बजट को किसी ने सराहा तो किसी ने नकारा

छपरा : वित्त मंत्री अरूण जेटली ने गुरूवार को संसद में सत्र 2018-19 का आम बजट पेश किया. एनडीए सरकार के चौथे व देश के 88 वे इस पूर्ण बजट से देश के आम नागरिकों को बहुत सारी उम्मीदें थी. लोग अपनी मिली जुली प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं. कुछ को लगता है कि राहत नहीं […]

छपरा : वित्त मंत्री अरूण जेटली ने गुरूवार को संसद में सत्र 2018-19 का आम बजट पेश किया. एनडीए सरकार के चौथे व देश के 88 वे इस पूर्ण बजट से देश के आम नागरिकों को बहुत सारी उम्मीदें थी. लोग अपनी मिली जुली प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं. कुछ को लगता है कि राहत नहीं मिल पायी है और यह किसी भी नजरिये से लोकलुभावन नहीं रहा है तो वहीं कुछ इसे एक संतुलित बजट बता रहे हैं. हालांकि वित्त मंत्री अपने बजट भाषण में किसान, गरीब, युवा, गृहिणी व उद्यमी सबको खुश करते नजर आये. शहर के विभिन्न क्षेत्र से जुड़े लोगों ने अपनी अलग-अलग राय रखी. आवश्यकता की वस्तु बन चुके मोबाइल व टीवी के दाम बढ़ने से जहां उन्हें निराशा हाथ लगी.

वहीं वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने की योजना पर प्रसन्नता जतायी. शिक्षा, स्वास्थ्य, रेल, सड़क व वरिष्ठ नागरिकों तथा गरीब परिवारों के लिए बजट में कुछ सकारात्मक होने पर भी लोगों में ने चैन की सांस ली तो कईयों ने इसे और व्यापक करने की आवश्यकता पर बल दिया. वहीं इनकम टैक्स में कोई बदलाव नहीं होने से आमजन नाराज दिखे. व्यवसायियों ने इनकम टैक्स स्लैब को बढ़ा कर कम से कम तीन लाख करने की मंशा जाहिर करते हुए निराशा दिखायी. कार, मोटरसाइकिल, फ्रूट जूस तथा इलेक्ट्रॉनिक्स सामान के अब महंगा हो जाने से मध्यम वर्ग ने अपने साथ नाइंसाफी की संज्ञा दी तो शिक्षा के क्षेत्र में ब्लैक बोर्ड की जगह डिजिटल बोर्ड लगाने, 10 करोड़ गरीब परिवारों को हेल्थ बीमा के तहत पांच लाख का स्वास्थ्य बीमा करने, अनुसूचित जाति, जनजाति की जनसंख्या के लिए एकलव्य सकूल खोले जाने, उज्जवला योजना के तहत लक्ष्य को बढ़ा कर 8 करोड़ महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन देने, वरिष्ठ नागरिकों के लिए स्वास्थ्य बीमा पर छूट बढ़ा कर 50 हजार रुपये करने तथा डिपोजिट पर मिलने वाली छूट को 10 हजार से बढ़ा कर 50 हजार करने पर लोगों में हर्ष दिखा .

और उन्होंने इसे गरीबों के हित में एक लाभकारी बजट बताया. 70 लाख नौकरियों देने का वादा युवाओं के लिए सुखद अनुभव देने वाला रहा तो वहीं गांवों में इंटरनेट के विकास के लिए 10 हजार करोड़ रुपये खर्च करने की योजना को ग्रामीण युवाओं ने सराहा.

