Gandak River Erosion: मकेर प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत हसनपुरा गांव के समीप गंडक नदी के पुराने रिटायर बांध पर भीषण कटाव जारी है. नदी के ऊपरी हिस्से में दरारें आने से आसपास के ग्रामीणों में किसी अनहोनी को लेकर भारी दहशत व्याप्त है. ग्रामीणों का कहना है कि वे रात-रात भर जागकर बांध की निगरानी करने को मजबूर हैं.
कटाव की सूचना के बाद गंडक विभाग द्वारा बांस, पेड़ की डालियों और गन्नी बैग के माध्यम से कटाव रोधी अस्थायी कार्य शुरू कराया गया है, लेकिन ग्रामीण इस कार्य से पूरी तरह असंतुष्ट हैं. स्थानीय लोगों का आरोप है कि पानी का दबाव बढ़ते ही नदी का कटाव और तेज हो गया है, जिससे बांध टूटने की गंभीर आशंका बनी हुई है.
1.35 करोड़ की लागत के बावजूद काम की गुणवत्ता पर उठे सवाल
ग्रामीणों ने बताया कि हाल ही में 1.35 करोड़ रुपये की लागत से कटाव निरोधक कार्य कराया गया था. इसके बावजूद पिछले दस दिनों से लगातार कटाव जारी है. ग्रामीणों का कहना है कि सूचना देने के बावजूद विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का मौके पर नहीं पहुंचना अधिकारियों की उदासीनता को दर्शाता है.
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कनीय अभियंता संजीव कुमार के नेतृत्व में कराये जा रहे काम की गुणवत्ता ठीक नहीं है. ग्रामीणों ने प्रशासन से कटाव रोधी कार्य को गुणवत्तापूर्ण तरीके से कराने की मांग की है.
ग्रामीणों ने रखीं ये प्रमुख मांगें
गांव के रामजी सिंह, मुकेश मांझी, रणधीर सिंह, मुक्तिनाथ सिंह, तेरस मांझी, गोलू मांझी, शैलेंद्र सिंह, मिथिलेश सिंह, आकाश सिंह, साहेब सिंह, कृष्णनंदन सिंह और विभूति प्रसाद सिंह समेत अन्य ग्रामीणों ने प्रशासन से गंडक नदी में बेड बार बनाने और बंद जलधारा को तुरंत खोलने की मांग की है.
ग्रामीणों ने स्लोप खत्म होने वाले संवेदनशील स्थानों पर एच-कैरेटी, बल्ला पाइलिंग और पाइलिंग का काम कराने की भी मांग की है. तात्कालिक सुरक्षा के लिए एनसी बैग और हाथी पांव के माध्यम से बांध को मजबूती प्रदान करने की मांग भी रखी गयी है.
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि जल्द से जल्द पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण ढंग से कटाव रोधी कार्य शुरू नहीं किया गया, तो हसनपुरा सहित आसपास के कई गांव बाढ़ के मुहाने पर आ जायेंगे.
