Saran News : (संजय भारद्वाज) जिले के नागरिकों को सुलभ, पारदर्शी और उत्कृष्ट स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है. इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उक्त बातें जिला पदाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने स्वास्थ्य विभाग के कार्यों की समीक्षा करने के दौरान कहीं. समीक्षा के क्रम में अपने कार्यों में लापरवाही बढ़ाने वाले कई कर्मियों और पदाधिकारी पर कार्रवाई भी की.
7 प्रखंडों के चिकित्सा पदाधिकारी से स्पष्टीकरण
बैठक में बिंदुवार समीक्षा के दौरान पाया गया कि जिले में पूर्ण टीकाकरण का औसत 91 प्रतिशत है. हालांकि, जिले के 7 प्रखंडों सोनपुर, नगरा, लहलादपुर, जलालपुर, मशरख, परसा एवं तरैया में टीकाकरण की उपलब्धि 90 प्रतिशत से भी कम दर्ज की गई है. इस पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए जिला पदाधिकारी ने इन सभी सात प्रखंडों के चिकित्सा पदाधिकारियों से कम उपलब्धि का कारण पूछते हुए प्रदर्शन सुधारने का स्पष्ट निदेश दिया. एचपीवी टीकाकरण अभियान की समीक्षा में पाया गया कि निर्धारित लक्ष्य 45,285 के सापेक्ष अब तक 35,409 बालिकाओं का सफल टीकाकरण किया जा चुका है. जिला पदाधिकारी ने निर्देश दिया कि छूटे हुए बच्चों को कवर करने के लिए स्कूलों के साथ मिलकर विशेष समन्वय बैठकें आयोजित की जाएं, ताकि शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल हो सके.
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत 99 बच्चों को राहत देने की तैयारी
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण की समीक्षा की गई. 01 अप्रैल से 19 मई की अवधि में 99 सर्जिकल मामलों की पहचान कर उन्हें संदर्भित किया गया, जिनमें कंजेनिटल हार्ट डिजीज के 39 मामले शामिल हैं. जिलाधिकारी ने इन सभी मामलों का निरंतर फॉलो अप सुनिश्चित करने का निदेश दिया.
ऑनलाइन रिपोर्टिंग व स्वास्थ्य सूचकांक में बेहतर प्रदर्शन
समीक्षा के दौरान ऑनलाइन कार्यों की सराहना की गई. जिले में मेडिको-लीगल इंजरी रिपोर्ट शत-प्रतिशत ऑनलाइन पाई गई. साथ ही 236 पोस्टमार्टम केसेस भी पूरी तरह ऑनलाइन दर्ज किए गए. भव्या की समीक्षा में पाया गया कि जिले ने 99.4% स्कोर प्राप्त कर राज्य में 5वां स्थान हासिल किया है.
प्रसव पूर्व पंजीकरण में कमी पर नराजगी जताई
समीक्षा में यह बात सामने आई कि जिले में महिलाओं के प्रसव पूर्व पंजीकरण के अनुपात में सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में केवल 3,782 संस्थागत प्रसव ही दर्ज किए गए. जिला पदाधिकारी ने इस बड़े अंतर पर गहरी चिंता जताई. उन्होंने निर्देश दिया कि जो भी प्रसव निजी अस्पतालों या घरों में हुए हैं, उनकी ट्रैकिंग की जाए, इसके लिए आशा कार्यकर्ताओं को चिन्हित करते हुए उनकी जवाबदेही तय करने का कड़ा निर्देश दिया गया.
अस्पतालों की व्यवस्था सुधारने और नियमित ऑडिट के निर्देश
जिला पदाधिकारी ने स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों की बुनियादी सुविधाओं में सुधार करने पर विशेष बल दिया. उन्होंने निर्देश दिया कि जिला अस्पताल और अनुमंडलीय अस्पतालों में जीविका द्वारा की जा रही साफ-सफाई की व्यवस्था की नियमित निगरानी के लिए जिला कार्यक्रम प्रबंधक जीविका महीने में कम से कम एक बार अनिवार्य रूप से अस्पतालों का औचक निरीक्ष करेंगे. साथ ही संबंधित प्रखंड परियोजना प्रबंधक जीविका सप्ताह में एक बार अस्पताल का दौरा करेंगे और वहां के कार्यों एवं सफाई व्यवस्था का गहन ऑडिट सुनिश्चित करेंगे.
बैठक में ये रहे मौजूद
बैठक में उप विकास आयुक्त, सिविल सर्जन, सभी जिला स्तरीय चिकित्सा पदाधिकारी, सभी प्रखंडों के चिकित्सा पदाधिकारी, प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक, प्रखंड सामुदायिक उत्प्रेरक, सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि एवं अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे.
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