सारण: एकमा में अवैध मिनी दवा फैक्ट्री पर DCGI की छापेमारी, 1 लाख से अधिक की दवाएं जब्त

सारण जिले में एक अवैध मिनी दवा फैक्ट्री का भंडाफोड़ हुआ है। केंद्रीय टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 1 लाख रुपये से अधिक की एलोपैथिक दवाएं और हजारों की आयुर्वेदिक दवाएं जब्त की हैं। जांच में आयुर्वेदिक दवाओं में एलोपैथिक दवाएं मिलाने का खुलासा हुआ है।

Saran News: भारतीय औषधि नियंत्रक जनरल (DCGI) की केंद्रीय टीम ने सारण जिले के एकमा थाना क्षेत्र में संचालित एक अवैध मिनी दवा फैक्ट्री पर बड़ी कार्रवाई करते हुए एक लाख रुपये से अधिक की एलोपैथिक दवाएं और हजारों रुपये की बिना लेबल वाली आयुर्वेदिक दवाएं जब्त की हैं. जांच के दौरान यह भी खुलासा हुआ कि आयुर्वेदिक दवाओं में एलोपैथिक दवाएं मिलाकर तैयार किया जा रहा था. मामले में एकमा थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है.

शिकायत मिलने के बाद हुई छापेमारी

औषधि निरीक्षक कुंदन कुमार केसरी ने बताया कि भारतीय औषधि नियंत्रक जनरल (DCGI) को शिकायत मिली थी कि एकमा प्रखंड के मानिकपुर फुचती खुर्द गांव के दो निजी मकानों में अवैध रूप से दवा निर्माण किया जा रहा है. शिकायत के बाद केंद्रीय ड्रग इंस्पेक्टर सुमंत कुमार घोष के नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीम ने छापेमारी की. टीम में आयुर्वेदिक इंस्पेक्टर इंद्रकांत कुमार और छपरा के औषधि निरीक्षक कुंदन कुमार केसरी भी शामिल थे.

बिना लाइसेंस बन रही थीं दवाएं

छापेमारी के दौरान अनिरुद्ध शर्मा, देवेंद्र शर्मा और गोपाल शर्मा के घरों से 13 प्रकार की एलोपैथिक दवाएं तथा बड़ी मात्रा में नव निर्मित आयुर्वेदिक दवाएं बरामद की गईं. जांच में पाया गया कि दवा निर्माण के लिए कोई वैध लाइसेंस नहीं था और न ही खरीदी गई दवाओं से संबंधित बिल उपलब्ध थे.

आयुर्वेदिक दवाओं में मिलाई जा रही थीं एलोपैथिक दवाएं

पूछताछ के दौरान टीम को जानकारी मिली कि आयुर्वेदिक दवाओं में एलोपैथिक दवाएं मिलाई जाती थीं, ताकि दवा का असर जल्दी दिखाई दे. अधिकारियों के अनुसार यह न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी बेहद खतरनाक हो सकता है. जांच में यह भी पाया गया कि कई आयुर्वेदिक दवाओं पर किसी प्रकार का लेबल नहीं लगा था.

बीडीसीएल में होगी दवाओं की जांच

ड्रग इंस्पेक्टर कुंदन कुमार केसरी ने बताया कि बरामद दवाओं के सैंपल लेकर उन्हें बीडीसीएल (BDCL) प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा गया है. जांच रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि दवाओं में किन रसायनों का उपयोग किया गया था और वे कितनी सुरक्षित हैं. रिपोर्ट आने के बाद संबंधित लोगों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

एक लाख से अधिक की दवाएं बरामद

छापेमारी के दौरान बरामद एलोपैथिक दवाओं की कीमत एक लाख रुपये से अधिक आंकी गई है. वहीं बिना लेबल वाली आयुर्वेदिक दवाओं का मूल्यांकन अभी किया जा रहा है. औषधि विभाग का कहना है कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट सहित अन्य प्रासंगिक धाराओं में कार्रवाई की जाएगी.

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Author: Sanjay Bhardawaj

Published by: Vivek Ranjan

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