर छपरा, रेविलगंज ,मांझी व गरखा प्रखंड के 45 पंचायत के 113 गांव और 49320 आबादी के अलावा 17445 हैक्टेयर की फसल प्रभावित हुई थी .
- 2016 में तो जलस्तर इतना अधिक ऊपर गया था कि आज तक वह उच्चतम मानक है. उस समय गंगा व अन्य सहायक नदियों के जलस्तर में अत्यधिक वृद्धि हो गई थी जिसके वजह से सदर, गरखा, रिबेलगंज ,दिघवारा, दरियापुर व सोनपुर प्रखंड के 85 पंचायत के 405 गांव, 836000 की आबादी के साथ 51000 हेक्टेयर की फसल प्रभावित हुई थी. छपरा शहर में भी पानी प्रवेश कर गया था.
- 2021 में भी शहर के आसपास के इलाकों में पानी घुस गया था. जलस्तर इतना बढ़ा था कि जिले के पानापुर, तरैया, मकेर ,परसा, अमनौर, गड़खा, रिविलगंज ,सदर ,दिघवारा, दरियापुर व सोनपुर प्रखंड के 176 पंचायत के 180 गांव, 223957 आबादी के अलावा 25242 हेक्टेयर की फसल प्रभावित हो गई थी .
- 2024 की कहानी तो सभी को अभी भी याद है. उस दौरान पूरे शहर में कई दिनों तक बाढ़ का पानी डेरा जमाए हुए था. जलस्तर में इतना इजाफा था कि जिले के सदर, छपरा, रिवीलगंज, मांझी, गड़खा, दिघवारा, सोनपुर ,अमनौर ,दरियापुर मकेर, पानापुर, परसा व तरैया प्रखंड के 52 पंचायत के 122 गांव के 194035 आबादी और 4310 हेक्टेयर की फसल प्रभावित हुई थी.
2025 में दो दिन की बारिश में डूबा था शहर
साल 2025 में बाढ़ का ज्यादा असर नहीं था लेकिन तीन और चार अक्टूबर की रात हुई और अप्रत्याशित बारिश ने पूरे शहर को डुबो दिया था. नदियों के जलस्तर तो बढ़े थे इससे सोनपुर, सदर छपरा, दिघवारा, गड़खा एवं रिवील गंज प्रखंड के 28 पंचायत के 66 गांव, 184774 आबादी के अलावा 0.03285 हेक्टेयर की फसल प्रभावित हुई थी.
वर्तमान में 2026 में भी गंगा और घाघरा के जल स्तर में वृद्धि के कारण बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हुई है. अभी तक सोनपुर, छपरा सदर, दिघवारा, रिविलगंज समेत 7 प्रखंड प्रभावित हुए हैं.
इस बार भी छपरा शहर के निचले इलाकों में पानी आ चुका है. नगर निगम की निचली सड़क डूब चुकी है. अभी पूरा सितंबर महीना बाकी है और जलस्तर में उतार चढ़ाव लगातार जारी है. इन सब स्थितियों को ध्यान में रखते हुए नगर प्रशासन ने अपनी तैयारी पूरी कर ली है.
क्या बोले महापौर
महापौर लक्ष्मी नारायण गुप्ता ने बताया कि नगर निगम द्वारा पूर्व की बाढ़ की परिस्थितियों के कारण इस बार कोई रिस्क नहीं लिया गया है. पहले ही सभी सल्यूईश गेट बंद कर दिए गए हैं. यदि किसी दूसरे रास्ते से बाढ़ का पानी आता है तो उसकी निकासी के लिए 30 मड पंप और 24 छोटे पंप की व्यवस्था कर ली गई है. सभी एग्जिट प्वाइंट को दुरुस्त कराया जा रहा है.
