कभी उत्तर बिहार की शान थी छपरा की कपड़ा मंडी, अब 20 साल से बंद पड़ी है कमिटी, जानिए वजह

Chapra Cloth Market : कभी उत्तर बिहार का कपड़ा व्यापार केंद्र रही छपरा की मंडी आज चुनौतियों का सामना कर रही है. घटते कारोबार और पुरानी कमेटी की निष्क्रियता ने व्यापारियों को प्रभावित किया है. जानिए क्या है इस ऐतिहासिक मंडी के भविष्य की तैयारी.

Chapra Cloth Market : छपरा की कपड़ा मंडी का इतिहास लगभग एक शताब्दी पुराना है. एक समय यह उत्तर बिहार के सबसे प्रमुख थोक कपड़ा बाजारों में गिनी जाती थी. सारण के अलावा सीवान, गोपालगंज और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों के व्यापारी भी यहीं से कपड़े की खरीदारी करते थे. बाजार के संचालन और व्यापारियों की समस्याओं के समाधान के लिए श्री कपड़ा कमेटी का गठन भी किया गया था.

20 वर्षों से निष्क्रिय है कपड़ा कमिटी

व्यापारियों के अनुसार छपरा के पूर्वी और पश्चिमी बाजार में करीब 100 थोक और 450 से अधिक खुदरा कपड़ा दुकानें हैं. जिले के कुल व्यापार का लगभग 25 प्रतिशत कारोबार इसी मंडी से जुड़ा माना जाता है. हालांकि कमजोर नेतृत्व और समयाभाव के कारण कपड़ा कमिटी पिछले करीब 20 वर्षों से निष्क्रिय पड़ी है. इससे व्यापारियों के सामने अपनी समस्याएं रखने का कोई प्रभावी मंच नहीं बचा है.

बदलते बाजार ने घटाई स्थानीय कारोबार की रफ्तार

व्यापारियों का कहना है कि पहले छोटे दुकानदार स्थानीय थोक कारोबारियों से ही कपड़ा खरीदते थे. लेकिन पिछले कुछ वर्षों में कानपुर की कपड़ा इंडस्ट्री ने बाजार में मजबूत पकड़ बना ली है. वहां आसान क्रेडिट व्यवस्था मिलने के कारण कई छोटे व्यापारी सीधे कानपुर से माल खरीदने लगे हैं. वहीं बेहतर सड़क संपर्क के कारण पटना और मुजफ्फरपुर की मंडियों से भी सीधे खरीदारी बढ़ी है, जिससे छपरा के थोक कारोबार पर असर पड़ा है.

रेडीमेड फैशन ने बदली बाजार की तस्वीर

एक समय छपरा कपड़ा मंडी टेरिरुबिया कपड़े और बनारसी साड़ियों की बिक्री के लिए प्रसिद्ध थी. 90 के दशक तक इनकी भारी मांग रहती थी. लेकिन समय के साथ डिजाइनर साड़ियों, रेडीमेड परिधानों, जींस, फैंसी शर्ट और मॉल संस्कृति के विस्तार ने पारंपरिक कपड़ा कारोबार को प्रभावित किया. इसके बावजूद कई पुराने व्यापारियों ने समय के साथ अपनी दुकानों को आधुनिक शोरूम में बदलकर रेडीमेड परिधानों की बिक्री भी शुरू कर दी.

संगठन को फिर सक्रिय करने की तैयारी

श्री कपड़ा कमेटी के सदस्य एवं थोक कपड़ा व्यवसायी श्याम बिहारी अग्रवाल ने बताया कि कपड़ा कमेटी को दोबारा व्यवस्थित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है. कमेटी के भवन का रखरखाव कराया जाएगा और व्यापारियों को फिर से संगठित किया जा रहा है. उनका कहना है कि नई व्यवस्था के साथ जल्द ही कमेटी का संचालन फिर शुरू करने का प्रयास किया जाएगा.

कारोबार के सामने कौन-कौन सी चुनौतियां

व्यापारियों के अनुसार कपड़ा व्यवसाय के सामने मजबूत संगठन का अभाव, क्रेडिट लेनदेन के स्पष्ट नियम नहीं होना, स्थानीय स्तर पर व्यापार संबंधी कानून का अभाव और राज्य व्यावसायिक आयोग का गठन नहीं होना जैसी कई समस्याएं हैं. उनका मानना है कि इन मुद्दों पर ठोस पहल से व्यापार को नई गति मिल सकती है.

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By प्रभात किरण हिमांशु

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