बर्ड फ्लू को लेकर गोपालगंज में हाइ अलर्ट, मुर्गी फार्म से लेकर अन्य पक्षियों पर रखी जा रही पैनी नजर

पड़ोसी जिला बेतिया में एवियन इन्फ्लूएंजा (बर्ड फ्लू) फैलने की पुष्टि होने के बाद गोपालगंज जिले में भी हाई अलर्ट जारी किया गया है.

गोपालगंज. पड़ोसी जिला बेतिया में एवियन इन्फ्लूएंजा (बर्ड फ्लू) फैलने की पुष्टि होने के बाद गोपालगंज जिले में भी हाई अलर्ट जारी किया गया है. बेतिया के पक्षियों के आसानी से जिले में आने की संभावना को देखते हुए जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ अशोक कुमार सिंह ने शनिवार को सभी अस्पतालों के प्रभारी डॉक्टरों की बैठक की.

बैठक में डॉक्टरों को निर्देश दिया गया कि अगर किसी इलाके में पक्षियों कबूतर, कौआ, मुर्गा, मुर्गी की अचानक मौत होती है तो तुरंत नमूने लेकर जांच के लिए पटना भेजें. मुर्गियों में बर्ड फ्लू जैसे लक्षण दिखने पर फार्म संचालक संबंधित प्रखंड के पशुपालन पदाधिकारी को तुरंत सूचना दें. डॉ सिंह ने बताया कि अभी तक गोपालगंज में कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन जिले को संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि यह यूपी के देवरिया, कुशीनगर और बिहार के बेतिया, पूर्वी चंपारण, मुजफ्फरपुर, सारण व सीवान से घिरा हुआ है.

जिले में पोल्ट्री की स्थिति

मुर्गी फॉर्म की संख्या -210

अंडा लेयर फॉर्मिंग- 186मुर्गा की दुकानें- 590

बर्ड फ्लू के लक्षण को भी समझे

बर्ड फ्लू वायरस से संक्रमित लोगों में लक्षण न के बराबर या हल्के हो सकते हैं. लक्षण दिखने पर वे मौसमी फ्लू के समान हो सकते हैं. बुखार, खांसी, थकान, मांसपेशियों में दर्द, गला खराब होना, सांस लेने में कठिनाई, बहती नाक, सिरदर्द व दस्त इसके अलावा, बर्ड फ्लू से पीड़ित कुछ लोगों में कंजंक्टिवाइटिस (आंखों का लाल होना, उनमें दर्द होना या उनसे पानी आना) विकसित हो जाता है. गंभीर मामलों में निमोनिया, एन्सेफलाइटिस (मस्तिष्क को प्रभावित करने वाला संक्रमण) और यहां तक कि मृत्यु भी हो सकती है.

ऐसे फैलता है बर्ड फ्लू

-संक्रमित पक्षियों या अन्य संक्रमित जानवरों के साथ सीधा संपर्क-संक्रमित पक्षियों या अन्य संक्रमित जानवरों या उनके मल या स्राव से दूषित वातावरण, सतहों या वस्तुओं के संपर्क में आना-बर्ड फ्लू वायरस से दूषित धूल में सांस लेना- उच्च जोखिम वाली गतिविधियों में संक्रमित पक्षियों और अन्य संक्रमित जानवरों का वध करना- उनके पंख हटाना, मांस काटना और उन्हें पकाने की तैयारी करना शामिल

बर्ड फ्लू से बचाव के उपाय को भी जाने

-पोल्ट्री फार्मों और जीवित पक्षियों या जानवरों के गीले बाजारों से बचें.-कच्चे मुर्गी उत्पादों को छूने के बाद अपने हाथों को साबुन और पानी से अच्छी तरह धोएं.

– कच्चे पोल्ट्री उत्पादों को छूने के बाद अपनी आंखों, नाक और मुंह को छूने से बचें. –कच्चे मुर्गे को छूने के बाद रसोई और खाना पकाने के बर्तनों को अच्छी तरह से धो लें.

-खाने से पहले यह सुनिश्चित करें कि मुर्गी और मुर्गी से बने उत्पाद (जैसे अंडे) अच्छी तरह से पके हुए हों.

अफवाह में ना पड़े, बर्ड फ्लू का कोई असर नहीं

विशेषज्ञ डॉ विनोद कुमार ने कहा कि जब चिकेन को हम सौ डिग्री तापमान में पकाते है तो उसमें फ्लू का असर नहीं होता. घबराने व अफवाहों में पड़ने की जरूरत नहीं है. हम कच्चा मांस नहीं खाते. इसलिए खतरा भी नहीं है.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Alok kumar

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
और पढ़ें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >