Saran News : पिछले तीन-चार दिनों से मानसून सक्रिय होने के बाद लगातार हो रही बारिश से किसानों के चेहरे खिल उठे हैं. हाथों में कुदाल और माथे पर धान का बिचड़ा लेकर किसान खेतों की ओर निकल पड़े हैं. पिछले एक महीने से अच्छी बारिश नहीं होने के कारण किसान धान की रोपनी को लेकर चिंतित थे, लेकिन मौसम मेहरबान होने के बाद अब वे पूरी तन्मयता के साथ खेती के कार्य में जुट गए हैं.
अनुभवी किसानों ने जताई अच्छी पैदावार की उम्मीद
कन्हौली गांव निवासी 80 वर्षीय अनुभवी किसान मदन सिंह, जो आज भी सक्रिय रूप से खेती करते हैं, ने बताया कि समय पर हुई बारिश से इस बार धान की रोपनी समय पर पूरी होने की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि यदि आगे भी मौसम का साथ मिला तो अच्छी पैदावार होगी. किसानों के अनुसार आषाढ़ माह के अंत तक धान की रोपनी सबसे उपयुक्त मानी जाती है. सबसे अधिक लाभ उन किसानों को मिल रहा है, जिन्होंने एक सप्ताह पहले पंपिंग सेट से खेत तैयार कर रोपनी शुरू कर दी थी. लगातार बारिश से पहले धूप के कारण मुरझा चुके धान के पौधे अब फिर से लहलहाने लगे हैं.
देर से बिचड़ा डालने वाले किसानों को नहीं मिला फायदा
देर से धान का बिचड़ा तैयार करने वाले किसानों को इस बारिश का पूरा लाभ नहीं मिल सका. बिचड़ा तैयार नहीं होने के कारण वे अभी रोपनी शुरू नहीं कर पाए हैं. हालांकि अनुभवी किसानों का कहना है कि यदि बारिश इसी तरह जारी रही तो बिचड़े की बढ़वार तेजी से होगी और दो-चार दिनों में सभी किसान रोपनी का कार्य शुरू कर सकेंगे.
ऊपरी खेतों के लिए भी बारिश बनी वरदान
किसानों का कहना है कि जिन ऊपरी खेतों में पानी अधिक समय तक नहीं ठहरता, उनके लिए भी यह बारिश काफी लाभदायक साबित हो रही है. ऐसे खेतों में पंपिंग सेट से सिंचाई कर धान की रोपनी करना अब आसान होगा. खेतों में पर्याप्त नमी रहने से सिंचाई के लिए कम पानी की आवश्यकता पड़ेगी, जिससे किसानों का समय, श्रम और खर्च तीनों की बचत होगी.
मक्के की फसल पर बारिश का प्रतिकूल असर
लगातार बारिश का असर मक्के की फसल पर भी देखने को मिल रहा है. पिछले एक महीने तक बारिश नहीं होने से मक्के की बुआई पिछड़ गई थी. हाल की बारिश को देखते हुए किसानों ने देर से ही सही बुआई कर दी, लेकिन अब मूसलाधार बारिश के कारण मक्के के पौधों का सही ढंग से जमाव नहीं हो पा रहा है. कई स्थानों पर बीज पानी में दब गए हैं और पौधे बाहर नहीं निकल पा रहे हैं. किसान दशरथ राय, लक्ष्मण राय और महेश राम ने बताया कि चार दिन पहले मक्के की बुआई की गई थी, लेकिन खेतों में जलजमाव होने से बीज खराब होने का खतरा बढ़ गया है. यदि पानी अधिक दिनों तक जमा रहा तो पूरी फसल प्रभावित हो सकती है.
सब्जियों का उत्पादन घटा, बाजार में बढ़े दाम
लगातार बारिश से सब्जी उत्पादक किसानों की चिंता भी बढ़ गई है. किसान मंजेलाल प्रसाद ने बताया कि लगातार बारिश के कारण करेला, नेनुआ, परवल, बैंगन समेत कई सब्जियों के फूल झड़ गए हैं, जिससे उत्पादन में कमी आई है. उत्पादन घटने के कारण अधिकांश सब्जियों की कीमतों में 4 से 5 रुपये प्रति किलोग्राम तक की बढ़ोतरी हो गई है. इससे उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है.
अगले कुछ दिनों तक बारिश के आसार
मौसम विभाग के अनुसार मानसून सक्रिय बना हुआ है और प्रदेश में अगले दो से तीन दिनों तक रुक-रुक कर बारिश होने की संभावना है. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति धान की खेती के लिए लाभदायक रहेगी, जबकि जलनिकासी नहीं होने पर मक्का और सब्जियों की फसल को नुकसान होने की आशंका बनी रहेगी.
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