सारण में बाढ़ के बीच नदियों ने दिखाई नरमी, सरयू का जलस्तर 3 सेंटीमीटर घटा, गंडक ने बढ़ाई चिंता

छपरा में गंगा और सरयू नदी के जलस्तर में गिरावट से लोगों को राहत मिली है। जिलाधिकारी ने सभी अनुमंडलों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं।

Saran flood water level : सारण में बाढ़ की स्थिति के बीच सोमवार को नदियों के जलस्तर ने प्रशासन को कुछ राहत दी तो कुछ चिंता भी बढ़ायी. छपरा के पास घाघरा यानी सरयू नदी का जलस्तर तीन सेंटीमीटर घटा है. वहीं गंडक रेवा घाट में लगातार कमी के बाद एक सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज की गयी. गंगा के जलस्तर बढ़ने की रफ्तार भी कम हुई है. प्रशासन ने सभी अनुमंडलों को अलर्ट मोड में रखा है.

सरयू के घटते जलस्तर से छपरा को मिली राहत

छपरा मुख्यालय के आसपास बाढ़ की स्थिति के बीच सबसे बड़ी राहत घाघरा यानी सरयू नदी के जलस्तर में आयी कमी है. सोमवार की सुबह नदी का जलस्तर तीन सेंटीमीटर नीचे आया. पिछले कई दिनों से यहां लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही थी, ऐसे में अचानक कमी को प्रशासन के लिए राहत के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है.

जलस्तर का निरीक्षण करते बाढ़ प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता

गंगा बढ़ रही है, लेकिन रफ्तार हुई कम

गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर अभी भी खतरे के निशान से ऊपर है. यहां खतरे का निशान 48.60 मीटर है, जबकि 24 अगस्त की सुबह छह बजे जलस्तर 49.57 मीटर दर्ज किया गया. हालांकि पहले जहां 15 से 30 सेंटीमीटर तक बढ़ोतरी हो रही थी, वहीं सोमवार को वृद्धि केवल तीन सेंटीमीटर रही. बढ़ने की रफ्तार में कमी प्रशासन के लिए राहत की बात है.

गंडक रेवा घाट ने बढ़ायी चिंता

गंडक रेवा घाट पर पिछले कई दिनों से जलस्तर में लगातार कमी दर्ज की जा रही थी. सोमवार को यहां एक सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की गयी. खतरे का निशान 54.41 मीटर है, जबकि वर्तमान जलस्तर 53.35 मीटर बताया गया है. लगातार घट रहे जलस्तर के बीच अचानक वृद्धि ने प्रशासन को सतर्क कर दिया है.

सिसवन में खतरे के निशान के करीब पहुंची घाघरा

सिसवन में घाघरा नदी का जलस्तर भी चिंता का कारण बना हुआ है. यहां खतरे का निशान 57.04 मीटर है और जलस्तर 56.74 मीटर तक पहुंच गया है. ऐसे में नदी का जलस्तर खतरे के निशान से महज कुछ दूरी पर है. प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है.

बिंद टोली के डूबे घर

हाजीपुर में भी गंडक का जलस्तर बढ़ा

गंडक नदी के हाजीपुर घाट पर खतरे का निशान 50.32 मीटर निर्धारित है. वर्तमान जलस्तर 49.62 मीटर दर्ज किया गया है. रिपोर्ट के अनुसार यहां जलस्तर में नौ सेंटीमीटर की बढ़ोतरी हुई है. इससे नदी के आसपास के इलाकों में प्रशासन की निगरानी और महत्वपूर्ण हो गयी है.

बारिश हुई तो तेजी से बढ़ सकता है पानी

बाढ़ की स्थिति पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों के अनुसार यदि आने वाले दिनों में क्षेत्र में अच्छी बारिश होती है, तो नदियों के जलस्तर में फिर तेज वृद्धि हो सकती है. यही वजह है कि मौजूदा कमी को स्थायी राहत मानने के बजाय प्रशासन एहतियात बरत रहा है.

डीएम ने सभी अनुमंडलों को अलर्ट मोड में रहने का दिया आदेश

जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने जिले के सभी अनुमंडलों को अलर्ट मोड में रहने का निर्देश दिया है. प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित और संवेदनशील इलाकों में लगातार निगरानी की जा रही है. सुरक्षात्मक और राहत-बचाव से जुड़ी तैयारियों को भी सक्रिय रखा गया है.

