Saran News : सारण जिले के लहलादपुर प्रखंड क्षेत्र के दंदासपुर (जनता बाजार) स्थित बाबा ढोंढ़नाथ मंदिर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का प्रमुख केंद्र है. इस मंदिर में सिर्फ सारण ही नहीं, बल्कि बिहार के विभिन्न जिलों के अलावा उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों से श्रद्धालु जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं. श्रावण मास में यहां शिवभक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है.
सच्ची श्रद्धा से मांगी गई हर मनोकामना होती है पूरी
स्थानीय लोगों के अनुसार, जो भी श्रद्धालु सच्ची श्रद्धा, आस्था और पूर्ण विश्वास के साथ बाबा ढोंढ़नाथ से अपनी मनोकामना मांगता है, उसकी इच्छा अवश्य पूरी होती है. यही मान्यता इस मंदिर को दूर-दूर तक प्रसिद्ध बनाती है. हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपनी मनोकामना लेकर यहां पहुंचते हैं और जलाभिषेक कर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.
श्रावणी मेले में प्रशासन रहता है पूरी तरह मुस्तैद
मंदिर समिति से जुड़े सदस्यों ने बताया कि श्रावण मास में यहां श्रद्धालुओं की अपार भीड़ उमड़ती है. भीड़ को व्यवस्थित रखने और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अंचलाधिकारी (सीओ), प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) और थानाध्यक्ष सहित प्रशासनिक अधिकारी पूरी तरह सतर्क रहते हैं. मेला अवधि में सुरक्षा, यातायात और अन्य व्यवस्थाओं पर विशेष निगरानी रखी जाती है.
स्थानीय लोगों ने बताई मंदिर की विशेष मान्यता
स्थानीय निवासी डॉ. राजेश रंजन और मनोज मिश्र ने बताया कि बाबा ढोंढ़नाथ की पूजा-अर्चना करने से श्रद्धालुओं की हर मनोकामना पूर्ण होती है. यही कारण है कि वर्षभर यहां श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है, जबकि श्रावण मास में भक्तों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है.
राजा श्रीधर शाही ने कराया था मंदिर का भव्य निर्माण
जानकारों के अनुसार, मांझागढ़ के राजा श्रीधर शाही ने पुत्र प्राप्ति की खुशी में इस मंदिर का भव्य निर्माण कराया था. इससे पहले इस स्थान पर ढोंढ़ा साह नामक एक व्यवसायी ने एक छोटा मंदिर बनवाया था. यह मंदिर गंडकी नदी के दक्षिणी तट पर स्थित है.
शिवलिंग मिलने के बाद हुई मंदिर की स्थापना
स्थानीय मान्यता के अनुसार, ढोंढ़ा साह गंडकी नदी के रास्ते नाव से व्यापार करने जाया करते थे. एक बार उनकी नाव नदी में एक पत्थर से टकराकर फंस गई. बाद में पता चला कि वह एक शिवलिंग था. उसी रात भगवान शिव ने उन्हें स्वप्न में दर्शन देकर मंदिर निर्माण का निर्देश दिया और मनोकामना पूर्ण होने का आशीर्वाद दिया. इसके बाद ढोंढ़ा साह ने वहां मंदिर का निर्माण कराया, जो समय के साथ बाबा ढोंढ़नाथ धाम के रूप में प्रसिद्ध हो गया.
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