Saran News : बनियापुर प्रखंड क्षेत्र में स्वच्छता अभियान के तहत करोड़ों रुपये खर्च कर हजारों जरूरतमंद परिवारों के घर शौचालय बनवाये गये. सरकार की ओर से शौचालय निर्माण के लिए लाभुकों को राशि भी उपलब्ध करायी गयी, ताकि लोगों को खुले में शौच से मुक्ति मिल सके. लेकिन निर्माण के करीब सात-आठ साल बाद इनमें से कई शौचालय रखरखाव और मरम्मत के अभाव में जर्जर हो चुके हैं. कई जगह शौचालय उपयोग के लायक नहीं रह गये हैं. ऐसे में लोग दोबारा खुले में शौच करने को विवश हो रहे हैं.
बनियापुर प्रखंड को करीब पांच वर्ष पहले ओडीएफ घोषित किया जा चुका है. इसके बावजूद वर्तमान स्थिति स्वच्छता अभियान के दावों पर सवाल खड़े कर रही है. प्रखंड के कई इलाकों में सड़क किनारे खुले में शौच की प्रवृत्ति बढ़ने की बात सामने आ रही है.
लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत मिले थे 12 हजार रुपये
सरकार की पहल पर लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के तहत प्रखंड के विभिन्न पंचायतों में जरूरतमंद परिवारों को शौचालय निर्माण के लिए प्रति लाभुक 12 हजार रुपये की सहायता राशि दी गयी थी. इसका उद्देश्य था कि लाभुक अपनी सुविधा के अनुसार चयनित स्थल पर शौचालय का निर्माण कर उसका नियमित उपयोग करें और खुले में शौच से पूरी तरह मुक्ति मिले.
शुरुआत में बड़ी संख्या में परिवारों ने शौचालय का निर्माण कराया और इसका इस्तेमाल भी किया. लेकिन समय बीतने के साथ शौचालयों के रखरखाव और मरम्मत की व्यवस्था पर ध्यान नहीं दिया गया. नतीजतन कई शौचालय अब बदहाल स्थिति में पहुंच गये हैं.
कन्हौली संग्राम और अमाव में जर्जर मिले शौचालय
शौचालयों की स्थिति की पड़ताल के दौरान सरेया पंचायत के कन्हौली संग्राम, अमाव सहित कई गांवों में बदहाली सामने आयी. कई शौचालयों की सीट में दरार आ गयी है, जबकि कहीं दरवाजे टूट चुके हैं. कुछ शौचालयों के आसपास खरपतवार उग आये हैं.
लंबे समय से मरम्मत नहीं होने के कारण कई शौचालय अब उपयोग रहित हो चुके हैं. लाभुकों का कहना है कि यदि इन शौचालयों की सामान्य मरम्मत करा दी जाये, तो इन्हें दोबारा इस्तेमाल में लाया जा सकता है.
निर्माण के बाद देखने तक नहीं पहुंचे अधिकारी और जनप्रतिनिधि
लाभुकों का आरोप है कि शौचालय निर्माण के बाद से इसकी स्थिति की नियमित जांच के लिए कोई अधिकारी या स्थानीय जनप्रतिनिधि नहीं पहुंचे. रखरखाव की व्यवस्था नहीं होने के कारण धीरे-धीरे शौचालय जर्जर होते गये.
लाभुकों का कहना है कि केवल शौचालय का निर्माण करा देने से स्वच्छता का उद्देश्य पूरा नहीं हो सकता. उसके रखरखाव और नियमित उपयोग पर भी निगरानी जरूरी है. यदि पुराने और खराब हो चुके शौचालयों की मरम्मत करा दी जाये, तो लोगों को दोबारा खुले में शौच करने की जरूरत नहीं पड़ेगी.
स्वच्छताग्रही और प्रखंड स्तर पर भी निगरानी का सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि शौचालयों की स्थिति पर प्रखंड स्वच्छता समन्वयक और पंचायत स्तर पर स्वच्छताग्रही के माध्यम से भी निगरानी की जानी चाहिए. कई शौचालय लंबे समय से खराब पड़े हैं, लेकिन उनकी मरम्मत को लेकर अब तक ठोस पहल नहीं हुई है.
ग्रामीणों ने संबंधित विभाग और पंचायत प्रतिनिधियों से खराब शौचालयों का सर्वे कराने, उनकी मरम्मत कराने और नियमित निगरानी की व्यवस्था करने की मांग की है, ताकि बनियापुर को मिला ओडीएफ का दर्जा केवल कागजों तक सीमित न रह जाये.