बाढ़ राहत की जिम्मेदारी अधिकारियों को सौंपी गयी

बाढ़ की स्थिति में जिलास्तर पर अपर समाहर्त्ता, अनुमंडल स्तर पर संबंधित अनुमंडल पदाधिकारी और प्रखंड स्तर पर अंचल अधिकारी राहत एवं बचाव कार्यों की जिम्मेदारी संभालेंगे. अपर समाहर्त्ता इंजीनियर मुकेश कुमार को पूरे जिले में राहत कार्यों का वरीय प्रभारी बनाया गया है.

प्रशिक्षित गोताखोरों की हुई तैनाती

बाढ़ आपदा और नाव दुर्घटना की स्थिति में लोगों को डूबने से बचाने तथा डूबे लोगों के शव बरामद करने के लिए प्रशिक्षित गोताखोरों को अलग-अलग स्थानों पर तैनात किया गया है. गोताखोरों को राहत और बचाव से संबंधित जरूरी किट भी उपलब्ध करायी गयी है. उनकी सूची मोबाइल नंबर के साथ जिला नियंत्रण कक्ष में उपलब्ध करायी गयी है.

स्थानीय समुदाय को भी दिया गया प्रशिक्षण

आपदा के समय स्थानीय लोग सबसे पहले मदद के लिए पहुंचते हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए बाढ़ प्रभावित प्रखंडों की पंचायतों और विशेष रूप से कमजोर वर्गों के युवाओं को राहत एवं बचाव कार्यों के लिए प्रशिक्षित किया गया है. अनुसूचित जाति टोलों से भी युवाओं का चयन कर उन्हें प्रशिक्षण दिया गया है.

जिला और अनुमंडल स्तर पर कंट्रोल रूम सक्रिय

सारण जिला मुख्यालय के अलावा सभी अनुमंडलों और अंचलों में नियंत्रण कक्ष स्थापित किए गए हैं. आपदा प्रबंधन का आपातकालीन संचालन केंद्र जिला नियंत्रण कक्ष के रूप में काम कर रहा है. दूरभाष संख्या 06152-245023 पर तीन शिफ्ट में अधिकारियों और कर्मियों की तैनाती की गयी है.

रिविलगंज और साहेबगंज में बाढ़ का असर

रिविलगंज प्रखंड के जान टोला और साहेबगंज सीढ़ी घाट के पास बाढ़ का असर दिखाई दे रहा है. कुछ घरों के आसपास पानी पहुंच गया है. स्थानीय लोग भी स्थिति का जायजा लेने पहुंच रहे हैं. संवेदनशील इलाकों में प्रशासन की निगरानी जारी है.

अधिकारी बोले, बढ़ोतरी की रफ्तार कम होना राहत

बाढ़ प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता संतोष प्रभाकर ने बताया कि रेवा घाट पर गंडक के जलस्तर में एक सेंटीमीटर की वृद्धि हुई है, जबकि छपरा में घाघरा नदी के जलस्तर में तीन सेंटीमीटर की कमी दर्ज की गयी है. उन्होंने कहा कि अन्य घाटों पर जलस्तर बढ़ रहा है, लेकिन बढ़ोतरी की रफ्तार लगातार कम हो रही है. विभाग पूरी तरह अलर्ट है और जिलाधिकारी के निर्देश के अनुसार तैयारियों में कोई कमी नहीं रखी जा रही है.

24 अगस्त को सारण की नदियों का जलस्तर

नदी और स्थानखतरे का निशानवर्तमान जलस्तर24 अगस्त की स्थिति
गंगा, गांधी घाट48.60 मीटर49.57 मीटर3 सेमी वृद्धि
गंडक, हाजीपुर50.32 मीटर49.62 मीटर9 सेमी वृद्धि
गंडक, रेवा54.41 मीटर53.35 मीटर1 सेमी वृद्धि
सरयू/घाघरा, सिसवन57.04 मीटर56.74 मीटर6 सेमी वृद्धि
घाघरा, छपरा53.68 मीटर52.07 मीटर3 सेमी कमी


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By संजय भारद्वाज

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