आम बजट को लेकर सराहना और आलोचनाओं के बीच दिन भर चर्चा करते रहे शहरवासी

lमोबाइल व टीवी के दाम में बढ़ोतरी होने से निराशा

lनागरिकों के लिए मेडिक्लेम का कदम सराहनीय
lमहिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन देने की घोषणा से हर्ष
मेडिकल कॉलेज खोले जाने से छात्रों को सुविधा होगी
स्टैंर्ड डिडक्शन स्कीम को पुन: शुरू किया जाना स्वागत योग्य कदम है. सोने, चांदी पर तीन प्रतिशत के जीएसटी को घटा कर दो प्रतिशत करना चाहिए था. त्रैमासिक रिटर्न भरने का प्रावधान ठीक रहता.
रजनीश जायसवाल, आभूषण व्यवसायी
कॉरपोरेट इनकम टैक्स का रेट घटाया गया है. यह अच्छा कदम है. छोटे व्यवसायियों को इससे फायदा मिलेगा. वरिष्ठ नागरिकों के लिए मेडिकल क्लेम सराहनीय है. मध्य वर्ग के लिए कुछ नहीं है.
अतुल कुमार, सीइओ, अतुल मशीनरी प्राइवेट लिमिटेड
स्वास्थ्य बीमा अच्छी पहल है, परंतु यह केवल बीपीएल धारकों के लिए न करके इसमें निम्न मध्य वर्ग को भी शामिल करना चाहिए था. मध्यम वर्ग के साथ नाइंसाफी हुई है.
प्रभाकर गुप्ता, थोक कपड़ा व्यवसायी
बदहाल हो रहे किसानों के लिए सकारात्मक पहल की गयी है. अब सभी फसलों के समर्थन मूल्य बढ़ाने से किसानों को राहत मिलेगी. ई टिकट पर सर्विस टैक्स कम करने का फायदा होगा. बुजुर्गों के लिए स्वास्थ्य बीमा से लाभ होगा.
संजय रस्तोगी, व्यवसायी सह किसान
70 लाख नई नौकरियां उपलब्ध कराने से बेरोजगारी पर अंकुश लगेगा. साथ ही 600 नये रेलवे स्टेशन बनाने की योजना से भी रोजगार के अवसर पैदा होंगे. इससे आम लोगों को काफी राहत िमलेगी.
शक्ति प्रसन्न, अध्ययनरत व्यवसायी
आयकर में छूट की सीमा बढ़ानी चाहिए थी, चार वर्षों से इंतजार था. निराशा हाथ लगी. रेल और सड़क में बजट बढ़ाने से परिवहन में गतिशीलता आयेगी. लोगों के इलाज के लिए स्वास्थ्य के क्षेत्र की गयी घोषणा सराहनीय है.
अब्दुल कलाम, बरतन व्यवसायी
हर तीन संसदीय क्षेत्र में एक मेडिकल कॉलेज सहित देश भर में 24 नये मेडिकल कॉलेज खोले जाने से छात्रों को सुविधा होगी. ब्लैक बोर्ड की जगह डिजिटल बोर्ड लगाना अच्छी पहल है.
प्रियंका कुमारी, शिक्षिका सह गृहिणी
राष्ट्रपति, उप राष्ट्रपति व राज्यपाल के वेतन में इजाफा से जहां इन्हें उपकृत करने का प्रयास किया गया है. वहीं जरूरी सामानों को महंगा करके आम लोगों के साथ छल किया गया है.
सुनील कुमार जायसवाल, दवा विक्रेता
इनकम टैक्स स्लैब में छूट नहीं होने से निराशा हुई है. वरिष्ठ नागरिक को थोड़ी राहत, किसानों को राहत, छोटी कंपनियों का होगा फायदा. सड़क और रेल परियोजनाएं में बजट बढ़ाने से लाभ.
पवन कुमार अग्रवाल, महासचिव
पश्चिमोत्तर बिहार वाणिज्य उद्योग परिषद्
शिक्षा और स्वास्थ्य पर लगने वाले सेस को तीन प्रतिशत से बढ़ा कर चार प्रतिशत कर देना अनुचित है. इससे कर का बोझ बढ़ेगा. म्यूचुअल फंड से होने वाली कमाई पर 10 प्रतिशत टैक्स अधिरोपित करना हितकारी नहीं.
संजीव रंजन उर्फ सुबोध सिंह, अधिवक्ता

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >